उत्तराखंड में गहराया बिजली संकट, मांग के मुकाबले कम पड़ रही आपूर्ति; कटौती बनी मजबूरी

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समाचार सच, देहरादून। उत्तराखंड में बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच बढ़ते अंतर ने विद्युत व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। सितंबर के तीसरे सप्ताह में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही प्रदेश में आपूर्ति का दबाव बढ़ा है। हालात को देखते हुए ऊर्जा विभाग को अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली कटौती का सहारा लेना पड़ रहा है।

उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के प्रबंध निदेशक ने गुरुवार, 24 सितंबर को प्रदेश में बिजली की उपलब्धता से जुड़े मौजूदा आंकड़े सामने रखे। आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड में बिजली की उपलब्धता मांग के अनुरूप नहीं है। प्रदेश की ओर से केंद्र सरकार से अतिरिक्त बिजली कोटा उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया जा रहा है।

मौजूदा संकट के बीच खुले बाजार से बिजली खरीदने के प्रयास भी पर्याप्त राहत नहीं दे पा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 रुपये प्रति यूनिट तक की कीमत पर बिजली खरीदने की कोशिश के बावजूद यूपीसीएल को उपलब्ध बिजली का केवल लगभग दो प्रतिशत हिस्सा ही मिल सका। इससे बाजार में बिजली की सीमित उपलब्धता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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प्रदेश में बिजली की कमी का असर कटौती के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। सितंबर महीने में उत्तराखंड में करीब 12.4 मिलियन यूनिट बिजली की कटौती दर्ज की गई है।

बिजली की कमी केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। सितंबर में कई बड़े राज्यों में भी कटौती दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पंजाब में 91.2 मिलियन यूनिट, हरियाणा में 68.9 मिलियन यूनिट, महाराष्ट्र में 42.9 मिलियन यूनिट और उत्तर प्रदेश में करीब 39 मिलियन यूनिट बिजली की कटौती हुई।

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वहीं तमिलनाडु में करीब 9.6 मिलियन यूनिट, जबकि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लगभग 7.5 मिलियन यूनिट बिजली कटौती दर्ज की गई।

बिजली की उपलब्धता कम होने की स्थिति में यूपीसीएल ने क्षेत्रों के लिए प्राथमिकता भी निर्धारित की है। इसके तहत यह तय किया गया है कि बिजली संकट बढ़ने पर किन क्षेत्रों में पहले कटौती की जाएगी और किन क्षेत्रों को यथासंभव कटौती से बचाने का प्रयास किया जाएगा।

मौजूदा स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना ऊर्जा विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। केंद्र से अतिरिक्त बिजली मिलने और बाजार में उपलब्धता बढ़ने पर ही प्रदेश में कटौती के दबाव को कम करने की उम्मीद है।

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