समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पानी की टंकी के वास्तु दोष को दूर करने के लिए उसे घर के दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दिशा में ऊंचे चबूतरे पर स्थापित करना सबसे शुभ है, जो स्थिरता और समृद्धि लाता है। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में पानी की टंकी होना सबसे बड़ा दोष है, जिसे दूर करने के लिए उसे वहां से हटाना या ईशान कोण में नीले रंग की टंकी का प्रयोग करना उत्तम है।
पानी की टंकी वास्तु दोष निवारण के प्रमुख उपाय
स्थान का सही चयन
ओवरहेड टैंक (छत की टंकी) के लिए दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) दिशा सबसे उपयुक्त है। यदि यह संभव न हो, तो पश्चिम या दक्षिण दिशा का उपयोग करें। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में टंकी रखने से बचें, इससे स्वास्थ्य और आर्थिक समस्याएं हो सकती हैं।
प्लेटफॉर्म का उपयोग
पानी की टंकी को सीधे छत पर न रखें। इसे हमेशा 3-4 इंच ऊंचे चबूतरे या स्टैंड के ऊपर रखें, विशेषकर दक्षिण-पश्चिम में।
सही दिशा के उपाय
ईशान (उत्तर-पूर्व)
यदि टंकी यहाँ है, तो उसे हटा दें या उसे ढकने के लिए नीला/हल्का रंग का उपयोग करें। आप वहां पर पानी भरा कटोरा रख सकते हैं।
आग्नेय (दक्षिण-पूर्व)
यह अग्नि स्थान है, यहाँ टंकी होने से धन हानि हो सकती है। इसे तुरंत हटाकर दक्षिण-पश्चिम में ले जाएं।
टंकी का रंग
वास्तु के अनुसार, छत की टंकी के लिए सफेद, ग्रे या पीले रंग सबसे अच्छे माने जाते हैं, जबकि लाल, हरे और नारंगी रंगों से बचना चाहिए।
साफ-सफाई और मरम्मत
टंकी को नियमित रूप से साफ रखें और उसमें से पानी का रिसाव न होने दें, क्योंकि सीलन से घर की ऊर्जा प्रभावित होती है।
भूमिगत टैंक
भूमिगत पानी की टंकी के लिए उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा उत्तम है, लेकिन इसे कभी भी दक्षिण-पश्चिम में नहीं बनवाना चाहिए।
संक्षेप वास्तु दोष कम करने के लिए टंकी को दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दिशा में ही रखें और अगर दोषपूर्ण दिशा में है तो उसे हटाकर सही स्थान पर स्थापित करना ही सर्वाेत्तम उपाय है।



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