आयुर्वेद के अनुसार अगर दही का सेवन भादों में किया जाए तो झेलने पड़ सकते हैं कई नुकसान

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। गुड हेल्थ के लिए दही काफी फायदेमंद होती है। दही में गुड बैक्टीरिया मौजूद होते हैं जो हमारे पाचन के लिए काफी अच्छे होते हैं। इसके साथ ही दही में कैल्शियम होता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। लेकिन क्या आप जानते हैं दही खाना आपके लिए नुकसानदायक भी साबित होता है। जी हां, अगर इसे गलत समय और गलत तरीके से खाया जाए तो यह हमारी सेहत को काफी नुकसान भी पहुचा सकते हैं। आयुर्वेद में इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर इसे भादो में खाया जाए तो इसके नुकसान झेलने पड़ सकते है।

भाद्रपद में दही खाना होता है हानिकारक

सावन का महीना खत्म होते ही भाद्रपद यानी भादो शुरू होने वाला है। हिंदू कैलेंडर का यह छठा मास है। इस महीने में कई चीजों के खाने पीने की मनाही की जाती है। आयुर्वेद के मुताबिक, भाद्रपद माह में मनुष्य को दही और इससे बनी वस्तुओं छाछ, लस्सी आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद में माना जाता है कि यह समय वर्षाकाल का होता है और इसमें दही का सेवन करने से कफ आदि होने की संभावना अधिक होती है। आधुनिक वैज्ञानिक भी इस बात से पूरी तरह सहमत हैं। इन दिनों दही में बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ जाती है जो आंतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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ये हो सकते हैं नुकसान

  • इस मौसम में दही या इससे बनी चीजों के सेवन से गले में खराश हो सकती है और खांसी सर्दी से आप परेशान हो सकते हैं।
  • अगर आप दही का सेवन करते हैं और आपके जोड़ों में पुराना दर्द रहा है तो ये दुबारा से उभर सकते हैं।
  • बरसात में बहुत अधिक बैक्टीरिया पनपते हैं। दही में भी इस मौसम में अत्यधिक बैक्टीरिया हो जाते हैं तो हमारे गट और पाचनतंत्र को प्रभावित कर सकते हैं जिससे पाचन क्रिया की समस्या हो सकती है।
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इस मौसम में इन चीजों को खाने की दी जाती है सलाह
खाने में तिल का इस्तेमाल
भादो के महीने में लोगों को तिल खाने की सलाह दी जाती है। इसके इस्तेमाल से सेहत को कई फायदे मिलते हैं। इसलिए मिठाई से लेकर खाने की कई चीजों में आप आसानी से तिल का प्रयोग कर सकते हैं। आयुर्वेद के मुताबिक, इस महीने में तिल खाने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे बीमारियां दूर रहती हैं।

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