कौन-कौन सी आयुर्वेदिक औषधियां हमारे आसपास आसानी से मिल जाती हैं, पर हम उन्हें पहचान नहीं पाते हैं?

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। हमारे घर के पास, सड़क के किनारे, बगीचे में या फिर किसी बेकार पड़ी जमीन पर कई पौधे उगे होते हैं। ये पेड़-पौधे आश्चर्यजनक रूप से हमारे कई जटिल रोगों को ठीक कर सकते हैं। अगर हमें इनकी उपयोगिता और इनकी अहमियत मालूम हो तो हम इन्हें सहेज कर इनकी मदद से कई रोगों को खत्म कर सकते हैं 30 आयुर्वेदिक औषधियां हमारे आसपास आसानी से मिल

  1. अपामार्ग
    आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉक्टर अबरार मुल्तानी का कहना हैं कि मेरी यह सबसे पसंदीदा दवाई है। मुझे इससे प्रेम है क्योंकि यह मानवता के लिए ईश्वर का अद्भुत वरदान है। इसके कई कई चिकित्सा उपयोग हैं-
    -बिच्छू काट लेने पर दंश स्थान पर इसकी पत्तियों का रस लगाकर इसकी जड़ को घिसने से कुछ ही सेकेंड में आराम मिल जाता है। यह बात हमारे देश के सभी किसान भाइयों को पता चल जाए तो वे उस पीड़ा से कितनी आसानी से निपट सकती हैं।
    -थायरॉयड की समस्या में इसकी पत्तियों का चूर्ण बहुत लाभ पहुंचाता है।
    -सैल्युलाईटिस (शोध) में इसकी पत्तियों का लेप अद्भुत है।
    -अस्थमा में इसकी जड़ का चूर्ण सुबह खाली पेट लेने से शानदार परिणाम मिलते हैं।
    -जड़ का चूर्ण या काढ़ा पथरी के लिए सटीक दवाई है।
    -इसके बीज पाइल्स और पीरियड्स में अधिक ब्लड आने की अच्छा हर्ब है।
    -इसके बीज की दूध में बनाई खीर खाने से बहुत ज्यादा भूख लगने की समस्या दूर हो जाती है।
    -मोटापे में इसकी पत्तियों का चूर्ण बहुत लाभदायक है विशेष रूप से महिलाओं में।
  2. पपीता
    पपीता के पत्तों की आज के समय में बहुत डिमांड में है। हर कंपनी इसके पत्तों के जूस का एक्सट्रेक्ट बनाकर बेच रही है क्योंकि यह प्लेटलेट्स की संख्या को बड़ी तेजी से बढ़ाता है इसलिए यह जानलेवा डेंगू में बहुत उपयोगी है। इसके पत्तों के रस को डेंगू के रोगी को पिलाने से बहुत लाभ होता है।
    -पपीता का फल खाने से पाचन सम्बन्धी समस्या खत्म होती है। कब्ज में यह बहुत लाभ करता है।
    -पपीता के सूखे बीज आंतों से जहर को निकालते हैं और यह अपण्डिसाईटिस में बेहद उपयोगी है।
    -पपीता के कच्चे फलों से निकाला गया लेटेक्स या रस ट्यूमर और कैंसर में बहुत लाभदायक है।
  3. धतूरा
    आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉक्टर अबरार मुल्तानी का कहना हैं कि ‘‘धतूरा वह अमृत है जिसे हम जहर समझकर नज़रंदाज़ कर देते हैं या डर जाते हैं। हिन्दू धर्म के आराध्य शिवजी का यह बेहद प्रिय है।’’ आइए इसके कुछ लाभ मैं आपको बताऊं-
    -इसकी पत्तियों को पानी मे उबालकर उस पानी से सिर धोने से जुएं नही पड़तीं।
    -इसी पानी से दर्द और सूजन वाली जगह पर सिकाई करने से बहुत आराम मिलता है।
    -इसके पूरे पौधे को लेकर उसे सरसो के तेल में पका लें और उस तेल से जोड़ों की मालिश करने से जोड़ों का दर्द कम होता है।
  4. अर्क
    -अर्क या अकव्वा एक बेहद ही उपयोगी हर्ब है। आयुर्वेद में इसे जड़ी बूटियों का पारद कहा जाता है।
    -इसकी जड़ की छाल ट्यूमर, सिस्ट, एब्सेस और सभी घावों में बेहद लाभ पहुंचाती है। इसे केवल एक चुटकी की मात्रा में शहद के साथ लिया जाता है।
    -इसके पत्तों को गरम करके एड़ी पर बांधने से एड़ियों का दर्द ठीक हो जाता है।
    -इसके पत्तों से निकलने वाले दूध को चुभे हुए कांटे या अन्य कोई वस्तु जैसे कांच आदि पर लगाने से वह स्वतः बाहर निकल आती है।
