थायराइड होने से पहले और बाद में, शरीर में होता क्या है?

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। थायराइड क्या है। थायरायड हार्माेन कैसे काम करते हैं? थायराइड हार्माेन के कम और ज्यादा होने से क्या होता है। थायराइड गले में पाई जाने वाली एक तरह की ग्रंथि है। ये ग्रंथि तितली के आकार के होती है। और गले के सामने वाले हिस्से, स्वरयंत्र के नीचे की ओर पायी जाती है। जो मेटाबॉलिज्म नियंत्रित करती है। इस बीमारी से ग्रस्त लोगों में यह ग्रंथि सामान्य तरीके से काम नहीं करती। इसमें थायराइड हार्माेन बनना कम या ज्यादा हो जाता है।
थायराइड ग्रंथि में छोटी-छोटी थैली जैसे टुकड़े होते हैं। जिनमें गाढ़ा द्रव होता है। इस द्रव में थायराइड के हार्माेन पाए जाते हैं। इन हार्माेन में आयोडीन की मात्रा अधिक होती है। थायराइड ग्रंथि एंडोक्राइन प्रणाली का हिस्सा है। जो कई अंगों और ऊतकों से मिलकर बनी है। ये ऊतक हार्माेन यानी रासायनिक पदार्थों को पैदा करते हैं, जमा करते हैं और खून में भेजते हैं।
थायराइड हार्माेन कैसे काम करते हैं?
थायराइड हार्माेन पेट में पाचक रस के बनने की गति को बढ़ाते हैं। थायराइड हार्माेन, ऊतकों के बढ़ने में मदद करते हैं। शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए ऊर्जा पैदा करते हैं। वे खून से खराब कोलेस्ट्राल की अधिक मात्रा को निकालने में लीवर की मदद करते हैं। खराब कोलेस्ट्राल पित्त से मिलकर मल-मूत्र के रूप में बाहर निकलता है।
थायराइड हार्माेन के कम और ज्यादा होने से क्या होता है।
-थायरॉइड हार्माेन की कमी से शरीर में खराब कोलेस्टराल बढ़ता है। जिससे अच्छा कोलेस्टराल घटता है।
-थायराइड हार्माेन अधिक होने से दस्त और कम होने से कब्ज़ हो सकता है। क्योंकि ये हार्माेन मेटाबोलिज़म को नियंत्रण में रखता है।
थायराइड होने पर शरीर में क्या लक्षण दिखते हैं?
-दिनभर थकान होती है।
-रातभर नींद लेने के बाद भी सुबह थका हुआ महसूस करते हैं।
-डिप्रेशन भी हार्मोंस के कम स्तर का संकेत हो सकता है। क्योंकि थायराइड हार्मोंस मस्तिष्क के सेरोटोनिन तत्व से जुड़ा होता है। सेरोटोनिन एक बायोकेमिकल है, जो अच्छा महसूस कराता है।
-बहुत अधिक चिंतित रहना।
-अधिक भूख लगती है, लेकिन वजन बढ़ने की बजाय कम होता है।
-थायराइड हार्मोंस के कम होने पर सेक्स में दिलचस्पी कम होने लगती है। लेकिन इसका सीधा संबंध थायराइड से न होकर थकान और ऊर्जा की कमी से होता है।
-कब्ज़ की शिकायत.
-महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता.
