समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। सामान्यतः किसी भी शुभ कार्य- जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश के लिए ग्रहों और नक्षत्रों की गणना करके मुहूर्त निकाला जाता है या चौघड़िया मुहूर्त देखा जाता है लेकिन साल में साढ़े तीन दिन ऐसे होते हैं जबकि पूरा दिन ही दोषरहित हो जाता है। इसे अबूझ या अनपूछा मुहूर्त भी कहा जाता है। यानी इस दिन बिना पंचांग देखे शुभ कार्य किए जा सकते हैं। अक्षय तृतीया उन्हीं साढ़े तीन दिनों में से एक दिन है जबकि मुहूर्त देखकर कार्य करने की जरूरत नहीं। अब जानिए पूजा विधि और अटूट संपन्नता के लिए खरीदारी।
पूजा की पूर्व तैयारी
स्नान – सूर्याेदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी या घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
संकल्प – हाथ में जल लेकर व्रत और दान का संकल्प करें।
वस्त्र – इस दिन पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
वेदी और कलश स्थापना
- घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में एक चौकी रखें और उस पर पीला कपड़ा बिछाएं।
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- यदि संभव हो, तो एक जल से भरा कलश स्थापित करें, जिस पर चंदन से स्वास्तिक बना हो।
मुख्य पूजा विधि
अभिषेक- भगवान विष्णु को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं और फिर शुद्ध जल चढ़ाएं।
पीला श्रृंगार- विष्णु जी को पीले फूल, पीले चंदन और तुलसी दल अर्पित करें। माता लक्ष्मी को कमल का फूल, लाल चुनरी और कुमकुम चढ़ाएं।
धूप-दीप – शुद्ध घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
विशेष भोग – अक्षय तृतीया पर सत्तू, ककड़ी, चने की दाल और ऋतु फल (जैसे खरबूजा) का भोग लगाना अनिवार्य माना गया है।
दान का महत्व
इस दिन पूजा के बाद दान करना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जो वस्तुएं हम दान करते हैं, वे हमें अक्षय रूप में वापस मिलती हैंरू
- जल से भरे घड़े (मटके) का दान।
- जो का दान (स्वर्ण दान के समान माना गया है)।
शुभ मंत्र
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करें – विष्णु मंत्र- ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय
लक्ष्मी मंत्र: ऊँ श्रीं हृीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं हृीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
अक्षय तृतीया पर ध्यान रखने योग्य बातें
पितृ तर्पण- इस दिन पितरों के निमित्त जल दान और तर्पण करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।
सोना खरीदना – यदि संभव हो, तो थोड़ा सा सोना या चांदी खरीदना शुभ होता है। यदि नहीं, तो मिट्टी का नया घड़ा या ‘जौ’ खरीदना भी उतना ही फलदायी है।
सफाई- घर की उत्तर-पूर्व दिशा को बिल्कुल साफ रखें क्योंकि माता लक्ष्मी का आगमन वहीं से माना जाता है।
विशेष टिप- अक्षय तृतीया एक ‘अबूझ मुहूर्त’ है, यानी इस दिन कोई भी नया काम (व्यापार, गृह प्रवेश, विवाह) बिना पंचांग देखे किया जा सकता है।
घर लाएं अटूट संपन्नता
सोना चांदी – सोना या चांदी खरीदना इस दिन बहुत शुभ माना गया है।
मिट्टी का घड़ा – इसे खरीदना शुभ है; यह मानसिक शांति और धन की आवक बनाए रखता है।
तांबे या पीतल के बर्तन – इन्हें स्वर्ण के समान माना जाता है; इनसे देवी-देवताओं, विशेषकर माँ दुर्गा की कृपा मिलती है।
कौड़ियां – माँ लक्ष्मी का प्रतीक हैं; इन्हें खरीदकर तिजोरी में रखने से सुख-समृद्धि आती है।
जौ या पीली सरसों- इन्हें चांदी और सोने के समान माना गया है; ये घर में बरकत और खुशहाली लाते हैं।
रुई या सेंधा नमक – कम बजट में ये बेहतरीन विकल्प हैं; रुई शांति और धन बढ़ाती है, जबकि सेंधा नमक परिवार की सेहत और सुख के लिए उत्तम है।
नोट: उपरोक्त में से आप यथाशक्ति जो चाहें वह खरीद सकते हैं।



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