दिवाली में पटाखों के धुएं से आंखों को नुकसान अपनाएं ये घरेलू उपाय

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। दिवाली के दिन यानी कल खूब पटाखे जलाए गए। पटाखों के धुएं और पॉल्यूशन से आंखों में जलन और खुजली हो रही है, तो कुछ घरेलू उपायों को आजमा कर राहत पा सकते हैं। आंखों की जलन कम करने के लिए कानपुर मेडिकल कॉलेज की आई स्पेशलिस्ट डॉ. शालनी मोहन से जानकारी लेते हैं।

डॉ. शालनी के अनुसार, कुछ घरेलू उपाय अपनाकर पटाखों की वजह से आंखों में होने वाली जलन को दूर किया जा सकता है। यहां पर हम कुछ ऐसे ही आसान घरेलू नुस्खे बता रहे हैं, जो आंखों की जलन दूर कर ठंडक पहुंचाते हैं।

खीरा- खीरा आंखों को रिलैक्स करने में मददगार है। पटाखों के धुएं की वजह से आंखों में जलन या खुजली महसूस हो रही है, तो खीरे का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए खीरे के स्लाइस को कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें। इन खीरे के स्लाइस को आंखों पर रखें और 15-20 मिनट बाद हटा दें। इससे आंखों की सूजन कम होगी और जलन से भी राहत मिलेगी। खीरा डार्क सर्कल्स को रिमूव करने में मदद करता है।

ठंडा दूध- पटाखों के धुएं की वजह से आंखों में जलन या खुजली हो रही है, तो ठंडा दूध असरदार है। दूध में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो आंखों की जलन को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा ठंडा दूध आंखों को ठंडक प्रदान कर सकता है। इसके लिए आप 3-4 चम्मच दूध में रूई डुबोएं और इसे आंखों पर रखें। इससे आंखों को ठंडक मिलेगी और जलन में भी आराम मिलेगा। अगर पटाखों के धुएं से आंखों में एलर्जी हो जाती है, तो भी ठंडा दूध लाभकारी है।

गुलाब जल- गुलाब जल पटाखों की धुंए से आंखों में होने वाली जलन से राहत देता है। गुलाब जल में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो आंखों की जलन, खुजली और सूजन को कम कर सकते हैं। इसके लिए एक कप पानी में 2-3 चम्मच गुलाब जल डाल दें। अब रूई को इस पानी में डुबोएं। फिर रूई को आंखों पर लगाएं और थपथपाएं। इससे आपको को रिलैक्स महसूस होगा। आंखों की जलन भी शांत होगी। आप चाहें तो पानी और गुलाब जल के मिश्रण से आंखों को धो भी सकते हैं।

आलू- आलू भी आंखों में होने वाली जलन को कम करने में असरदार है। आलू में एस्ट्रिजेंट गुण पाए जाते हैं। ये गुण आंखों की खुजली, जलन और सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके लिए आलू को छील कर 6-8 स्लाइस काट लें। इन स्लाइस को आधे घंटे के लिए फ्रिज में रख दें। अब स्लाइस को आंखों पर रखें और लेट जाएं। ठंडे आलू न सिर्फ आंखों को रिलैक्स करेंगे, बल्कि इससे आंखों की जलन और सूजन भी कम होगी। साथ ही डार्क सर्कल्स और मुंहासों से भी आराम मिलेगा।

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पटाखे जलाने से अस्थमा के मरीजों को परेशानी
दिवाली खुशियों को त्घ्यौहार है, लोग पटाखे और दिए जलाकर त्यौहार मनाते हैं। लेकिन ज्यादा पटाखे जलाने से अस्थमा और सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों को परेशानी भी होती है। वहीं आम लोग भी पटाखों के ज्यादा इस्तेमाल से बीमार पड़ सकते हैं। अस्थमा रोगियों की मदद के लिए एयर क्वॉलिटी को बरकरार रखें और पटाखों को कम इस्तेमाल करना चाहिए।

  • पटाखों में पाए जाने वाले केमिकल इम्यूनिटी के साथ मिक्स होकर फेफड़ों की समस्या पैदा कर सकते हैं
  • पटाखों में पाए जाने वाले केमिकल इम्यूनिटी के साथ मिक्स होकर फेफड़ों की समस्या पैदा कर सकते हैं

पटाखों के कारण होती हैं कई बीमारियां
दिवाली पर पटाखों का धुआं बढ़ने से सांस लेने में परेशानी होती है, खांसी आ सकती है, अस्थमा रोगियों को अटैक आ सकता है इसलिए खास ख्याल रखने की जरूरत है। इससे चेस्ट पेन भी हो सकता है। पटाखों में पीएम 2.5, पीएम 10, सल्फर डाइऑक्साइड, कॉर्बन मोनोऑक्साइड पाया जाता है। जब ये केमिकल इम्यूनिटी के साथ मिक्स हो जाते हैं तब फेफड़ों में समस्या हो सकती है। ये समस्या छोटे समय या लंबे अंतराल के लिए भी हो सकती है। पटाखों के धुएं का बुरा असर बच्चे, बूढ़े, कॉर्डविस्कुलर डिसीज से गुजर रहे लोग या फेफड़े के मरीजों को हो सकती है।

