समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। फाइबर बेशक न्यूट्रिशन के सबसे उपेक्षित पहलुओं में सेएक है। एक फूड जो अच्छी तरह से संतुलि और संपूर्ण है, का मतलब इसमें फल, सब्जियों, मेवे, बीज और साबुत अनाज शामिल हैं। इसमें अपने आप वह सब कुछ है, जो हमारे शरीर को चाहिए।
आज ज्यादातर आधुनिक डाइट में फाइबर की कमी है, क्योंकि फूड को इस हद तक प्रोसेस, रिफाइंड और पॉलिश किया जाता है कि अधिकांश फाइबर प्रोसेसिंग में निकल जाते हैं। पॉलिश किए चावल, रिफाइंड,गेहूं का आटा और इससे बने उत्पाद कुछ उदाहरण हैं। यहीं कारण है कि डिब्बाबंद और रिफाइंड फूड हमारे लिए खराब कहे जाते हैं।
फाइबर के फायदे –
फाइबर और वेट लॉस – फाइबर वजन घटाने का कोई जादुई दवा नहीं है, लेकिन लाइफ स्टाइल में बदलाव के साथ फाइबर युक्त डाइट लेने से कई तरह से फैट घटाने में मदद मिलती है।
-घुलनशील फाइबर भोजन की तृप्ति को बढ़ाने में मदद करता है और इस तरह आप लंबे समय तक पेट भरा महसूस करते हैं, इसलिए ज्यादा खाने या बार-बार खाने की सम्भावना कम हो जाती है।
- अघुलनशील फाइबर मात्रात्मक रूप से हमारे पेट में जगह भर देता है और इससे हमें पेट भी भरा हुआ महसूस होता है।
-फाइबर की कमी आपके ब्लड शुगर लेवल में तबाही मचा सकती है और जिसके नतीजे में फैट बढ़ता है।
फाइबर और हैल्थ - कम फाइबर वाली डाइट के सबसे आम नतीजों में से एक है, कब्ज। यह सबसे घातक दशाओं में से एक है, क्योंकि हमारे शरीर में पुराीन कब्ज और टॉक्सिन्स का बनना हमें कई बीमारियों का पात्र बना देता है और इससे बवासीर से लेकर कैंसर तक हो सकता है।
-फाइबर (अघुलनशील) मल को एक साथ लोने में मदद करता है और पेट को साफ करने के लिए प्राकृतिक कलींजर की तरह काम करता है, इसलिए आसान निकासी के लिए पर्याप्त मात्रा में फाइबर खाना जरूरी है। इसके पोषक गुणों की बजाय एक यांत्रिक और पेट की सफाई में भूमिका अधिक है। इसे अलावा, फाइबर (घुलनशील फाइबर) एक प्रीबायोटिक भोजन के रूप में काम करता है, जो प्रीबायोटिक (आंत के गुड बैक्टीरिया) को भोजन खिलाते हैं और जिससे आंत के बैक्टीरिया लंबे समय तक जीवित रहते हैं।
फाइबर और डायबिटीज – फाइबर ब्लड शुगर प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह भोजन में ग्लाइसेमिक लोड को बढ़ाकर और रक्त प्रवाह में शुगर की दर को बढ़ाकर ऐसा करता है। वास्तव में, भोजन में फाइबर शामिल करने से आप कई तरह के फूड खा सकते हैं, जिन्हें आपको खाने की वैसे इजाजत नहीं होगी।
फाइबर और दिल की सेहत – घुलनशील फाइबर लेना शरीर में कोलेस्ट्राल के ऊँचे स्तर और कोरोनरी आर्टरी डिजीज के जोखिम को कम करने के सबसे प्राकृतिक तरीकों में से एक है। ये शरीर से अतिरिक्त कोलेस्ट्रोल और फैट ग्लोब्यूल्स को निकालर ऐसा करता है। फाइबर डाइटरी कोलेस्ट्राल के विघटन और हजम होने को भी रोकता है।
फाइबर के प्रकार
फाइबर दो तरह के होते हैं – घुलनशील और अघुलनशील। घुलनशील फाइबर पानी में आसानी से घुल जाता है और जैली से पदार्थ में बदल जाता है, जबकि अघुलनशील फाइबर घुलता नहीं है या आंत में पचता है। दोनों तरह के फाइबर सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।
फलों पर अलसी के पाउडर के छिड़कने, भिगोए हुए सब्जी बीज से भी शरीर में फाइबर की आपूर्ति होती है।
हाई फाइबर सुपरफूडस हैं – सूखा आलुबुखारा, काली किशमिश, खजूर, अंजीर और खुबानी, साबुत, अनाज जैसे हाथ से निकाला हुआ चावल, दलिया, बाजरा, ज्वार, रागी, चौलाई भी फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।
क्या फाइबर सभी के लिए है ?
जब फाइबर की बात आती है, तो खाई जाने वाली मात्रा और किस्म किसी शख्स की सेहत की स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत होनी चाहिए। बहुत से लोग शिकायत करते हैं कि फाइबर लेने से उन्हें पेट फूला हुआ महसूस होता है, हालांकि ऐसा नहीं है।
फाइबर के साथ सावधानी – जैसा कि हर चीज के साथ है, ज्यादा फाइबर भी ठीक नहीं है। ज्यादा फाइबर फायदे के बजाए नुकसान कर सकता है। फाइबर बहुत ज्यादा लेने से सेहतमंद शख्स को भी सूजन, गैसे से कब्ज और आंतों की लाइनिंग की सूजन से पाचन सम्बन्धी परेशानी हो सकती है। यह आंत में पोषक तत्वों के अवशोषण को भी बाधित कर सकता है। यह सोचकर बहुत ज्यादा फाइबर लेना कि इससे आपको वजन घटाने में मदद मिलेगी, गलत है। पर्याप्त फाइबर खाएं और कभी भी अति ना करें। (साभार: आरोग्यधाम)


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