
समाचार सच, हल्द्वानी डेस्क। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा एम.बी. इंटर कॉलेज ग्राउंड, कैनाल रोड, हल्द्वानी में 29 जनवरी से 4 फरवरी तक आयोजित सात दिवसीय भगवान शिव कथा के दूसरे दिन दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी के शिष्य डॉ. सर्वेश्वर जी ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव के नीलकण्ठ स्वरूप का आध्यात्मिक महत्व समझाया।
उन्होंने समुद्र मंथन प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि हलाहल विष का पान कर भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा की। इसी कारण वे नीलकण्ठ कहलाए। यह स्वरूप हमें त्याग, सहनशीलता और परोपकार का संदेश देता है। स्वामी जी ने कहा कि शिव भक्तों को भी अपने जीवन में निजी स्वार्थों का त्याग कर समाज और मानवता के कल्याण में योगदान देना चाहिए।
डॉ. सर्वेश्वर जी ने कहा कि आज मानव अपने स्वार्थों के कारण संवेदनहीन होता जा रहा है और प्राणीमात्र के प्रति करुणा समाप्त होती जा रही है। उन्होंने पशु-पक्षियों के प्रति बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि महादेव पशुपतिनाथ हैं, ऐसे में पशु हत्या कर हम उन्हें कैसे प्रसन्न कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि सच्चा भक्त वही है जो दूसरों के दुख को समझे और अपने स्वार्थों का परित्याग करे। उनके अनुसार सबसे श्रेष्ठ आसन ‘आश्वासन’, सबसे उत्तम योग ‘सहयोग’ और सबसे लंबी श्वास ‘विश्वास’ है, जो हमें जरूरतमंदों को देना चाहिए।
डॉ. सर्वेश्वर जी ने श्रद्धालुओं से अपने भीतर दया, प्रेम, त्याग और करुणा जैसे गुणों को विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ही हम अपने अंतःकरण में नीलकण्ठ के सच्चे दर्शन कर सकते हैं।
इस अवसर पर कथा पंडाल में महाशिवरात्रि महोत्सव भी धूमधाम से मनाया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन व नृत्य कर उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम में जसनीत सिंह, कविता कौर, अंकित शर्मा, गीता बलुटिया, विपिन गुप्ता, दीक्षा गुप्ता, शिव कुमार, राजेन्द्र धामी, देवकरण जी (पूर्व चेयरमैन रामपुर), रेणु अधिकारी (दर्जा मंत्री), ओम प्रभाकर, संगीता, महेंद्र सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


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