समाचार सच, अल्मोड़ा/देहरादून डेस्क। रिपोर्ट- अजय सिंह चौहान
पहाड़ी इलाकों में सफर आज भी घुमावदार सड़कों, लंबी दूरी और कई जगहों पर लगने वाले समय के कारण चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में अगर सड़क के बजाय हवा के रास्ते छोटी दूरी तय करने का विकल्प तैयार हो जाए तो परिवहन की तस्वीर बदल सकती है। इसी सोच को तकनीकी प्रयोग का रूप देने का दावा उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी युवा नवाचारक रवि टम्टा ने किया है।
रवि टम्टा के मुताबिक उन्होंने एक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप तैयार किया है, जिसका अल्मोड़ा में परीक्षण किया गया। उनके अनुसार परीक्षण के दौरान वाहन ने उड़ान भरी और उन्होंने इसे अपने लंबे समय से चले आ रहे तकनीकी प्रयोगों की एक बड़ी उपलब्धि माना है।
सड़क का 40 मिनट का सफर, हवा से 12 मिनट में?
रवि के मुताबिक परीक्षण के दौरान उन्होंने अपने घर तक पहुंचने के लिए फ्लाइंग व्हीकल में मैप के जरिए दूरी देखी। उनका दावा है कि जिस दूरी को सड़क मार्ग से तय करने में करीब 40 मिनट लगते हैं, वही दूरी हवाई मार्ग से लगभग 12 मिनट में पूरी हो सकती है।
उनका कहना है कि यह अनुभव उनके लिए केवल एक परीक्षण नहीं था, बल्कि कई वर्षों से देखे जा रहे उस सपने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था, जिसमें पहाड़ी क्षेत्रों समेत छोटी दूरी के आवागमन के लिए वैकल्पिक हवाई परिवहन विकसित करने की कल्पना की गई है।
‘कार नहीं, भविष्य के परिवहन का प्रयोग’
रवि टम्टा इस प्रोटोटाइप को महज एक मशीन के तौर पर नहीं देखते। उनका कहना है कि व्यक्तिगत हवाई परिवहन की संभावना पर वह लंबे समय से काम कर रहे हैं और अलग-अलग तकनीकी प्रयोगों के बाद इस प्रोटोटाइप तक पहुंचे हैं।
उन्होंने इसे भारत में व्यक्तिगत हवाई परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग बताते हुए दावा किया है कि उनका उद्देश्य भविष्य में ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिससे लोग जरूरत के अनुसार सड़क के साथ-साथ हवाई मार्ग का भी इस्तेमाल कर सकें।
हालांकि अभी यह तकनीक शुरुआती चरण में है। इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध कराने से पहले सुरक्षा, तकनीकी क्षमता, उड़ान नियंत्रण और नियामकीय मानकों से जुड़े कई परीक्षणों से गुजरना होगा।
आम लोगों के हाथ में कब आएगा Flying Vehicle?
रवि के प्रयोग ने भले ही लोगों का ध्यान खींचा हो, लेकिन प्रोटोटाइप से व्यावसायिक वाहन तक पहुंचने की राह आसान नहीं होगी। सार्वजनिक उपयोग के लिए ऐसे वाहन को संबंधित तकनीकी परीक्षणों और आवश्यक सरकारी एवं नियामकीय मंजूरियों से गुजरना होगा।
इसलिए फिलहाल इसे प्रोटोटाइप स्तर का तकनीकी नवाचार माना जा रहा है। भविष्य में यह प्रयोग किस स्तर तक पहुंचता है, यह आगे होने वाले परीक्षणों, सुरक्षा मानकों और अनुमतियों पर निर्भर करेगा।
मोबाइल चार्ज करने वाली स्टिक से लेकर उड़ने वाली मशीन तक
रवि टम्टा इससे पहले भी अपने तकनीकी प्रयोगों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनके द्वारा तैयार की गई एक विशेष स्टिक में मोबाइल चार्ज करने और टॉर्च जैसी सुविधाएं होने का दावा किया गया है। इसके अलावा वह पहले भी बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग तकनीक, मोबाइल चार्ज करने वाले जूते और हेलीकॉप्टर के शुरुआती मॉडल जैसे कई प्रयोग कर चुके हैं।
रवि के मुताबिक, वह अपने नए फ्लाइंग व्हीकल के निर्माण की पूरी कहानी और इसकी तकनीक से जुड़ी जानकारी जल्द साझा करेंगे। फिलहाल वह प्रोटोटाइप की परीक्षण उड़ान को अपने लंबे तकनीकी सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।

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