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मौसम के बदलाव के साथ होती है एलर्जी, आयुर्वेद में जानें इसका निदान

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। बदलाव प्रकृति का नियम है मगर प्रकृति में होने वाला हर बदलाव किसी न किसी पर प्रतिकूल असर डालता है। जैसे मौसम के बदलने के साथ ही बहुत से लोगों में कई समस्याएं देखने को मिलती है। इन समस्याओं में प्रमुख है, एलर्जी और एलर्जी से होने वाले विकार। एलर्जी के कारण कुछ लोगों को थोड़े समय के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो, कुछ लोगों पर इसका असर जीवन भर रहता है। मौसम के बदलने से होने वाली एजर्ली सबसे ज्यादा नाक, गला, आंख और त्वचा को प्रभावित करती है। आयुर्वेद और हमारे घर की रसोई में ऐसे बहुत से नुस्खे मौजूद हैं जिसका सेवन करने से इसमें लाभ होता है।

जब भी मौसम बदलता है तो नाक का बहना, खांसी, छाती के जमने की समस्या आम होती है। इसका समय पर सही इलाज जरूरी है। एलर्जी के कारण बारबार होने वाली समस्या का उपचार ना किया जाए तो इसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। ये आगे चलकर साइनस और अस्थमा का रूप ले सकते हैं।

एलर्जी क्या है

एलर्जी हमारे शरीर के प्रतिरोधक तंत्र की एक संवेदनशील प्रतिक्रिया है। जब हमारा शरीर कुछ, तत्वों और रसायनों के सम्पर्क में आता है तो उन रसायनों और तत्वों के प्रति हमारा प्रतिरोधक तंत्र बहुत तेजी से प्रतिक्रिया करता है और उसे शरीर पर अनावश्यक हमला समझकर उसे जल्द से जल्द दुरुस्त करना चाहता है। ये हमें कई रूपों में दिखाई देता है जैसे त्वचा पर लाल चकत्ते का होना, नाक का बहना, छींक आना, बदन दर्द और उल्टी व दस्त आदि।

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एलर्जी के कारण
एलर्जी के कई कारण है जैसे मौसम के बदलने से, धूलकणों, परागकणों, जानवरों के रेशों, पेड़-पौधों और तेज गंध वाली चीजों, यहां तक की कुछ दवाओं से भी एलर्जी होती है। एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों को एलर्जेन कहते हैं।

एलर्जी की पहचान
इसके पहचान के कई तरीके मौजूद हैं। जैसे एलर्जी स्किन टेस्टिंग, सेरम स्पैस्फिक आईजीई एंटी बॉडी टेस्टिंग। इन टेस्ट के माध्यम से एलर्जी की पहचान कर सकते हैं और बचाव के कारगर उपाय किए जा सकते हैं।

मौसमी एलर्जी सबसे ज्यादा कम उम्र के बच्चों और वृद्धों को प्रभावित करती है, मगर ये किसी भी उम्र के व्यक्तियों को हो सकती है। लगभग 15-20 प्रतिशत व्यक्तियों को किसी न किसी तरह की एलर्जी होती है। इसलिए इसके कारणों से बचने की जरूरत है।

ऐसे करे एलर्जी से बचाव
-अपने आप को प्रदूषण व धूल से बचाएं और आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखें
-बड़ी घास और परागण वाले फूलों से दूर रहें
-नाक बंद होने पर भाप लें
-फर वाले पशुओं से दूर रहें
-शरीर की प्रकृति के अनुसार खाद्य पदार्थों का सेवन करें
-ठंडी चीजों से परहेज करें
-कपालभाति करें नाक आदि की एलर्जी में बहुत लाभ होगा। इसका दो महीनों तक अभ्यास करना चाहिए।

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घरेलू नुस्खे और आयुर्वेदिक उपचार भी है कारगर

  • अदरक, लौंग, दालचीनी का काढ़ा बनाकर दिन में दो बार पीने से फायदा होता है। तुलसी, लौंग, कालीमिर्च और अदरक को मिलाकर बनाई गई चाय से भी राहत मिलती है।
  • एलर्जी के कारण अगर गले में खरास हो रही है तो गुनगुने नमक पानी से गरारा करने पर आराम मिलता है
  • च्यवनप्राश, आंवला आदि का सेवन कर प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। इससे आयरन, कैल्शियम और विटामिन की कमी भी पूरी होती है।
  • वात एवं कफ को संतुलित करने के लिए 20 मिलीग्राम त्रिकटु चुर्ण (सोंठ, पिप्पली, काली मिर्च), 10 मिलीग्राम लौंग, कपूर एवं सूखा धनिया और 250 मिलीग्राम तुलसी के पत्ते को पीसकर मिश्रण बना ले और थोड़ा-थोड़ा शहद के साथ सेवन करने से लाभ होता है। इसे वैद्य या चिकित्सक की सलाह पर लें।
  • अडोसा, छोटी कटेरी, बनफासा, सौंठ, पुष्करमूल, पिप्पली छोटी, कालीमिर्च, लौंग, दालचीनी अजवायन, सौंफ, जयफल, अर्जुन छाल, अतीस, पियाबासा, मुलेठी, गिलोय और तुलसी बीज का संतुलित मिश्रण भी फायदेमंद है। मगर इसे चिकित्सक की सलाह पर लें।

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