मुनक्का या किशमिश के फ़ायदे व नुकसान

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। मुनक्का अर्थात किशमिश को पुराने जमाने से स्वास्थ्य के लिए लाभदायक बताया गया है। किशमिश को भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में ज्यादातर उगाया जाता है। इसको हम ऐसे भी खा सकते है, या पका के भी खा सकते है, इसका इस्तेमाल खाना बनाने में भी किया जाता है। इसको प्राप्त करने के लिए अंगूर के भीतर के रस को या पानी को अलग तरह की प्रक्रिया को अपना कर निकालने के बाद सुखा दिया जाता है, और यही अंगूर सूखने के बाद किशमिश या मुनक्का में परिवर्तित हो जाता है और बाद में यही सुखा हुआ फल उर्जा का प्रमुख स्रोत है।
मुनक्का या किशमिश के प्रकार
किशमिश को परम्परागत रूप में अर्थात सुखाकर भी रख सकते है। जरुरत पड़ने पर इसे पानी में भी भिगोकर भी रख सकते है। जो सुनहरे रंग के अंगूर होते है, उनको सल्फर डाइआक्साइड के साथ मिलाकर सुखाया जाता है, इसलिए उनका रंग सुनहरा होता है। जो काले रंग के किशमिश होते है वो थोड़े तीखे और खट्टे स्वाद वाले होते है। ये और किशमिश की तुलना में थोड़े बड़े होते है। किशमिश के बहुत सारे प्रकार पश्चिमी एशिया के क्षेत्रों में बहुतायत में पाए जाते है। इन्ही किशमिशों के लिए कुछ स्थानों पर लोगों द्वारा मुनक्का शब्द का उपयोग किया जाता है। अंगूर विभिन्न तरह की प्रजातियों और रंगों में पाये जाते है इसलिए मुनक्का का भी रंग कई प्रकार का होता है। साथ ही इसका उपयोग भी इसके रंग पर निर्भर करता है। मुनक्का हरे रंग, काले, नीले, भूरे, बैगनी और पीले रंगों में भी पाया जाता है। मुनक्का में बीज भी होते हैं। जो मुनक्का बीज रहित होता है उसको अमेरिका में थोम्पसोन सीडलेस कहा जाता है, ग्रीक में करंटस और फ्लेमि अंगूर कहते है।
मुनक्का या किशमिश का इतिहास
मुनक्का शब्द की शुरुआत पुराने फ्रेंच भाषा के लोनवर्ड शब्द अर्थात ऋणी से हुई है, और प्राचीन समय में किशमिश शब्द की उपज लैटिन शब्द के रेसमस शब्द से हुई है, जिसका अर्थ अंगूर या जामुन का गुच्छा होता है। सामान्य तौर पर मुन्नका को राइसिन नाम से जाना जाता है, अंग्रेजी में इसे ड्राई फ्रूट से, हिंदी में इसे किशमिश, दाख नाम से जाना जाता है। इसका बोटैनिकल नाम ड्राई वितिस विनिफेरा है। यह एक मीठा सूखा मेवा होता है। प्राचीन काल की दीवार पर चित्रकारी इस बात को दर्शाती है कि उस समय भूमध्यसागरीय क्षत्रों में इसके पौधे को सजावट के रूप में उपयोग में लाया जाता था। इतिहासकारों का ऐसा मानना है कि फोनिसियन और अर्मेनियन ने इसकी खेती की शुरुआत की थी। फिर उन्होंने रोमन और ग्रीस के साथ किशमिश का व्यापार शुरू किया, जहाँ इसे बहुत पसंद किया गया और इसकी मांग बढ़ने से इसके कीमतों में भी इजाफा अर्थात बढ़ोतरी हुई। 18वी शताब्दी में स्पेन की रानी ने धर्म का ज्ञान देने के लिए मिशनरियों को मैक्सिकों में भेजा, वे वहाँ ज्ञान देने के साथ ही अंगूर का इस्तेमाल शाकाहारी मदिरा के रूप में करते थे। इस तरह अर्मेनियाई किशमिश की खोज के पहले संस्थापक बन गए। वर्तमान में कैलिफोर्निया में करीब करीब 185000 एकड़ में किशमिश की खेती की जाती है।