-थायराइड की कमी से पीरियड्स के बीच का अंतर बढ़ता है।
-थायराइड की अधिकता से पीरियड्स जल्दी-जल्दी होते हैं।
-हाथ-पैरों में दर्द और सुन्न रहना।
-हाई ब्लडप्रेशर की परेशानी।
-बहुत ठंड या गर्मी लगना।
-थायराइड में सूजन की वजह से आवाज़ में बदलाव आता है।
-सिर, आईब्रो व अन्य हिस्सों के बालों में कमी होना।
-थायराइड की कमी से बैड कोलेस्ट्राल बढ़ने से दिल की परेशानी भी होती है।
किन वजहों से होता है थायराइड
-आयोडीन शरीर के लिए बहुत जरूरी है. शरीर में 80 प्रतिशत आयोडीन, थायरॉइड में पाया जाता है. खाने में आयोडीन की कमी होने से थायराइड ग्रंथि सूज जाती है जिसे घेंघा (गायटर) कहते हैं।
-आयोडीन सभी के लिए बेहद जरूरी है। चाहे वो बड़ा हो या बच्चा। जानें, छोटे बच्चों में क्या करता है आयोडीन।
-छोटे बच्चों में आयोडीन की कमी से हार्माेन का निर्माण धीमा पड़ जाता है। इससे उनके शारीरिक, मानसिक और जननांगों का ठीक से विकास नहीं हो पाता। इस बीमारी को क्रीटीनिज़्म कहते हैं।
-दवाइयों के साइड इफेक्ट से भी थायराइड हो जाता ह।
-सोया प्रोटीन, कैप्सूल, और पाउडर के रूप में सोया उत्पादों को जरूरत से ज्यादा लेने से भी थायराइड हो जाता ह।।
-त्वचा की समस्या से छुटकारा पाने के लिए रेडिएशन थेरेपी भी इसके होने की वजहों में से एक है। रेडिएशन थेरेपी की वजह से टॉन्सिल्स या फिर थाइमस ग्रंथि में परेशानी हो सकती है, जिस वजह से थायराइड हो सकता है।
-मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में हार्माेनल परिवर्तन से भी थायराइड होता है।
-तनाव का असर दिमाग के साथ-साथ थायराइड ग्रंथि पर भी पड़ता है, जिस वजह से हार्माेन स्राव बढ़ने से थायराइड होता है
-यह बीमारी जेनेटिक भी है, यानी माता-पिता को थायराइड हो तो बच्चो को होने की संभावना भी रहती है।
थायरॉइड दो तरह का होता है.

  1. हाइपर थायराइड- वजन कम होता है।
  2. हाइपो थायराइड- वजन बढ़ता है।
    हाइपर थायराइड- इसमें थायराइड ग्रंथि में अधिक मात्रा में थायराइड हार्माेन बनता है। जिस वजह से शरीर, उर्जा का इस्तेमाल ज्घ्यादा करता है। हाइपर थायराइड वाले पेशेंट का वज़न घटता है।
    हाइपर थायराइड के लक्षण
    -कमजोरी महसूस होना।
    -बाल बहुत अधिक झड़ना।
    -त्वचा से सम्बंधित रोग होना।
    -अचानक से शरीर का कांपना।
    -दिल की धडकन तेज होना।
    -वजन तेजी से कम होना।
    -पसीना ज्यादा या बिलकुल भी न आना।
    -पीरियड्स कम आना।
    -नींद न आना।
    हाइपर थायराइड मरीज क्या खाएं?
    -ब्रोकली खाएं. इसमें गाइट्रोजेन्स और आइसोथायोसाइनेट्स तत्व होते हैं, जो थायराइड के निर्माण पर अंकुश लगाते हैं.
    -सोया प्रोडक्ट्स लें। ये प्रोटीन से भरपूर होते हैं। प्रोटीन थायराइड हार्मोंस को दूसरे बॉडी टिश्यूज़ में ट्रांसपोर्ट कर देते है।
    -नट्स, अंडे और फलियों को भी डायट में शामिल कर सकते हैं।
    -ओमेगा 3 फैटी एसिड्स लें. इससे हार्मोंस में संतुलन रहेगा। इसके लिए फ्लैक्स सीड्स, अखरोट और मछली ले सकते हैं।
    -बेरीज़ लें. ये थायराइड ग्लांड्स को हेल्दी रखती हैं। बेरीज में ब्लू बेरीज़, स्ट्राबेरीज, ब्लैक बेरीज और चेरी भी शामिल है। आंवला ले। ये थायराइड को कंट्रोल करता है।
    हाइपो थायराइड- हाइपो थायराइड पेशेंट की थायराइड ग्रंथि में हार्मोंस की मात्रा तेजी से कम होती है। इस दौरान मरीज की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। वजन तेजी से बढ़ता है।
    हाइपो थायराइड के लक्षण-
    -वजन तेजी से बढ़ना।
    -हर वक्त डिप्रेशन में रहना।
    चिड़चिड़ापन और ज्यादा गुस्सा आना।
    -कब्ज और एसिडिटी की शिकायत।
    -शरीर और चेहरे का फूलना।
    -त्वचा में रुखापन।
    -अनियमित पीरियड्स होना।
    -बिना कुछ काम किए थकान लगना महसूस होना।
    हाइपो थायराइड मरीज क्या खाएं?
    हाइपो थायराइ मरीज में कैल्शियम और विटामिन-इ की कमी हो जाती है। जिससे थकान रहती है। इसके लिए वे अदरक खाने में ज़रूर शामिल करें।
    -साबुत अनाज, जैसे-ज्वार, बाजरा लें। साबुत अनाज में फाइबर, प्रोटीन और विटामिन्स भरपूर मात्रा में होता है.
