हास्य-व्यंग्य : नारद जी की कुम्भ – यात्रा

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-हरीश शर्मा ‘यमदूत’,
हास्य-व्यंग्य कवि, (मुम्बई)

पिछले दिनों नारद जी कुम्भ यात्रा पर निकल पड़े ।
पर जगह जगह थे जाम सो रास्ते में रह गए खड़े ।।
अचानक सामने देखा हमको तो मुस्काये ।
बोले बेटा यमदूत तू ही हमें हरिद्वार पँहुचाये ।।
मैंने फ़ौरन उनको साथ ले पकड़ी लोकल ट्रेन।
जिसकी प्रत्येक आधे मील पर खिंच रही थी चैन ।।
नारद जी बोले यह क्या खेल है ?
मैं बोला भारतीय रेल है ।।
दरअसल राष्ट्र का प्रत्येक नागरिक
इसे अपनी ही सम्पत्ति समझता है ।
इसलिए वहीं रोकता जहाँ
उसके गाँव का रास्ता है ।।
टीटी ने जब टिकट हेतु फ़रमाया ।
तो नारद जी ने उसे अपना
ऑलवर्ड फ्री पास दिखाया ।।
टीटी बोला यह पास तो अवैध है ।
क्योंकि इसे जारी करने बाला
राम तो अयोध्या मन्दिर में कैद है ।।
फलतः छोड़ दी ट्रेन और चलने लगे पैदल ।
तभी मिल गए दरोगा जी जब शाम रही थी ढल ।।
बोले तुम कौन हो और कँहा रहते हो ?
क्या कहा स्वर्ग , यानी कश्मीर में रहते हो ।।
और चन्द रोज पूर्व तू दिल्ली में आया है।
अच्छा तो तूने ही लोगों को भड़काया है।।
पदयात्रा में भी पड़ता देख व्यवधान ।
मुनिवर ने मंगा लिया पुष्पक विमान ।।
फिर हम लोग उसमें बैठ कर जाने लगे ।
पुलिस बाले पीछे पीछे दौड़ लगाने लगे ।।
वेचारे रायफलों को लोड करते चार बार ।
तब मुश्किल से होता एक मरियल सा प्रहार ।।
नारद बोले भारतीय पुलिस पे अब भी यही साज है ।
मैं बोला आतंकियों की कामयाबी का यही तो राज है ।।
नारद जी के सिर पे लगा एरियल
अचानक हवा में लहराया ।
और ब्रम्हलोक से सन्देश आया ।।
मुनिवर सब काम छोड़ आप पहले महाराष्ट्र जाएँ ।
सुशान्त की हत्या हुई या आत्महत्या पता लगाएँ ।।
सुन जोखि़म भरा पैग़ाम । हम रह गए दिल को थाम ।।
एकाएक हमें पालघर के सन्त याद आने लगे।
और डर के मारे हम जोर जोर से कंपकंपाने लगे ।।
तभी पत्नी गरजी उठते क्यों नही
इतनी देर से उठा रहे हैं ।
अभी तो केवल खैंची रजाई
अब बाल्टी भर के ला रहे हैं।।

-हरीश शर्मा ‘यमदूत’,
हास्य-व्यंग्य कवि, (मुम्बई)


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