मुनक्का या किशमिश में पाए जाने वाले तत्व
100 ग्राम मुनक्का या किशमिश में मिलने वाले प्रोटीन, मिनरल्स और सारे पोषक तत्वों को हम अलग- अलग चार्ट के माध्यम से नीचे वर्णित करेंगे जो निम्नवत है-
-मुनक्का या किशमिश को खाने से बहुत फायदा मिलता है, खास करके वजन को घटाने में यह बहुत ज्यादा लाभदायक है। इसके अलावा इसके कुछ फ़ायदे इस प्रकार हैं-
-2011 में फ़ूड और पोषण डाटाबेस के शोध में बताया गया है कि मुनक्का को खाने से मोटापा के बढ़ने की सम्भावना कम हो जाती है, और साथ ही यह मोटापा कमर के पास से घटाता है। इसके सेवन से उर्जा के साथ वसा भी मिलती है, लेकिन यह वसा को शरीर में जमा नहीं होने देता। मुनक्का खून में मौजूद शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक है, इस वजह से डायबिटीज टाइप 2 होने का खतरा कम हो जाता है। वैज्ञानिकों ने भी अपने स्तर से जाँच कर इसके स्वास्थ्य में लाभकारी होने की पुष्टि कर दी है।
-मुनक्का में अन्थोक्यानिंस नामक पिगमेंट होते है, जोकि एंटी एलर्जिक, एंटी कैंसर से बचाव में सहायता करता है। यह केवल बाहरी रूप से ही नहीं बल्कि भीतरी रूप से भी सहायक होता है।
-मुनक्का में फाइबर की मात्रा भरपूर रहती है, जोकि शरीर में मौजूद वसा को जलाने में कारगर होती है। इसके साथ ही यह कब्ज से राहत दिलाकर पाचन की क्षमता में सुधार लाती है, यह शरीर में मौजूद हार्माेन लेप्टिन की मात्रा को बढ़ाने में सहायक होता है। इस तरह से इसको खाने से पेट भरा हुआ महसूस होता है, जिससे भूख कम लगती है और हम भोजन के सेवन की अधिकता से बच जाते है।
-फाईबर शरीर में मौजूद सारे विषाक्त पदार्थाे को बाहर निकालने में सहायक होता है तथा पेट में अच्छे जीवाणुओं की संख्या को बढ़ाने में, जिसको मिक्रोबिओता का नाम दिया गया है सहायता करता है। फाईबर युक्त मुनक्का को खाने से शारीरिक रूप से व्यक्ति उर्जान्वित महसूस करता है।
-मुनक्का हड्डी के विकास और पोषण के लिए भी जरुरी है। मोटापा बढ़ने के साथ ही शरीर के जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है, जिससे आस्टियोपोरोसिस नामक रोग पकड़ लेता है। मुनक्का मोटापे को कम कर इस रोग को रोकने में मदद करता है। मुनक्का में कैल्सियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जोकि हड्डियों और दांतों को मजबूत करने में सहायक है। इसके साथ ही इसमें ओलेनोलिक एसिड होता है, जो दांत की बीमारियों जैसे की मसूड़ों में जलन, सुजन, कैविटी, दांत के खराब होने इत्यादि से बचाता है। यह हड्डी को मजबूत रखने के साथ ही उसे स्वस्थ्य भी रखता है।
