समाचार सच, हल्द्वानी। देश में कोरोना वायरस महामारी से निपटने को देश में समाजसेवियों ने हाथ खोल दिये हैं। जहां देश में जनप्रतिनिधियों व समाजसेवी करोड़ों व अरबों का दान कर रहे हैं। वहीं हल्द्वानी में बड़े व सम्पन्न लोग अभी भी दान देने में कंजूसी बरत रहे हैं। वहां आम सामाजिक कार्यकर्ता समाजसेवा में लगे हैं। गौरतलब है कि हल्द्वानी को कुमाऊँ की आर्थिक नगरी कहा जाता है। यहां तमा जनप्रतिनिधि, उद्योगपति, नौकरशाह, समाजसेवी आदि रहते हैं। लेकिन जिस प्रकार से अभी दान देने की सूची देखी जाये तो बड़े व सम्पन्न लोगों ने अपने अभी खास दान राशि प्रदान नहीं कर रहे हैं।
देखने में आ रहा है कि यहां पर कुछ लोग व समाजसेवी, दान दे रहे हैं और लोगों की भरपूर सहायता कर रहे हैं। हालांकि शहर के भारी भरकम लोग अभी दान देने में कंजूसी बरत रहे हैं, यह आंकड़ा संतोषजनक नहीं कहा जा सकता है।
कोरोना बीमारी को लेकरी बाहर से आने वाले यात्रियों के समक्ष भाजन व अन्य वस्तुओं के अभाव को देखते हुए यहां के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने सामर्थ्य के अनुसार दान देना शुरू कर दिया है। वे यात्रियों के लिए भोजन, फल, पानी की बोतल, बिस्किट, सब्जी आदि उपलब्ध करा रहे हैं।
इधर हल्द्वानी के आम लोगों ने इन समाजसेवियों की पहल की सराहना की है, वहीं इस बात की टीस भी है कि यहां पर जो बड़े व अभिजात्य वर्ग के सम्पन्न, सियासतदां, उद्योगपति, व्यापारी अभी तक इस मामले में खुलकर सामने नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि कुछ सम्पन्न, सियासतदां ने लोगों के भोजन आदि का प्रबन्ध कर अच्छा कार्य किया है।
छपास प्रेमी समाजसेवी गायब
हल्द्वानी। आये दिन समाजसेवा का दंभ भरने वाले और मीडिया में छाये रहने वाले तथाकथित समाजसेवी आजकल गायब हो गये हैं। हालांकि वे आर्थिक रूप से सम्पन्न हैं, लेकिन कोरोना बीमारी को लेकर इन लोगों ने अभी तक पहले नहीं की। अगर ये समाजसेवी सेवा की पहल करते तो त्सवीर कुछ और होती।
काश! ऐसा भी होता
हल्द्वानी। बरेली रोड स्थित मंडी के बाहर अगर प्रशासन कुछ आवश्यक वस्तुओं की दुकाने नियंत्रित मूल्यों पर खोल देता तो इससे आम लोगों को राहत मिलती। हालांकि बाजार में अभी सामान महंगा नहीं मिल रहा है, लेकिन कहीं न कहीं इसका उल्लघंन भी देखने को मिल रहा है।
साधन सहकारी समिति व मिल पेश कर सकती है मिसाल
हल्द्वानी। हल्द्वानी में चावल व आटा की मिल से सीधे माल लेकर साधन सहकारी समिति कम रेटों पर उपभोक्ताओं को सामान देकर मिसाल कायम कर सकती है। हालांकि यह काम थोड़ा जटिल है, लेकिन शासन प्रशासन चाहे तो इसे धरातल पर उतारा जा सकता है।



सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें
👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें
👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें
हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440


