हास्य-व्यंग्य : नारद जी की कुम्भ – यात्रा

पिछले दिनों नारद जी कुम्भ यात्रा पर निकल पड़े ।पर जगह जगह थे जाम सो रास्ते में रह गए खड़े ।।अचानक सामने देखा हमको तो मुस्काये ।बोले बेटा यमदूत तू ही हमें हरिद्वार पँहुचाये ।।मैंने फ़ौरन उनको साथ ले पकड़ी…

अरमान बिटिया के…

काश मैं बिटिया के अरमानों को पूरा कर पाता,पापा ये होता, वो होता, ऐसा होता, वैसा होता।बिटिया के ख्वाहिशों को पंख लगा पाता,काश मैं बिटिया के अरमानों को पूरा कर पाता।झूठी आशा देकर मैं थकता जा रहा हूं।बिटिया से नजर…

चेली…

चेली।एक दिन उड़ जायेगी,मेरे घरौंदे सेअपना घरौंदा बनाने।उसकी यादों को,मैं सहेजना चाहता हूं।चेली।एक दिन ओझल हो जायेगी,मेरेे घर से।मैं उसकी बचपन की किलकारियों को,सहेजना चाहता हूं।चेली।एक दिन रूखसत हेा जायेगी,मेरी दहलीज से।मैं उसका सामीप्य चाहता हूं।चेली।धीरज भट्टहल्द्वानी

कविता : बड़ी हो चली हैं बेटियां

बड़ी हो रही हैं बेटियां, लगने लगा है मुझे अब डर,अनहोनी की आशंका से घबराहट व होती है फिक्र।जब तक नहीं पहुंचती हैं घर बेटियां, देखा रहता हूं डगर,अखबारों की सुर्खियों को देखकर मचलने लगता है जिगर।जब तक नहीं सुन…

‘कलयुगी’ ने किया स्वरचित कविता का पाठ

समाचार सच, हल्द्वानी। 15 अगस्त के शुभअवसर पर कवि भूपाल सिंह बिष्ट ‘कलयुगी’ ने स्वरचित कविता का पाठ किया। जिसमें उन्होंने भारत के स्वतन्त्रता दिवस को अपनी कविता के माध्यम से बखूबी पेश किया है।सैकड़ों सालों की गुलामी के बाद…

आहा रे ज़माना….

नहीं रहे लोक संगीत के पुरोधा हीरा सिंह राणा समाचार सच, देहरादून। कुमाऊंनी लोकगीतों को नई दिशा व ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले और गढ़वाली- कुमाऊंनी,- जौनसारी भाषा अकादमी दिल्ली के पहले उपाध्यक्ष लोकगायक हीरा सिंह राणा का देर रात विनोद नगर…

‘‘पर्वत सपूत सुमित्रानन्दन तुमको शत बार नमन’’

उत्तर दिशि कुर्मांचल के धवल हिम पर्वत चरणबसा ग्राम शैलानी नाम कौसानी बुरांश बाँज के काननमई उन्नीस सौ ईस्वी में फूटी यहाँ एक उजली किरनजिसकी आमा से आलोकित हुआ हिन्दी साहित्य नवसर्जनपिता गंगादत्त के घर जन्मे उनके चौथे पुत्र रतनमाँ…

‘यौं पहाड़ स्वर्ग समान छन ‘

( छंद – हरिगीतिका )लिपि थैंसिया आँङण मेंजी बिसावा भरी नौं धान छन।बिसाई गागरि खुटकौंण में देइ ऐंपण के बाँन छन ।।दन्यारी मुणी घोलों बटी प्वाथ और घिनीड़ चुचान छन।।बाड़ में बोई लाइ मूँ थणी मुणि में पिरुवा का टाँन…

कोराना आया है

जनमानस के जीवन पर एक खतरा मंडराया हैकहते हैं दूर चीन से कोरोना आया है। है सुना की पैथोजन है संकट में अब जन जन है जीवन से खेल रहा है सांसों मे फैल रहा है पश्चिमी संस्कृति को जिसने…