समाचार सच, हल्द्वानी।
महात्मा गांधी की जयंती पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में गांधी के विचारों, भारतीय जीवन-मूल्यों और समकालीन समाज में उनकी प्रासंगिकता पर गहन मंथन हुआ। विश्वविद्यालय के जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में ‘गांधी और भारतीयता’ विषय पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में वक्ताओं ने गांधी के राजनीतिक चिंतन से लेकर सत्य-अहिंसा, पर्यावरण संरक्षण और उत्तराखंड से उनके गहरे जुड़ाव तक विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहानी ने की। मुख्य अतिथि पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, मुख्य वक्ता प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी, विशिष्ट वक्ता प्रो. प्रभाकर बडोनी रहे। कार्यक्रम की संयोजक प्रो. रेनू प्रकाश और सह-संयोजक डॉ. शशांक शुक्ल रहे।
उत्तराखंड से गांधी का था खास रिश्ता
कार्यक्रम में प्रो. प्रभाकर बडोनी ने महात्मा गांधी के उत्तराखंड से संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने गांधी की उत्तराखंड यात्राओं और यहां के विभिन्न स्थानों से उनके जुड़ाव की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि गांधी जी ने उत्तराखंड की छह यात्राएं की थीं। वर्ष 1915 में हरिद्वार कुंभ से शुरू हुए उनके उत्तराखंड प्रवास के दौरान ताकुला, भवाली, अल्मोड़ा, रानीखेत, ताड़ीखेत, बागेश्वर, कौसानी और मसूरी समेत कई स्थान उनके संपर्क में आए। उन्होंने गांधी के हिमालय और उत्तराखंड को लेकर विचारों पर भी चर्चा की।
इस दौरान प्रो. बडोनी द्वारा तैयार डॉक्यूमेंट्री ‘उत्तराखंड में गांधी पर्यटन पथ’ का प्रदर्शन किया गया, जिसने गांधी और उत्तराखंड के ऐतिहासिक संबंधों को सामने रखा।
गांधी के राजनीतिक चिंतन और भारतीयता पर चर्चा
मुख्य वक्ता प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी ने गांधी के राजनीतिक चिंतन और उनकी भारतीयता की अवधारणा पर बात रखी। उन्होंने गांधी के विचारों की अलग-अलग समय में हुई व्याख्याओं, उनके राजनीतिक दृष्टिकोण और स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक सामाजिक आधार देने में उनकी भूमिका पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि गांधी ने भारतीय जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ से जोड़ा। विभिन्न धर्मों और आस्थाओं को आंदोलन की व्यापक धारा से जोड़ने तथा सामाजिक जीवन में नैतिक मूल्यों को स्थापित करने पर भी उन्होंने जोर दिया।
सत्य-अहिंसा से पर्यावरण संरक्षण तक जुड़ा गांधी का संदेश
मुख्य अतिथि पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जोड़ते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मनुष्य प्रकृति के व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है, इसलिए वन्यजीवों और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता भी अहिंसा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने गांधी के नमक आंदोलन और दांडी मार्च का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड के स्वतंत्रता सेनानी खड़क बहादुर के योगदान को भी याद किया। साथ ही वैश्विक तापमान वृद्धि और इसके उत्तराखंड के पर्यावरण एवं वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर जागरूकता की आवश्यकता बताई।
‘गांधी के आदर्शों को व्यवहार में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि’
कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहानी ने गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दोनों महापुरुषों ने कठिन परिस्थितियों को राष्ट्र निर्माण के अवसरों में बदलने का काम किया।
उन्होंने गांधी के विचारों की वैश्विक स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय परिवार से उनके साथ ही शास्त्री जी के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों के आदर्शों को व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम की शुरुआत पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। संगीत विभाग के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ और ‘रघुपति राघव राजाराम’ की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इसके बाद विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और शिक्षार्थियों ने श्रमदान में भी भाग लिया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में शिक्षार्थी मौजूद रहे।

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