-मुनक्का में प्राकृतिक रूप से शर्करा और ग्लूकोज के साथ ही फ्रुक्टोस की भी मात्रा होती है, इसके साथ ही इसमें विटामिन की मात्रा भी पाई जाती है। मुनक्का के सूखे फलों में एसिड और टैनिन जैसे एंटीओक्सिडेंट भी पाए जाते है।
-मुनक्का में पोल्य्फेनोलिक फिटेननुट्रीएन्ट होते है, जिनमे एंटी ओक्सिडेंट के गुण समाहित होते है। इसके साथ ही मुनक्का में विटामिन ए, ए बीटा कैरोटिन और ए कैरोटीनएड की भरपूर मात्र होती है, जोकि हमारे आँखों के लिए बहुत ही लाभकारी है, इसको खाने से आँखों की कमजोरी जो उम्र के साथ आती है उसे कम किया जा सकता है। साथ ही ये मोतियाबिंद जैसी आँखों में होने वाली बीमारी से सुरक्षा प्रदान करता है।
-मुनक्का के सेवन से हमे कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से भी बचने की सम्भावना बढ़ जाती है। मुनक्का में बड़े स्तर पर कैटैंस पाया जाता है जो खून में पोल्य्फेनोलिक एंटी ओक्सिडेंट के स्तर में वृद्धि करता है, और यह कैंसर जैसी बीमारी की गति को धीमा करने की क्षमता रखते है।
-मुनक्का में आयरन की मात्रा होने से यह शरीर में खून की कमी होने से रोकता है। इसमें विटामिन बी कोम्प्लेक्स होता है, जोकि खून के नवनीकरण में सहायक है, साथ ही कॉपर की भरपुर मात्र होने से यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायक होता है।
-मुनक्का में मौजूद फेनोलिक फ्य्तोनुट्रीएंट्स अपने जीवाणु को नष्ट करने वाले गुणों के लिए जाने जाते है, और इस तरह बुखार होने पर मुनक्का का सेवन अगर किया जाये तो यह बुखार के वायरल और बैक्ट्रिया से लड़ कर हमे बुखार से निजात दिलाने में भी सहायक होगा।
-मुनक्का में बैक्ट्रिया की वृद्धि को रोकने की शक्ति होती है, जिस वजह से इसको खाने से दातों की समस्या से निजात पाया जा सकता है। इसमें मौजूद बोरान मुंह में उत्त्पन हो रहे रोगणुओं को कम कर दांतों को मजबूत और स्वास्थ्य बनाता है।
मुनक्का या किशमिश का प्रभाव
-मुनक्का पूरी तरह से एक स्वास्थ्य वर्द्धक फल है इसका कोई भी कुछ भी गलत प्रभाव शरीर पर नहीं पड़ता है, लेकिन कोई भी चीज की खाने की मात्रा हमेशा सीमित होनी चाहिए इसका भी ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए चुकि यह मीठा होता है. इसलिए जो भी व्यक्ति शुगर की बीमारी से पीड़ित है उनको इसके सेवन से पहले डॉ. से परामर्श ले लेनी चाहिए।
मुनक्का के बीज के लाभ
-मुन्नका के साथ ही इसका बीज भी बहुत कारगर होता है। मुन्नका के बीज दिल को स्वास्थ्य रखने के साथ ही त्वचा, दाँत, मुंह की बदबू, सूजन, हड्डी में ताकत, मधुमेह इत्यादि के लिए अच्छे होते है। बीज के लाभ को देखते हुए इसकी खेती भी बहुतायत में होती है। बीज के सेवन से प्रोस्तेड, फेफड़ों में कैंसर, एंटी एलर्जी इत्यादी को रोका जा सकता है, क्योकि बीज में ओपीसी की मात्रा होती है अर्थात ओलिगोमेरिक प्रोंथोच्यानिदीन कॉम्प्लेक्स ये एक तरह का एंटी ओक्सिडेंट योगिक है जो शरीर को लाभ पहुचाता है।
मुनक्का या किशमिश के त्वचा के लिए लाभ