    -फल, सब्ज़ियां लें. इनमें एंटीआक्सीडेंट होते हैं. जो थायरॉइड को बढ़ने नहीं देता.
    -अदरक में कैल्शियम और विटामिन-इ कॉम्प्लेक्स होता है.
    -इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बायोटिन थायराइड ग्रंथि को ठीक से काम करने में मददगार है.
    -इसमें मैग्नशियम, जिंक, आयरन और पोटेशियम होता है, जो थायराइड ग्रंथि में हार्मोंस की मात्रा को कम होने से रोकता हैं
    थायराइड का इलाज
    थायराइड ठीक से काम कर रहा है या नहीं, ये पता लगाने के लिए खून में और थायराइड हार्माेन की जांच की जाती हैै। थायराइड को एक्युप्रेशर के जरिए भी ठीक किया जा सकता है। एक्युप्रेशर में पैराथायराइड और थायराइड के जो बिंदू होते हैं वे पैरों और हाथों के अंगूठे के नीचे और थोड़े उठे हुए भाग में मौजूद रहते हैं। इन बिंदुओं को बांई से दांई ओर प्रेशर देना यानी दबाना चाहिए।
    हाइपो थायराइड का पता टी3, टी4 और टीएसएच हार्माेन की जांच से चलता है। ऐसे मरीज कुछ दिनों तक दवा लेने के बाद पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। कई बार लंबे वक्त तक भी दवा लेनी पड़ती है और जीवनभर भी।
    थायराइड दूर करने में योग भी है मददगार
    थायराइड में जितना आराम दवा से मिलता है, उतना ही आराम प्राणायम से भी होता है। इसलिए कोशिश करें कि रोज आधे घंटे योग करें। इसके लिए कुछ योगासन बताए गए हैं। जिसमें धनुरासन, मत्घ्स्घ्यासन और हलासन और प्राणायाम शामिल हैं।
    मत्स्यासन और हलासन- मत्स्यासन में पीठ के बल सीधा जमीन पर लेट जाएं और अपने पैरों को आपस में जोड़ लें। अब दोनों हाथों को गर्दन की पास रखें और हथेलियों का सहारा लेते हुए गर्दन को उठाने का प्रयास करें। अब दोनों हाथों को जांघ पर रखें। वापस आते समय दोनों हथेलियों के सहारे गर्दन को दोबारा उसी स्थिति में वापस ले आएं। हलासन में पीठ के बल लेट कर अपने पैरों को मिला लें. अब धीरे-धीरे दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठाएं और पैरों को 30, 60 और 90 डिग्री के कोण पर लाकर रोकें। अब दोनों हाथों पर जोर देकर पैरों को सिर की ओर थोड़ा सा झुकाएं। जब पैर जमीन को स्पर्श करने लगे, तो दोनों हथेलियों को क्रास करके बांधे और सिर पर रखें।
    धनुरासन- सबसे पहले मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं, श्वास को छोड़ते हुए दोनों घुटनों को एक साथ मोड़ें, एड़ियों को पीठ की ओर बढ़ाएं और अपनी बांहों को पीछे की ओर ताने फिर बाएं हाथ से बाएं टखने को एवं दायें हाथ से दायें टखने को पकड़ लें। अब श्वास भरकर उसे रोके रखें, अब सांसों को पूरी तरह निकाल दें और जमीन से घुटनों को उठाते हुए दोनों पैर ऊपर की ओर खींचें और उसी समय जमीन पर से सीने को उठाएं। बांह और हाथ झुके हुए धनुष के समान शरीर को तानने में प्रत्यंचा के समान कार्य करते है।
    अब अपने सिर को ऊपर की ओर उठाएं और पीछे की ओर ले जाएं। अब घुटनों और टखनों को सटा लें। इस दौरान श्वास की गति तेज होगी, लेकिन इसकी चिंता न करते हुए 15 सेकंड से 1 मिनट तक रुकें और आगे- पीछे, दाएं -बाएं शरीर को हिला डुला सकते हैं. अब श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे टखनों को भी छोड़ दें और दोनों पैरों को सीधी कर लें।
    यह ध्यान रहे कि पहले घुटनों को जमीन पर रखें फिर तुड्डी को जमीन स्पर्श कराएं और इसके बाद पैरों को छोड़ते हुए उन्हें जमीन तक धीरे धीरे आने दें. अपने कपोल को जमीन पर रखकर विश्राम करें। यह अभ्यास 5 सेकेंड से शुरु करें और प्रतिदिन समय को तब तक बढ़ाते रहें जब तक बिना किसी दबाव के 15 से 30 सेकेंड तक न हो जाये।