    -इसके फूल की पंखुड़ियों को निकालकर बचे हुए भाग को पान में रखकर चूसने से पीलिया और अन्य लिवर रोगों में बहुत आराम मिलता है।
    -इसके फूलों का चूर्ण अर्थराइटिस में बहुत लाभदायक है।
  5. अरण्डी यानि कैस्टर
    -अरण्डी के पौधे के सभी हिस्से विशेष औषधि महत्व के हैं।
    -इसकी नई और कोमल लालिमायुक्त पत्तियों का आधा से एक चम्मच रस दूध में मिलाकर लेने से पीलिया में बहुत लाभ होता है।
    -इसकी जड़ का काढ़ा बनाकर लेने से पथरी निकल जाती है।
    इसकी जड़ को दूध में पकाकर उस खीर को पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है।
    -इसके बीजों से निकलने वाला तेल कब्ज और आंतों से संबंधित रोगों को ठीक करता है। जोड़ों के दर्द में भी यह तेल बहुत लाभदायक है।
  6. तुलसी
    तुलसी भारतीय घरों में आसानी से मिल जाती है. तुलसी के पत्तों में भी एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। तुलसी की पत्तियों का सेवन कर इम्यून सिस्टम को मजबूत किया जा सकता है। तुलसी की पत्तियों का सेवन अगर शहद के साथ किया जाए तो यह इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने में काफी लाभकारी साबित हो सकती हैं। ऐसे में अगर आप इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इस उपाय को आजमाएंगे तो आपको जरूर फायदा हो सकता है।
  7. हल्दी
    हल्दी में एंटी ऑक्सीडेंट्स और एंटी इंफ्लेमेट्री गुण मौजूद होते हैं, जो सेहत के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकते हैं। भारतीय मसालों में हल्दी का प्रमुख स्थान है और सेहत से जुड़ी कई प्रकार की बीमारियों और समस्याओं को दूर करने के लिए भी हल्दी का सेवन किया जाता है। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हल्दी एक आयुर्वेदिक औषधि की तरह काम कर सकती हैं। हल्दी का सेवन करने के लिए आप दूध में हल्दी मिला सकते हैं या शहद और पानी में उबालकर इसका सेवन कर सकते हैं।
  8. अदरक
    हमारे किचन में अदरक न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है बल्कि स्वास्थ्य को कई तरह के फायदे भी दे सकता है। सर्दी, खांसी और जुकाम से लेकर यह इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। अदरक में कई तरह के गुण होते हैं जो इम्यून सिस्टम को बूस्ट कर सकते हैं। अदरक में एंटी बैक्टीरियल, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो इम्यून सेल्स बढ़ावा देते हैं। इसका सेवन आप चाय या पानी घोलकर शहद के साथ कर सकते है।
  9. टी बैग
    टी बैग का प्रयोग भी औषधि के रूप में किया जाता है । अगर कभी भी आपको सो कर उठने के बाद अपनी आंखों में सूजन लगे तो आप इसे ठंडे पानी में भिगोकर अपनी आंखों पर रख लें। आप शीघ्रता से आराम पाएंगे ।
  10. जैतून का तेल
    जैतून का तेल एक बहुत ही अच्छी औषधी है जिसके अनेक उपयोग हैं। यह आपको अनेक प्रकार से लाभ पहुंचाता है। सोने से पहले अगर इससे पैरों की मालिश की जाए तो पैर काफी खूबसूरत होते हैं। बालों पर भी इसकी मालिश असरदार होती है।
  11. नाशपती
    नाशपती का प्रयोग भी अनेक प्रकार की समस्याओं को दूर कर देता है। इससे चेहरे को साफ करने पर चेहरा दमकने लगता है और त्वचा जवान दिखती है।आप इसे पीस कर प्रयोग में ले सकती हैं।
  12. लहसुन
    लहसुन भी एक असरदार औषधि है जो कि एक बहुत ही बेहतरीन एंटीबायोटिक का काम करती है। इसका सेवन र्ह्दयरोगी के लिए फायदेमंद होता है । यह कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी सहायक है।
  13. शहद
