क्या शिवलिंग पर बेलपत्र उल्टा चढ़ाएं या सीधा, यहां जानें चढ़ाने-तोड़ने के नियम

खबर शेयर करें

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। भगवान शिव जी का प्रिय महीना सावन शुरू हो चुका है. पुराणों और धर्म शास्त्रों में भोले बाबा को प्रसन्न करने के लिए सावन का महीना सबसे उत्तम माना गया है. इस पूरे माह में भक्त पूरे भक्ति भाव से शिव जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है. इन दिनों सावन के सोमवार का व्रत करने का काफी महत्व बताया गया है. सावन माह में शिवजी की पूजा में बेलपत्र जरूर चढ़ाया जाता है क्योंकि ये भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय होता है. अलग-अलग शास्त्रों में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के कुछ नियम बताए गए हैं जिसे हर एक शिव भक्त को जरूर जानना चाहिए. इस रिपोर्ट में हम आपको बेलपत्र चढ़ाने के कुछ नियमों को बताने जा रहे हैं…

जानें शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के नियम

कितने चढ़ाएं बेल पत्र
भगवान शिव की पूजा करते समय बेलपत्र कितनी संख्या में चढ़ाएं ये सही से पता होना चाहिए. सावन के इस महीने में बेलपत्र आसानी से मिल जाता है. आप शिवलिंग पर 11,21,51 और 101 बेलपत्र को चढ़ा सकते हैं. वैसे तो ये आपकी भक्ति पर भी निर्भर करता है, एक बेलपत्र भी भोले को खुश कर सकता है.

यह भी पढ़ें -   आज का राशिफल | 30 अगस्त 2026, रविवार | जानिए आज का पंचांग और सभी 12 राशियों का भविष्यफल, किस राशि को मिलेगा धन लाभ और किन राशियों को बरतनी होगी सावधानी

नहीं चढ़ाएं ऐसे बेलपत्र
भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से पहले यह जरूर देख लें कि यह कहीं से भी कटा-फटा नहीं होना चाहिए. बेलपत्र की तीन पत्तियां ही भगवान शिव को चढ़ती है. अगर कोई पत्ती कटी फटी है तो ऐसा बेलपत्र न चढ़ाए.

कैसे चढ़ाएं बेलपत्र
भोले बाबा को सावन के महीने में किसी भी तरह की पूजा में हमेशा उल्टा बेलपत्र यानी चिकनी सतह की तरफ वाला वाला भाग स्पर्श कराते हुए ही बेलपत्र चढ़ाना चाहिए. ध्यान रखें कि बेलपत्र को हमेशा अनामिका, अंगूठे और मध्यमा अंगुली की मदद से चढ़ाएं. मध्य वाली पत्ती को पकड़कर महादेव को अर्पित करें.

यह भी पढ़ें -   नेपाल बाढ़ में तबाही और बढ़ी: 675 मौतें, करीब 2,500 लापता, भोटेकोशी नदी में फिर बढ़ा जलस्तर, हाई अलर्ट

कब तोड़ना चाहिए बेलपत्र
बेलपत्र को कुछ तारीखों में तोड़ना वर्जित माना गया है. जैसे कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को, संक्रांति के समय और सोमवार को बेल पत्र नहीं तोड़ते हैं. ऐसे में पूजा से एक दिन पहले ही बेल पत्र तोड़कर रखा जाता है.

माना जाता है शुद्ध
बेलपत्र कभी अशुद्ध नहीं होता है. पहले से चढ़ाया हुआ बेलपत्र भी फिर से धोकर चढ़ाया जा सकता है. महादेव की पूजा करते समय बेलपत्र के साथ जल की धारा जरूर चढ़ाएं।

ADVERTISEMENTSAd Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440