-हर कोई अपनी त्वचा को हमेशा सुंदर और चमकते हुए देखने की चाहत रखता है तो इसके लिए आप रोज अगर मुनक्का का सेवन करते है खास करके काले मुनक्का के सेवन से चेहरा हमेशा जवां और कांतिमय बना रहेगा।
-मुन्नका के सेवन से शरीर में मौजूद अपशिष्ट पदार्थ बाहर आ जाते है जिस वजह से रक्त का शुद्धिकरण हो जाता है जिसका परिणाम यह होता है कि हमारे चेहरे पे कील, मुहासें और रूखापन नहीं आता जिस वजह से चेहरा दाग रहित दिखता है
-इसमें एंटी ओक्सिडेंट की मात्रा होने से यह डीएनए के विघटन को रोकता है, जिस वजह से प्रतिरक्षा प्रणाली तेज हो जाती है। इसके साथ ही यह चेहरे पर हमेशा उम्र के साथ होने वाली लकीरों के प्रभाव को कम कर देता है। इसके साथ ही इसमें फाइटोकेमिकल्स भी है जोकि हमारी त्वचा को सूर्य की तेज किरणों से सुरक्षित रखने के साथ ही प्रदुषण से होने वाले नुकसान से भी बचाते है।
मुनक्का या किशमिश के बालों के लिए लाभ
-बालों के लिए मुनक्का या किशमिश बहुत ही लाभदायक है खास कर अगर काले मुनक्का का इस्तेमाल हम करते है तो यह बोलों के लिए रामबाण सिद्ध हो सकता है। किशमिश भले ही देखने में छोटे होते है लेकिन इसमें आयरन की मात्र भरपूर होती है जिस वजह से हमारा संचार तत्व कारगर रूप से कार्य करता है।
-आयरन हमारे शरीर के लिए एक बहुत ही महतवपूर्ण पोषक तत्व है। यह हमारे शरीर के साथ साथ पुरे सिर में रक्त परिसंचरण को बनाये रखता है, जिस वजह से बाल झड़ते नहीं है और बालों के रोम झिद्र साफ भी रहते है जिससे बाल की लम्बे होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
-मुनक्का में लोह तत्व और विटामिन सी होता है, जोकि तेजी के साथ खनिज तत्वों का अवशोषण कर लेते है और बालों को उचित पोषण प्रदान करते है। इस वजह से ये हमारे बालो को असमय सफेद होने से बचाता है
मुनक्का या किशमिश का जूस या पत्ते का फायदा
मुन्नका का जूस या पेस्ट तरह तरह के सॉस, पास्ता और बारबेक्यू इत्यादि में इस्तेमाल होता है, मुनक्का का जूस या रस एक त्वरित पुनरोधक है इसके सेवन से एनीमिया की समस्या से मुक्ति मिलती है इससे अस्थमा में भी राहत मिलती है।
मुनक्का या किशमिश को कैसे खाये
मुन्नका ऐसा फल है जिसको बहुत दिनों तक रखा जा सकता है. यह बाजार में किसी भी किराने की दुकान या सुपर मार्केट में आसानी से मिल जाता है। इसको सूखे रूप में, दूध या पानी में भिगो कर, साथ ही जो भोज्य पदार्थ घर पर बनाये जाते है जैसे की खीर, पुलाव इत्यादी उसमे भी इसका इस्तेमाल किया जाता है क्योकि यह अपने मीठे गुण की वजह से खाने के स्वाद में भी बढ़ोतरी कर देता है।
मुनक्का या किशमिश का घरेलू उपाय
मुन्नका को घरेलू उपाय के तौर पर भी उपयोग में लाया जा सकता है जो कि निम्नलिखित है –
यह आयुर्वेद की दवा के तर्ज पर भी कार्य करता है जैसे की आमतौर पर कुछ बच्चे थोड़े बड़े होने के बाद भी बिस्तर को गीला कर देते है। अगर इस तरह की समस्या बच्चे में है तो दो मुन्नका लेकर उसके बीज को निकाल कर उसमे एक या दो काली मिर्च के बीज डाल कर रात में सोने से पहले बच्चे को इसका सेवन कराये, ऐसा करने से बच्चे की बिस्तर को गीला करने की समस्या धीरे धीरे कम हो जाएगी।
