श्रीसंवत २०८२ श्रीशाके १९४७ श्री सूर्य दक्षिणायन शरद ऋतु कन्यार्क ४ गते आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि शनिवार सूर्योदय ६/३ बजे सूर्यास्त ६/६ बजे राहु काल ९ बजे से १०/३० बजे तक अभिजीत मुहूर्त दिन में ११/५५ बजे से १२/४३…


श्रीसंवत २०८२ श्रीशाके १९४७ श्री सूर्य दक्षिणायन शरद ऋतु कन्यार्क ४ गते आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि शनिवार सूर्योदय ६/३ बजे सूर्यास्त ६/६ बजे राहु काल ९ बजे से १०/३० बजे तक अभिजीत मुहूर्त दिन में ११/५५ बजे से १२/४३…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। क्या सूर्य ग्रहण के दौरान श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं? हां, बिल्कुल। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण और सर्वपितृ अमावस्या का एक साथ होना श्राद्ध कर्म के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। इस…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष को पितृपक्ष कहा जाता है। पितृपक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलते हैं। इस समय पितृ पक्ष चल रहा है।…

आज़ दिनांक १९ सितम्बर २०२५ शुक्रवार का पंचांग श्रीसंवत २०८२ श्रीशाके १९४७ श्री सूर्य दक्षिणायन शरद ऋतु कन्यार्क ३ गते आश्विन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि शुक्रवार सूर्योदय ६/२ बजे सूर्यास्त ६/८ बजे राहु काल १०/३० बजे से १२ बजे तक…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। नवरात्रि में अखंड ज्योति (अखंड दीपक) जलाना हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। यह मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने, नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और घर में सुख, शांति और समृद्धि…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पितृ पक्ष में त्रयोदशी तिथि का महत्व श्राद्ध पक्ष में त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व होता है। यह तिथि उन लोगों के श्राद्ध के लिए होती है जिनकी मृत्यु किसी दुर्घटना, अकाल मृत्यु, आत्महत्या या किसी…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। 21 सितंबर को पितृ पक्ष की अंतिम तिथि है, इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या (आश्विन अमावस्या) कहते हैं। भारतीय समय अनुसार 21 सितंबर की रात सूर्य ग्रहण भी होगा, लेकिन ये ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। आज़ दिनांक १८ सितम्बर २०२५ बृहस्पतिवार का पंचांग श्रीसंवत २०८२ श्रीशाके १९४७ श्री सूर्य दक्षिणायन शरद ऋतु कन्यार्क २ गते आश्विन कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि बृहस्पतिवार सूर्याेदय ६/१ बजे सूर्यास्त ६/९ बजे राहु काल १/३० बजे…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पितृ पक्ष की द्वादशी तिथि में उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनका निधन द्वादशी तिथि में हुआ हो। शास्त्रों के अनुसार, जो लोग मृत्यु से पूर्व सन्यास ग्रहण कर लेते हैं, उनके श्राद्ध के…