समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पंचांग के अनुसार 30 दिसंबर बुधवार को पूर्णिमा की तिथि है। इस पूर्णिमा की तिथि को मार्गशीर्ष पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा वर्ष 2020 की अंतिम पूर्णिमा है। पूर्णिमा का धार्मिक महत्व सभी जानते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की जन्म कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, उन्हें पूर्णिमा की तिथि को चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए, ऐसा करने से चंद्रमा का दोष समाप्त हो जाता है
चंद्रमा के दोष से मिलने वाले फल
चंद्रमा जब कमजोर होता है तो व्यक्ति को मानसिक तनाव, मन में बुरे विचार आते हैं वहीं सेहत को लेकर भी समस्या बनी रहती है। चंद्रमा कमजोर हो तो मां को भी परेशानी होती है। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। सभी जानते हैं, जब मन अच्छा होता है तो सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करें
मार्गशीर्ष मास भगवान श्रीकृष्ण का सबसे प्रिय मास माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस मास में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और आराधना करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण की कथा का विशेष महत्ब बताया गया है। जिन लोगों को घर में नकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है, उन्हें इस पूर्णिमा पर सत्यनारायण की कथा करानी चाहिए। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और खुशहाली आती है। इस पूर्णिमा पर की जाने वाली पूजा से वास्तु दोष भी दूर होता है।
नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव
नकारात्मक ऊर्जा जब घर में होती है तो कई तरह की परेशानियां देखने को मिलती हैै। घर के मुखिया को धन हानि होने लगती हैै। पति- पत्नी के रिश्ते प्रभावित होने लगते हैैं। परिवार के लोगों में मनमुटाव स्थिति पैदा होने लगती है, घर के बड़े और बुजूर्गों के सम्मान में कमी आनी लगती है। बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता हैै।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा शुभ मुहूर्त
मार्गशीर्ष पूर्णिमा प्रारम्भ:07ः54, दिसम्बर 29
मार्गशीर्ष पूर्णिमा समाप्त: 08ः57, दिसम्बर 30
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