भाजपा के फैसले से सभी को चौंकाया, एक बार फिर से सांसद को सौंपी कमान

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चर्चा में रहे नामों को दरकिनार कर सत्ता मे तीरथ सिंह रावत

समाचार सच, देहरादून। भाजपा ने एक बार फिर अपने फैसले से सबको चौंकाया है। उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री को लेकर जितने नाम चर्चा में थे सबको दरकिनार कर पौड़ी-गढ़वाल सीट से भाजपा सांसद तीरथ सिंह रावत को सूबे का नया मुखिया चुना गया है। अखिल भारतीय विद्वयार्थी परिषद के साथ जुड़कर छात्र राजनीति से राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले तीरथ सिंह रावत वहीं 1992 में छात्रसंघ का चुनाव लड़ा और अध्घ्यक्ष चुने गए। राम जन्मभूमि आंदोलने में दो माह तक जेल रहे तो राज्य आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उत्तराखंड का गठन होने पर 2000 में राज्य की अंतरिम सरकार में तीरथ सूबे के पहले शिक्षा मंत्री बने।
2019 लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की पौड़ी गढ़वाल सीट से सांसद पहुंचने वाले तीरथ सिंह रावत ने एक और कीर्तीमान अपने नाम कर लिया है। बीते आम चुनाव में तीरथ ने अपने विपक्ष में खड़े कांग्रेस के प्रत्याशी मनीष खंडूरी को पराजित किया था। तीरथ सिंह रावत शुरुआती दौर से भारतीय भारतीय जनता पार्टी जुड़े रहे हैं। वह फरवरी 2013 से दिसंबर 2015 तक उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और चौबट्टाखाल से भूतपूर्व विधायक (2012-2017) रहे। जिसके बाद वह भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रहे। उनका जन्म सीरों, पट्टी असवालस्यूं पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड में हुआ था। वर्ष 2000 में नवगठित उत्तराखण्ड के प्रथम शिक्षा मंत्री चुने गए थे।
2007 में भारतीय जनता पार्टी उत्तराखण्ड के प्रदेश महामंत्री चुने जाने के बाद प्रदेश चुनाव अधिकारी और प्रदेश सदस्यता प्रमुख रहे। तीरथ सिंह रावत ने अपनी राजनीति की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से की। वह रामजन्म भूमि आन्दोलन में दो महीने जेल में रहे। इसके अलावा उत्तराखण्ड आन्दोलन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। इस दौरान वह कई रैलियों में शामिल रहे एवं राज्य आन्दोलनकारी के रूप में चिन्हित किए गए। उन्होंने मुज्जफरनगर (रामपुर तिराहे) से गढ़वाल तक शहीद यात्रा का उन्होंने नेतृत्घ्व भी किया था।
पौड़ी जिले के कल्जीखाल ब्लाक के सीरों गांव के मूल निवासी तीरथ रावत का राजनीतिक सफर संघर्षपूर्ण रहा है। स्व. कलम सिंह रावत के सबसे छोटे बेटे तीरथ ने गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर श्रीनगर से छात्र राजनीति शुरू की। वर्ष 1992 में वह सबसे पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से गढ़वाल विवि बिड़ला परिसर श्रीनगर के छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव लड़े और जीते। वे अभाविप के प्रदेश संगठन मंत्री, भाजयुमो में प्रदेश उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रहे। 1997 में वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य के सदस्य निर्वाचित हुए। पृथक राज्य उत्तराखंड का गठन होने पर 2000 में राज्य की अंतरिम सरकार में तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड के पहले शिक्षा मंत्री बने। 2007 में भाजपा प्रदेश महामंत्री, प्रदेश सदस्यता प्रमुख, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के अध्यक्ष चुने गए।
2012 में विधानसभा चौबट्टाखाल से विधायक चुने जाने के बाद वर्ष 2013 में उन्हें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। वर्ष 2017 में सिटिंग विधायक होते हुए टिकट कटने के बाद पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी सौंपी। वर्तमान में तीरथ हिमाचल प्रदेश के प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। रामजन्मभूमि आंदोलन में दो माह तक जेल में रहे तीरथ ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। नवनिर्वाचित गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत ने प्रदेश अध्यक्ष, प्रभारी और प्रत्याशी के रुप में शत-प्रतिशत परिणाम दिए। तीरथ को 2013 में भाजपा के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटें भाजपा की झोली में गईं। लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी ने तीरथ को गढ़वाल सीट से प्रत्याशी बनाए जाने के साथ ही हिमाचल प्रदेश के प्रभारी का दायित्व भी सौंपा। उन्होंने अपनी जीत के साथ हिमाचल प्रदेश की चारों सीटें जिताकर पार्टी में खुद के कद को और मजबूत किया।

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