जंगलों में फलों की बहार से बचेंगे वन्यजीव! हल्द्वानी में 51 फलदार पौधों और 451 आम के बीजों का अनूठा अभियान

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समाचार सच, हल्द्वानी।
पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने और वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से श्री गिरिजा देवी सनातन सेवा समिति ने बेलवसानी-फतेपुर के जंगलों में व्यापक फलदार वृक्षारोपण अभियान चलाया। करीब तीन किलोमीटर के वन क्षेत्र में 51 फलदार पौधों का रोपण किया गया, वहीं 451 अंकुरित आम के बीज भी जंगल में रोपे गए, ताकि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक फलों का सुरक्षित आश्रय बन सके।

समिति के अध्यक्ष आनंद सिंह भाकुनी के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान में संरक्षक एल.डी. पांडेय, सचिव लक्ष्मण सिंह गौनिया, जीवन सिंह पंतोला तथा प्रसिद्ध पर्यावरणविद मदन बिष्ट सहित अनेक पर्यावरण प्रेमियों और समिति के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

समिति के संरक्षक प्रो. डॉ. एस.डी. तिवारी ने कहा कि जंगलों में फलदार वृक्षों की कमी के कारण जंगली जानवर भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है। यदि जंगलों में पर्याप्त फलदार वृक्ष होंगे तो वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास में ही भोजन मिलेगा और वे शहरों की ओर आने को मजबूर नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि वन संपदा का संरक्षण और संवर्धन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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समिति के संयोजक डॉ. नवीन चन्द्र जोशी ने बताया कि जंगलों में फलदार वृक्ष लगाने का यह अभियान वर्ष 2009 से लगातार चलाया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष श्राद्ध पक्ष के दौरान पितरों की स्मृति में फलदायी पौधे रोपित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुमाऊँ क्षेत्र के कई मंदिरों और आसपास के जंगलों में भी जनसहयोग से फलदार वृक्षारोपण अभियान लगातार जारी है।

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पर्यावरणविद मदन बिष्ट ने कहा कि वर्षा ऋतु फलदार पौधों के रोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है। इस दौरान आम, पपीता, आंवला, अमरूद, जामुन, अंगूर सहित कई फलदार प्रजातियाँ आसानी से विकसित हो जाती हैं, जिससे भविष्य में वन्यजीवों को प्राकृतिक भोजन उपलब्ध हो सकेगा।

अभियान के दौरान बेलवसानी-फतेपुर क्षेत्र में 51 फलदार पौधों के साथ विभिन्न फलों के बीज भी रोपे गए। विशेष रूप से प्रो. डॉ. एस.डी. तिवारी ने 451 अंकुरित आम के बीज रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

इस अवसर पर प्रो. डॉ. एस.सी. सती, आचार्य प्रकाश चन्द्र जोशी, पं. हेम चन्द्र जोशी, उपग्राम प्रधान बब्लू जोशी, मनीष जोशी, विवेक जोशी, भावेश जोशी सहित बड़ी संख्या में समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों ने भाग लेकर वन्यजीव संरक्षण और हरित उत्तराखंड के संकल्प को मजबूत किया।

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