अस्थमा रोगी नेबुलाइजर की मदद लें
दिवाली के समय अस्थमा रोगियों को अपनी दवा और जरूरी सामान का किट बनाकर रखना चाहिए। इस समय धुएं के कारण सांस की समस्याएं बढ़ जाती हैं। घर में कोई अस्घ्थमा का मरीज है तो उसके लिए नेबुलाइजर तैयार रखें। ब्रोनकाइटिस, अस्थमा, क्रॉनिक हार्ट डिसीज के मरीज हैं तो नेबुलाइजर जरूर होना चाहघ्एि।

मास्क लगाने के फायदे
पटाखों में एल्यूमनियम, बैरियम, कॉपर, स्ट्रोनटियम, लेड आदि हानिकारक तत्व गनपाउडर के साथ मिलिए जाते हैं, इन्हें जलाने पर तेज धुआं निकलता है जिससे फेफड़ों में दूषित हवा भर जाती है। इस समस्या से बचने के लिए मास्क लगाकर ही दिवाली मनानी चाहिए। मास्क लगाने से आप अपनी और दूसरों की सेफ्टी भी सुनिश्चित कर सकते हैं, क्योंकि अभी कोविड का खतरा पूरी तरह से टला नहीं है। मास्क लगाने के फायदे हमें कोविड के बाद बेहतर तरीके से पता चले। फेफड़ों को हेल्दी रखने के लिए और कोविड व सांस से जुड़ी बीमारियों से बचने के लिए दिवाली पर मास्क जरूर लगाएं।

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घर के अंदर दीये-कैंडल न जलाएं
घर में कोई अस्घ्थमा रोगी है या सांस से जुड़ी समस्या के शघ्किार हैं तो घर के अंदर दीये और कैंडल जलाने से बचें। ऐसे में एलईडी लाइट का इस्घ्तेमाल करना चाहिए। कोशिश करें की दिवाली पर ज्यादा से ज्यादा समय घर के अंदर रहकर बिताएं। बाहर पटाखे जलाए जा रहे हैं तो खघ्ड़िकी और दरवाजे बंद ही रखें, जिससे पॉल्यूटेंट्स घर के अंदर न आ जाएं। इसके अलावा दघ्विाली पर हेल्दी और हाईजीनिक खाना खाएं और एक्सरसाइज करना बंद न करें।

एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल
घर में एयर प्यूरिफायर लगाना भी फायदेमंद है। एयर प्यूरिफायर के फायदों की बात करें तो इसके इस्तेमाल से एलर्जी वाले तत्घ्व, पॉल्यूटेंट्स घर के बाहर नघ्किल जाते हैं, क्योंिक प्यूरिफायर हवा को फिल्टर करता है। सर्दी-जुकाम, बुखार, सांस लेने में तकलीफ हो तो ये इंफेक्केशन के लक्षण हो सकते हैं, इन्घ्हें नजरअंदाज न करें और इलाज करवाएं। घर की हवा को शुद्ध करने के लिए स्पाइडर प्लांट्स, एलोवेरा, मनी प्लांट आदि लगा सकते हैं, ये एंटी-पॉल्यूशन पौधे हैं।

एंटी-ऑक्घ्सीडेंट्स की मात्रा बढ़ाएं
डाइट में एंटी-ऑक्घ्सीडेंट्स की मात्रा बढ़ाएं ताकि फेफड़े मजबूत रहें। विटामिन सी फूड्स जैसे टमाटर, आंवला, नींबू का सेवन कर सकते हैं। विटामिन ई, विटामिन डी, ओमेगा 3 में भी पॉल्यूटेंट्स के असर को कम करने की क्षमता होती है। एंटी-ऑक्सीडेंट्स का सेवन करने से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है। अगर आपके घर में कोई बच्चा है जिसे अस्थमा है तो उसका खास ख्याल रखें और बच्चे को बाहर भेजने से बचें, ऐसे बच्चों को पटाखों का धुआं जल्दी नुकसान करता है इसलिए दिवाली पर अस्थमा पीड़ित बच्चों को पटाखों के शोर से दूर रखें।

बॉडी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाएं
रोजाना गुड़ के सेवन से बॉडी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। इससे फेफड़े हेल्दी रहेंगे और सांस से जुड़ी शिकायतें नहीं होंगी। वैसे तो गुड़ के कई फायदे हैं, पर फेफड़ों को हेल्दी रखने की बात करें तो गुड़ में आयरन की अच्छी मात्रा होती है, आयरन का सेवन करने से ब्लड में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है और हीमोग्लोबिन बढ़ने से ऑक्सीजन की मात्रा शरीर में बढ़ती है। दिवाली की मिठाइयों में चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करें तो फेफड़े भी स्वस्थ रहेंगे और सेहत भी नहीं बिगड़ेगी।

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