परिवर्तिनी एकादशी 2026: 22 को होगा व्रत, 23 को पारण के साथ ऐसे खोलेंगे व्रत

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत का हिंदू धर्म में खास महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को शुभ फल मिलता है। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे शुरू होगी और 22 सितंबर की रात करीब 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। सूर्याेदय के समय एकादशी तिथि होने के कारण व्रत 22 सितंबर को रखा जाएगा। व्रत का पारण अगले दिन यानी 23 सितंबर को किया जाएगा।

23 सितंबर को इस समय करें पारण
परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण 23 सितंबर 2026, बुधवार को सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 35 मिनट तक किया जा सकता है। व्रत रखने वाले भक्त इस समय के बीच पारण कर सकते हैं। पारण के समय में शहर के अनुसार थोड़ा बदलाव हो सकता है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग में सही समय जरूर देख लें। एकादशी व्रत का पारण आमतौर पर द्वादशी तिथि में किया जाता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले पारण का समय और तिथि जरूर देखनी चाहिए।

पारण का समय निकल जाए तो क्या करें?
अगर किसी वजह से एकादशी व्रत का पारण तय समय पर नहीं हो पाता है तो बाद में विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा करके व्रत खोल सकते हैं। सबसे पहले भगवान से क्षमा मांगें और देरी के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद भगवान को तुलसी दल और भोग अर्पित करके श्रद्धा के साथ पारण करें। पारण करते समय भगवान विष्णु का ध्यान रखें और मन में अपनी गलती के लिए उनसे माफी मांगें। इस स्थिति में स्थानीय पंचांग या किसी जानकार पंडित से सलाह लेना भी उचित रहेगा, क्योंकि पारण को लेकर अलग-अलग जगहों पर धार्मिक परंपराएं हो सकती हैं।

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एकादशी व्रत का पारण कैसे करें?
पारण के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा करें। दीपक जलाएं और भगवान को फल, फूल, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें। भगवान को भोग लगाने के बाद उनसे व्रत पूरा करने की प्रार्थना करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन करके व्रत खोलें। पारण की शुरुआत पानी, फल या हल्के भोजन से कर सकते हैं। लंबे समय तक व्रत रखने के बाद एक साथ ज्यादा भोजन करने से बचें। भोजन को लेकर अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में परंपराएं हो सकती हैं।

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परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा
परिवर्तिनी एकादशी के दिन सुबह पूजा स्थल की सफाई करें। भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल, फल, चंदन और तुलसी दल चढ़ाएं। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप किया जा सकता है। शाम के समय भगवान विष्णु की आरती करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास के दौरान इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। इसी वजह से इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु से परिवार की खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

तुलसी से जुड़े उपाय
एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा है। तुलसी को भगवान विष्णु का प्रिय माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान को तुलसी अर्पित करें। तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान भी कर सकते हैं। इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन, फल या अपनी क्षमता के अनुसार दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि पूजा-पाठ और दान करने से मन को शांति मिलती है।

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