-यदि कोइ व्यक्ति सुखी खांसी से पीड़ित है तो उसे घरेलू उपाय के रूप में मुनक्का, पिपली, काली मिर्च और खजूर सभी सामग्रियों को अच्छे से पीस कर फिर सेवन करना चाहिए। अगर इसको हर रोज पीड़ित व्यक्ति को 3 से 4 बार इसका सेवन कराया जाये तो उस व्यक्ति को सुखी खांसी में राहत मिलेगी, साथ ही धीरे धीरे यह बीमारी पूरी तरह से ठीक भी हो सकती है।
-मुनक्का के इस्तेमाल से पुराने बुखार से भी राहत पाई जा सकती है इसके लिए मुनक्का, शहद, पिपली, खजूर और घी सभी को एक साथ पीस कर इसको हर रोज 5 ग्राम तक की मात्रा में सेवन करने से बुखार में लाभ मिलता है।
-मुनक्का कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है। इसके लिए यह उपाय करना होगा कि 10 से 12 मुनक्काा को दूध में डाल कर खूब गर्म कर ले, और रात में सोने से पहले इसे पी ले तो यह पुराने से भी पुराने कब्ज को खत्म कर देगा और कब्ज से होने वाली बीमारी बवासीर से भी राहत दिलाने में मदद करेगा। इसके अलावा इसे घी में भून कर और साथ ही एक चुटकी नमक के साथ खाये तो भी यह कब्ज से राहत देगा।
-अगर किसी को गैस या एसिडिटी की समस्या है तो उसे रात में 10 ग्राम भिगोये हुए मुनक्का और 5 ग्राम सौंफ को एक ग्लास पानी में भीगा कर सुबह छान कर देने से एसिडिटी में राहत मिलेगी। इसका सेवन सुबह खाली पेट किया जाना चाहिए।
-अगर किसी को सीने की तकलीफ या उल्टी की समस्या हो तो उसे 10 ग्राम धान के बीज और 10 ग्राम मुन्नका को दो घंटे तक पानी में फुला कर फिर उसको मसल करके छान ले और इस पेस्ट को 6 ग्राम तक की मात्रा में पीड़ित व्यक्ति को खाने के लिए बार बार दे, इससे उस व्यक्ति को राहत मिलेगी।
-मुनक्का जमे हुए कफ को बाहर निकलने साथ ही नकसीर जैसी बीमारी में भी राहत देता है। इसके लिए मुनक्का या अंगूर के रस को भी अगर नाक में तीन चार बूंद की मात्रा में डाल दिया जाये तो नाक से खून निकलना बंद हो जाता है और पीड़ित को राहत महसूस होती है। मुनक्का एक बहुत ही प्रभावशाली फल है।
-मुनक्का में वजन के अनुसार 72: शुगर होता है इसके साथ ही इसमें ज्यादातर मात्रा में फ्रुक्टोज और ग्लोकोज भी होता है। मुनक्का में खुबानी जैसे पोषक तत्व पाए जाते है। इसमें एंटी ओक्सिडेंट की मात्रा भरपूर रहती है। चुकि ताजे अंगूरों की अपेक्षा मुनक्का में विटामिन सी की मात्रा कम होती है इसमें कोलेस्ट्रोल की मात्रा नहीं के बराबर होती है।
-अमेरिकन कालेज ऑफ कार्डियोलॉजी के 61 वें वार्षिक वैज्ञानिक सत्र 2012 में प्रस्तुत आंकड़े बताते है कि जिन व्यक्तियों को हाई ब्लड प्रेशर की बिमारी है अगर वो हर रोज 3 बार मुन्नका का सेवन करे तो उनके ब्लड प्रेशर में कमी आएगी। ये दुसरे स्नैक्स की तुलना में ज्यादा फायदे कारक है।

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