    शहद एक बेहतरीनऔर असरदार औषधि है। यह पाचन शक्ति को मजबूत बनाने का काम करता है।यह फंगस को खत्म करता है, बैक्टीरिया को रोकता है और सर्दी जुकाम आदि में भी लाभ पहुंचाता है।
  14. दालचीनी
    दालचीनी का प्रयोग आपको हानिकारक बैक्टीरिया से बचाता है। यह भूख बढ़ाने में भी सहायक है। यह मसाला पोटैशियम, लोहा, मैग्नीशियम आदि का बहुत ही अच्छा स्त्रोत है। यह अपने में अनेक विटामिन भी लिए हुए है।
  15. नींबू
    नींबू एक ऐसी औषधि है जो गर्मी को कम करके शरीर मे ठंडक पहुंचाता है और लू से भी रक्षा करता है। इसमें विटामिन सी पाया जाता है जो कि हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक होता है।
  16. एलोवेरा
    यह अपने त्वचा – संबन्धित कई गुणों के लिए जाना जाता है, जैसे मुंहासों, त्वचा के कटने और जलने आदि को ठीक करने के लिए। इसके अलावा इसमें कई कॉस्मेटिक गुण भी है।
  17. पुदीना
    पुदीने के कई स्वास्थ्य लाभ हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट होता है जो एलर्जी, बुखार, सर्दी – जुखाम आदि समस्याओं से निपटने में आपकी मदद करता है । यह माउथ फ्रेशनर के रूप में भी काम करता है और अपच/पेट खराब जैसी समस्याओं को भी ठीक करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि, पुदीना शरीर की गर्मी को कम करने में भी मदद करता है।
  18. नीम
    नीम की पत्तियों का उपयोग नाक से खून, पेट के संक्रमण, त्वचा संबन्धित रोग, मधुमेह, हृदय रोग आदि को ठीक करने के लिए किया जाता है । यह कैल्शियम, प्रोटीन, और आयरन से भरपूर होता है।
    -एक गमले में नीम के बीज को बोएं, ध्यान रहे कि नीम के पेड़/पौधा उच्च तापमान में अच्छी तरह से पनपता है
  19. गेंदे का फूल
    यह एक पीले और नारंगी रंग का फूल है जिसमें सौंदर्य के साथ-साथ औषधीय गुण भी है। गेंदे के फूल की पंखुड़ियों का उपयोग धूप से जली/झुलसी हुई त्वचा को ठीक करने के लिए किया जाता है। यह मुँहासे और छालों को ठीक करने में भी मदद करता है।
  20. धनिया
    आप घर पर ही चौड़े आकार के गमले में धनिया आसानी से उगा सकते हैं , इसके लिए आपको न्यूनतम 4 इंच की गहराई और चौड़ी सतह वाले गमले की आवश्यकता होती है।
  21. करी पत्ता
    इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से खाना बनाने में किया जाता है। इसमें विटामिन ए, बी, सी और बी2 शामिल हैं। करी पत्ता आयरन और कैल्शियम से भरपूर होता है। यह शरीर के पाचन में सुधार करने में मदद करता है और बालों के विकास के लिए भी उपयुक्त है।
  22. अर्क
    अर्क या अकव्वा/आंकड़ा बेहद ही उपयोगी औषधि है. आयुर्वेद में इसे जड़ी-बूटियों का पारद कहा जाता है।
    -इसकी जड़ की छाल ट्यूमर, सिस्ट, एब्सेस और सभी घावों में बेहद लाभ पहुंचाती है. इसे केवल एक चुटकी मात्रा में शहद के साथ लिया जाता है।
  23. इसके पत्तों को गरम करके एड़ी पर बांधने से एडिय़ों का दर्द ठीक हो जाता है. इसके पत्तों से निकलने वाले दूध को चुभे हुए कांटे या अन्य कोई वस्तु जैसे कांच आदि पर लगाने से वह स्वतः बाहर निकल आती है।
    -इसके फूल की पंखुडिय़ों को निकालकर बचे हुए भाग को पान में रखकर चूसने से पीलिया और अन्य यकृत रोगों में बहुत आराम मिलता है।
  24. अनार
    अनार स्वादिष्ट फल है. इसे विशेषकर खून की कमी के रोगी को खाने की सलाह दी जाती है.
    -इसके फल की छाल खूनी बवासीर या अन्य रक्त बहने वाले रोगों में लाभ पहुंचाती है.
    -इसके पत्तों के रस को हथेली और तलवों की जलन में लगाने से बहुत लाभ होता है.
    -टायफॉइड और डेंगू में उसकी पत्तियों का काढ़ा बहुत लाभदायक होता है.
