भूलकर भी न करें ये शुभ कार्य, रक्षाबंधन के अगले दिन ही लग जाएगा पंचक

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत शुभ मुहूर्त के अनुसार ही की जाती है। लेकिन हर महीने में पांच दिन ऐसे होते हैं, जब शुभ कार्य करना मना होता है। ज्योतिष के अनुसार पंचक तब होता है जब चंद्रमा कुम्भ और मीन राशि में होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किए गए कार्य का प्रभाव व्यक्ति पर पांच गुना अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में किसी भी तरह की अशुभ चीजों से बचने के लिए शुभ कार्य न करने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं अगस्त में पंचक कितने दिन का होता है। और इस दौरान कौन से पांच काम वर्जित हैं?

रक्षाबंधन के अगले दिन से लग रहा है पंचक
11 अगस्त गुरुवार को रक्षा बंधन के बाद अगले दिन 12 अगस्त से पंचक हो रहा है। पंचक शुक्रवार, 12 अगस्त को दोपहर 02.49 बजे से शुरू होकर 16 अगस्त मंगलवार रात को 09.07 बजे तक चलेगा।

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पंचक का प्रकार
पंचक के प्रकार ज्योतिष में भी बताए गए हैं। कहा जाता है कि रविवार के दिन पंचक पड़ जाए तो इसे रोग पंचक कहते हैं। वहीं, सोमवार के दिन पड़ने वाले पंचक को राज पंचक, मंगलवार के पंचक को अग्नि पंचक, शुक्रवार के पंचक को चोर पंचक के नाम से जाना जाता है। वहीं, शनिवार के दिन पड़ने वाले पंचक को मृत्यु पंचक के नाम से जाना जाता है।

कैसे लगता है पंचक
ज्योतिष के अनुसार जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण और शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तरभाद्रपद और रेवती नक्षत्र के चार चरणों में चलता है; तो उस समय को पंचक काल कहा जाता है। यानी चंद्रमा की कुम्भ और मीन राशि में गोचर पंचक को जन्म देता है।

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काम करना न भूलें
ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि पंचक काल में पांच प्रकार के कार्य बिल्कुल भी नहीं करने चाहिए। इसके साथ ही पंचक में घर में लकड़ी लाना, लकड़ी का सामान घर लाना, खाट बुनना, घर की छत बनाना, दक्षिण दिशा में यात्रा करना और घर में लाख बनवाना सख्त मना है।

पंचक में मृत्यु पर किया जाता है यह काम
हिंदू धर्म में मान्यता है कि पंचक के दिनों में यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो अंतिम संस्कार के समय उसका विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दोष को दूर करने के लिए शांति की जाती है। इसके साथ ही शव के साथ पांच आटे के पुतले बनाकर धरती पर रखे जाते हैं। और अंतिम संस्कार विधि-विधान से किया जाता है। मान्यता है कि इस उपाय को करने से पंचक दोष दूर हो जाता है।

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