सशक्त मन से सशक्त परिवार और स्वस्थ समाज का निर्माण, UOU में राष्ट्रीय समाज कार्य सप्ताह पर ऑनलाइन सेमिनार

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समाचार सच, हल्द्वानी।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग की ओर से 7वें राष्ट्रीय समाज कार्य सप्ताह के अवसर पर ‘सशक्त मन, सशक्त परिवार’ थीम पर ऑनलाइन सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों, अंतरपीढ़ीगत जुड़ाव और बदलते सामाजिक परिवेश में परिवार की भूमिका पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमती कुशा सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की। समाज कार्य विभाग की समन्वयक डॉ. नीरजा सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी के मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया।

परिवार से शुरू होती है मानसिक स्वास्थ्य की मजबूती
भारत में व्यावसायिक समाज कार्यकर्ताओं के राष्ट्रीय संघ (एनएपीएसडब्ल्यूआई) के प्रो. अनूप कुमार भारतीय ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की शुरुआत परिवार से ही होती है। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में परिवार की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने कहा कि समाज वर्तमान में संक्रमणकाल से गुजर रहा है और ऐसे समय में यह समझना जरूरी है कि कठिन होती जीवन परिस्थितियों को किस तरह अधिक मानवीय, संतुलित और बेहतर बनाया जा सकता है।

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संवाद, विश्वास और सहयोग से मजबूत होगा परिवार
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रो. प्रतिभा जे. मिश्रा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं। उनका परिचय समाज कार्य विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पूजा हेड़िया ने कराया।

प्रो. मिश्रा ने कहा कि परिवार में संवाद, विश्वास और सहयोग का माहौल विकसित होने से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं को शुरुआती स्तर पर समझने और सुलझाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने 3C—जुड़ाव, संवाद और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ सकारात्मक जीवनशैली पर जोर दिया।

उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए सकारात्मक लोगों के साथ जुड़ाव, संतुलित भोजन, आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय उपचार के प्रति सजगता, मानसिक स्थिति की नियमित निगरानी तथा योग, ध्यान और रुचि आधारित गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी।

बुजुर्गों की देखभाल दोतरफा संबंध
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. तूलिका भट्टाचार्य ने अंतरपीढ़ीगत संबंधों और बुजुर्गों की देखभाल पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य दूर रहकर भी भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से जुड़े रह सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की देखभाल केवल युवाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि बुजुर्ग भी युवा पीढ़ी और परिवार को विभिन्न स्तरों पर सहयोग और मार्गदर्शन देते हैं। अंतरपीढ़ीगत संबंध मूल रूप से पारस्परिक होते हैं।

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डॉ. भट्टाचार्य ने डिमेंशिया से प्रभावित लोगों के संदर्भ में अंतरपीढ़ीगत जुड़ाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से जुड़ाव केवल बातचीत या पुरानी स्मृतियों को साझा करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सम्मान, धैर्य, भावनात्मक उपस्थिति और साझा गतिविधियों के माध्यम से निरंतर जुड़ाव बनाए रखना जरूरी है।

103 से अधिक शिक्षार्थियों ने किया प्रतिभाग
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने समाज कार्य विभाग की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज का निर्माण व्यक्ति और परिवार से ही शुरू होता है।
ऑनलाइन सेमिनार में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से 103 से अधिक समाज कार्य के शिक्षार्थियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के अंत में यह संदेश सामने आया कि सशक्त मन केवल व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि सशक्त परिवार की आधारशिला है। सशक्त परिवार ही संवेदनशील, स्वस्थ और मजबूत समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज विज्ञान विद्याशाखा की निदेशक प्रो. रेणु प्रकाश, डॉ. शुभंकर शुक्ल, डॉ. आरुषि हिंवाली शुक्ल समेत अन्य शिक्षकों का योगदान रहा। प्रो. रेणु प्रकाश ने समाज कार्य विभाग की समन्वयक डॉ. नीरजा सिंह और समस्त आयोजक शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं।

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