  25. पुनर्नवा
    इस हर्ब का नाम ही इसका महत्व बताता है कि यह शरीर को फिर से नया कर देती है। इससे चूर्ण या काढ़ा बनाते हैं।
    -किडनी के रोगों की यह बेजोड़ दवाई है।
    -पथरी को निकालने में यह मददगार है।
    -यकृत/जिगर/लिवर के सभी रोगों में बेहद असरकारक है।
    -एनीमिया में भी यह बहुत असरकारी है।
  26. बेल
    बिल्व या बेल शिवजी का प्रिय फल है और इसे हिंदू धर्मावलंबी पूजा में प्रयोग भी करते हैं. पैगंबर मुहम्मद ने इसे जन्नत का दरख्त कहकर इसकी उपयोगिता में चार चांद लगा दिए हैं।
    -बवासीर में इसकी पत्तियों का चूर्ण अमृत है।
    -इसके पके फल का शर्बत पाचनतंत्र के लिए लाभदायक औषधि है।
    -इसके फलों का मुरब्बा पेट के लिए बहुत फायदेमंद है।
  27. धतूरा
    -धतूरा वह अमृत है जिसे हम जहर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या डर जाते हैं।
    -हिंदू धर्म के आराध्य शिवजी का यह बेहद प्रिय है।
    -इसकी पत्तियों को पानी मे उबालकर उस पानी से सिर धोने से जुएं नही पड़तीं।
    -इसी पानी से दर्द और सूजन वाली जगह पर सिकाई करने से आराम मिलता है।
    -इसके पूरे पौधे को लेकर उसे सरसों के तेल में पका लें और उस तेल से जोड़ों की मालिश करने से जोड़ों का दर्द कम होता है।
  28. चांगेरी
    यह बगीचों में या सड़क के किनारे जहां थोड़ी सी नमी होती है, वहां मिलती है। दिल के आकार की इसकी पत्तियों को आयुर्वेद में बहुत उपयोगी माना गया है।
    -इसको घी में पकाकर खाने से गुदा और गर्भाशय के बाहर आने की समस्या में लाभ मिलता है।
    -इसी घी को गुदा और योनि में लगाते हैं जिससे प्रोलैप्स की समस्या ठीक होती है।
  29. कचनार
    यह अक्सर बगीचों में लगा होता है. यह बेहद खूबसूरत पौधा बहुत काम का है। इसकी पत्तियों का आकार थायरॉइड से बहुत मिलता है इसलिए थायरॉइड की समस्या में यह बेहद उपयोगी औषधि है और थायरॉइड के लिए बनाई जाने वाली सभी दवाओं में इसे डाला जाता है। इसकी पत्ती और छाल विशेष उपयोगी होती है जिनका चूर्ण या काढ़ा प्रयोग किया जाता है. विभिन्न प्रकार के ट्यूमर्स में भी इसकी छाल और पत्तियों का चूर्ण लाभदायक है।
  30. भुई आंवला
    -इसके फल आंवले के आकार के होते हैं और यह एक छोटा पौधा होता है इसलिए इसे भुई आंवला कहा जाता है। यह बगीचों में या सड़क के किनारे नमी वाली जगह पर पाया जाता है।
    -यकृत के लिए यह अमृत है. इसके पौधे को साफ करके ऐसे ही खाया जा सकता है।
    -इसे खाने के कुछ ही देर बाद व्यक्ति को भूख लगने लगती है, इसलिए भूख न लगने की समस्या में यह बहुत लाभदायक है।
    -पेशाब के इंफेक्शन में यह बहुत लाभदायक है।
    -वायरल इन्फेक्शन में यह एक बेजोड़ दवाई है।
    -इम्युनिटी बढ़ाने में यह बेहद मददगार है।
  31. पीपल
    हमारे देशवासियों के लिए पीपल के पेड़ की खास अहमियत है। यह हिंदू धर्म में सभी वृक्षों में सर्वाेपरि है। आयुर्वेद में भी इसका बहुत महत्व है। इसके प्रमुख उपयोग हैः
    -इसके पत्तों का काढ़ा या चाय बनाकर प्रति दिन पीने से हृदय रोगों में बहुत लाभ होता है। दिल की कमजोरी दूर होती है, कैल्शियम प्लैक हटते हैं, इसलिए वॉल्व भी ठीक होते हैं. इससे शरीर की सूजन, पैरों की सूजन, वेरिकोस वैन में भी बहुत लाभ होता है।
    -इसकी छाल को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पीने से गठिया में बहुत लाभ होता है क्योंकि यह किडनी की क्रियाविधि को सुधारकर यूरिक एसिड आदि घातक तत्वों को शरीर से बाहर निकाल देता है।
  32. अडूसा
    यह भी शानदार औषधीय पौधों में से एक है।
    -इसके पत्तों का रस खांसी और दमे में बहुत असरदार है. खांसी या अस्थमा की शायद ही ऐसी कोई आयुर्वेदिक दवाई हो जिसमें इसे न डाला जाता हो।
    -इसके पत्तों का रस और चूर्ण खूनी बवासीर की बहुत असरदार दवाई है।
    -मासिक धर्म में अधिक रक्त आने पर भी यह बहुत उपयोगी साबित होती है।
    तो देर किस बात की अगर आपको भी आपके घर के आस-पास ऐसे की कुछ हर्ब्स दिखें तो इन्हें नष्ट करने की बजाय इनका सही इस्तेमाल करें।

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