    प्राणायाम- सबसे पहले आराम की मुद्रा में जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। फिर हथेलियों को पेट पर हल्के से रखें। दोनों हाथों की मध्यमा अंगुली नाभि पर एक दूसरे को स्पर्श करता रहे. फिर धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए पेट को भी ढीला छोड़ दें। अब श्वास खींचते हुए पेट को फुलाइए.इस क्रिया को 5 मिनट तक बार-बार दोहराएं। क्रिया करते वक्त श्वास को पहले छाती में, फिर पसलियों में और फिर पेट में महसूस करना चाहिए। इस प्राणायाम क्रिया को बहुत ही आराम से करें। इस प्राणायाम को करते समय पेट की गति अर्थात संकुचन, छाती और मांसपेशियों पर ध्यान रखना चाहिए। जब आप श्वास लेते हैं तो आपके दोनों कंघे ऊपर आते हैं और श्वास छोड़ते हुए नीचे की ओर जाते हैं तो कंधों में भी श्वसन की लय को महसूस करें।
    डायग्नोस्टिक चेन एसआरएल ने जून 2017 में एक रिपोर्ट में कहा था कि 32 फीसदी भारतीय थायराइड की वजह से होने वाली बीमारियों के शिकार हैं।
    थायराइड मरीज ऐसा रखें डेली रूटीन –
  3. सुबह जल्दी उठें और सुबह की दवा खाने के दस मिनट बाद 2 गिलास गुनगुना पानी पिएं।
  4. थायराइड के रोगी को अपनी दिनचर्या में योग या किसी भी प्रकार के व्यायाम को जरूर शामिल करना चाहिए। आप सुबह-सुबह दौड़ लगाने से लेकर योग करने और जिम जाने तक कोई भी व्यायाम कर सकते हैं।
  5. दवा खाने के बाद एक घंटे तक चाय-काफी, नाश्ता कुछ भी नहीं खाएं।
  6. सुबह नाश्ते के साथ लौकी का जूस पिएं। या फिर घर में ही थोड़े से गेहूं उगाएं। रोज सुबह उठकर गेहूं के ज्वारों का जूस भी लाभदायक रहता है। इसके अलावा बाज़ार से अच्छे किस्म का एलोवेरा जूस लाकर पी सकते हैं, जिसमें फाइबर ज्यादा हो।
  7. अखरोट और बादाम में सेलेनियम नाम का एक तत्घ्व मिलता है, जो थायराइड के इलाज में फायदेमंद है। अखरोट और बादाम खाने से थायराइड के कारण गले में होने वाली सूजन कम हो जाती है। यह हाइपोथाइराइड में ज्यादा फायदेमंद होता है। इसलिए रात में अखरोट और बादाम को भिगो लें और सुबह नाश्ते में खूब चबा-चबाकर इसे खाएं।
  8. रोज दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर गर्म करें। इससे थायराइड को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। अगर दूध में हल्दी मिलाकर पीना पसंद नहीं है तो आप हल्दी को भूनकर, पानी में गर्म करके या किसी और तरीके से उसका सेवन कर सकते हैं।
  9. भोजन समय पर करें। बिलकुल भूखे न रहें थायराइड के रोगी को यह सलाह दी जाती है कि वह समय पर भोजन कर ले। भूखे पेट रहने पर थायराइड ग्रंथि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  10. थायराइड हार्माेन को नियंत्रित करने में काली मिर्च मददगार है।
  11. अपने भोजन में वसा और कार्बाेहाइड्रेट की मात्रा बिलकुल कम कर दें और विटामिन ए की मात्रा बढ़ा दें। खाने-पीने में हरी सब्जियां और मिनरल्स वाली चीज़ें ज्यादा लें। गाजर, अंडे और पीले रंग की सब्जियां खाएं, जिनमें विटामिन ए ज्यादा होता है।
  12. प्रोबायोटिक पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करें। दही और सेब का सिरका जैसी चीज़ें खाएं, जो शरीर में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में करते हैं।
  13. अपने शरीर में आयोडीन का लेवल चेक करते रहें क्योंकि मेटाबालिज्म के सही तरीके से काम करने के लिए आयोडीन बहुत जरूरी होता है। शरीर में आयोडीन की कमी न होने दें। समय-समय पर डाक्टर से भी चेकअप करवाएं।

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