समाचार सच, आध्यात्म डेस्क। वैज्ञानिक खोजें ग्रह-नक्षत्रों का वजूद साबित करती हैं। हिन्दू धर्मशास्त्रों है। में ग्रहों को देव स्वरूप माना गया है। यही कारण है कि विज्ञान व धर्म की ही नजर से ग्रहों की गति व ऊर्जा का शुभ प्रभाव इंसानी जीवन के लिये की मंगलकारी माना जाता है। वहीं ज्योतिष विज्ञान की नजर से कुण्डली में ग्रहों की अशुभ स्थिति व प्रभाव से इंसान की शारीरिक, मानसिक व आर्थिक दशा में अनचाहे बदलाव आते हैं। यही वजह है कि शास्त्रो में देव स्वरूप इन ग्रहों की उपासना से जल्द और ना असरदार शुभ नतीजों के लिए मंत्र स्मरण का महत्व बताया गया है। इनमें कुछ मंत्र ऐसे भी है, जो आसान और छोटे तो हैं, लेकिन उनका स्मरण ग्रह दोषों से मिलने वाली परेशानियों से बचाने व दूर करने में अचूक माना गया है।
जानिए, ऐसे ही 9 ग्रहों के 9 बेहद आसान मंत्र- स्तान के बाद नवग्रह मंदिर में या नवग्रह यंत्र द्वारा सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु व केतु की पंचोपचार पूजा यानी चंदन, गंध, अक्षत, फूल, नैवेद्य अर्पित करें। धूप व दीप लगाकर तस्वीरों के साथ बताए नवग्रह मंत्रों का स्मरण कर पीड़ा व परेशानियों से रक्षा की कामना व आरती करें
सूर्य मंत्र – ऊँ आदित्याय नमः। इस मंत्र ध्यान से अच्छी सेहत, प्रतिष्ठा व तरक्की मिलती है।
चंद्र मंत्र – सोमाय नमः। इस मंत्र ध्यान से मानसिक परेशानियां दूर होती है। पेट व आंखों की बीमारियों में राहत मिलती है।
मंगल मंत्र – ऊँ भौमाय नमः। इस मंत्र जप से भूमि, संपत्ति व विवाह बाधा दूर होने के साथ तमाम सांसारिक सुख मिलते है।
बुध मंत्र – ऊँ बुधाय नमः। यह मंत्र जप बुद्धि व धन लाभ देता है।
गुरु मंत्र-ऊँ बृहस्पतये नमः। इस मंत्र जप से सुखद दाम्पत्य, आजीविका व सौभाग्य प्राप्त होता है।
शुक्र मंत्र – ऊँ शुक्राय नमः। यह मंत्र जप वैवाहिक जीवन के खुशहाल बनाता है।
शनि मंत्र- ऊँ शनैश्चराय नमः। तन, मन, धन से जुड़ी तमाम परेशानियां दूर कर भाग्यशाली बनाता है।



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