मुखानी फ्लाईओवर पर हाईकोर्ट की सख्ती: सरकार और डीएम से मांगा जवाब, पूछा- अतिक्रमण हटाने में अब तक क्या हुआ?

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समाचार सच, हल्द्वानी। हल्द्वानी के सबसे व्यस्त यातायात केंद्रों में शामिल मुखानी चौराहे पर प्रस्तावित फ्लाईओवर निर्माण और अतिक्रमण हटाने के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और नैनीताल के जिलाधिकारी से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब तलब करते हुए पूछा है कि चिह्नित अतिक्रमण को हटाने के लिए अब तक क्या ठोस कार्रवाई की गई है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि हल्द्वानी के कई प्रमुख चौराहों पर अतिक्रमण हटाने और सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है। सरकार ने यह भी जानकारी दी कि मुखानी चौराहे के आसपास अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के तहत 71 लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने अदालत को बताया कि वर्ष 2018 में मुखानी फ्लाईओवर निर्माण का प्रस्ताव आने के बाद प्रशासन ने लाखों रुपये खर्च कर विस्तृत सर्वे कराया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद न तो सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही परियोजना पर कोई ठोस निर्णय लिया गया। इससे शहर की एक महत्वपूर्ण यातायात योजना लंबे समय से अधर में लटकी हुई है।

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याचिका में कहा गया कि मुखानी चौराहा कालाढूंगी रोड का सबसे व्यस्त ट्रैफिक प्वाइंट है, जहां प्रतिदिन लंबा जाम लगने से स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। फ्लाईओवर बनने से न केवल जाम की समस्या में बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था भी अधिक सुगम हो सकेगी।

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गौरतलब है कि हल्द्वानी निवासी पूरन चंद्र जोशी ने वर्ष 2018 में इस मुद्दे को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में मुखानी चौराहे पर लगातार बढ़ते यातायात दबाव और फ्लाईओवर निर्माण की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया गया था।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे दो सप्ताह के भीतर अतिक्रमण हटाने की प्रगति, फ्लाईओवर परियोजना की वर्तमान स्थिति और आगे की कार्ययोजना का विस्तृत शपथपत्र अदालत में प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

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