-उपेक्षा के कारण नहीं मिला आज तक कोई मुकाम
-पहाड़ी, हिन्दी और अग्रेंजी में क्रिकेट कमेन्ट्री करने मेें दक्षता प्राप्त
समाचार सच, हल्द्वानी। क्रिकेट युवाओं का पंसदीदा खेल है। अधिकतर युवा इसे खेलना पसन्द करते है, लेकिन कुछ युवाओ की शौक इससे इतर होती है। क्रिकेट से जुड़ी एक विद्या है, ऑखों देखी घटना का वर्णन करना जो कमेन्ट्री कहलाता है। कमेन्ट्री करने में भाषा की जानकारी आवश्यक है। इसके अलावा मैदान पर खिलाड़ियों की पोजीशन व विस्तृत खेल सम्बन्धी जानकारी कमेन्ट्री के लिए आवश्यक माना जाता हैं। इस विद्या में कुछ महारत हासिल कर लेते हैं तो कुछ मुकाम हासिल करने के लिए संघर्षरत रहते हैं।
उत्तराखण्ड़ में अनेक प्रतिभायें हुई हैं, जिन्होने प्रदेश में ही नहीं वरन् भारत में भी अपना नाम रोशन किया हैं। राज्य में अनेक छिपी हुई प्रतिभायें भी हैंं, जो समाजिक परिदृश्य में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के बावजूद भी आज सूबे में उपेक्षित हैं। वहीं गॉवों में गुदड़ी के लाल अपना जलवा नही दिखा पा रहे हैं। इन पस्थितियों में राज्य से कोई ‘हर्ष भोगले’ बने भी तो कैसे? कुछ प्रतिभायें प्रोत्साहन मिलने से आगे बढ़ गयी, और कुछ प्रतिभायें प्रकाश में नहीं आ पायी। ऐसी ही एक प्रतिभा हैं, जिन्हें क्रिकेट कमेन्ट्री पहाड़ी, हिन्दी और अंग्रेजी में करने मेें दक्षता प्राप्त हैं।
दीप चन्द्र लोहनी जिनको क्रिकेट विशेषज्ञ माना जाता हैं, वो कमेन्ट्री में महारत होने के बावजूद वे अभी तक उस मुकाम पर नही पहुॅच पाये, जहां उनको होना था। उल्लेखनीय हैं कि गरुढ़ के मल्ला भेटा निवासी हाल निवासी गोरापड़ाव दीप चन्द्र लोहनी को क्रिकेट का शौक बचपन से ही रहा हैं। कौसानी की सुरम्य वादियों में प्राइमरी शिक्षा पाने के दौरान उन्होंने क्रिकेट सुनकर कमेन्ट्री का शौक जगा। विशेषकर रेड़ियो पर क्रिकेट कमेन्ट्री सुुनकर उन्होंने अपने ज्ञान को समृद्ध किया। उनका कहना हैं, कि आज भी क्रिकेट मैंचों की कमेन्ट्री सुनते हैं, जिससे उनको स्तर बनाने में सुधार आये। वे अल्मोड़ा व बागेश्वर क्षेत्र के अनेक बड़े-बड़े स्तर के मैचों में कमेन्ट्री कर चुके हैं। इन मैचांे में कमेन्ट्री करके उन्होंने खेल प्रेमियों को काफी प्रभावित किया। बागेश्वर जैसे दूरस्थ क्षेत्र में रहकर वे अपने खेल प्रेम को जारी रखे हुए हैं। वर्तमान में वह लालकुआं विधानसभा में अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेर रहे हैं।
उनकी इस प्रतिभा को सरकार से आज तक कोई प्रोत्साहन नहीं मिला। एक बार उन्हांेने आकाशवाणी नजीबाबाद में सम्पर्क किया, लेकिन वहां पर तकनीकी समस्या आड़े आने से उनकी रिकार्डिंग नहीं हो पायी, लेकिन अभी भी उनके प्रयास जारी हैं। सरकार राज्य में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की बात करती है लेकिन राज्य में ठोस प्रयास नही हुए, जिसके कारण उनकी प्रतिभा उपेक्षित है।



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