भक्ति के महासागर में डूबा हल्द्वानी, भागवत कथा के समापन पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब

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विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद, प्रकृति संरक्षण का भी दिया गया संदेश

समाचार सच, हल्द्वानी। सात दिनों तक भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना की गंगा बहाने वाला श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ रविवार को भव्य पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ सम्पन्न हो गया। कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण जय श्रीकृष्ण व हरि नाम संकीर्तन से भक्तिमय हो उठा।

श्री गिरिजा देवी सनातन सेवा समिति, हल्द्वानी द्वारा आयोजित इस धार्मिक आयोजन में सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञाचार्य आचार्य प्रमोद चन्द्र जोशी एवं आचार्य प्रकाश चन्द्र जोशी ने विधिवत यज्ञ पूर्णाहुति सम्पन्न कराई। इसके पश्चात गौदान, शय्यादान तथा व्यास पूजन जैसे पुण्य अनुष्ठान संपन्न हुए।

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कथा व्यास डॉ. नवीन चन्द्र बेलवाल ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को संस्कारवान और आदर्श बनाने का दिव्य मार्ग है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मनुष्य के भीतर देवत्व के गुणों का जागरण करती है तथा ‘मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव’ का संदेश देकर माता-पिता और गुरुजनों के प्रति सम्मान व समर्पण का भाव पैदा करती है।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली में माता-पिता के प्रति सेवा और सम्मान की भावना कमजोर होती जा रही है, जो सनातन संस्कृति के लिए गंभीर चिंता का विषय है। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण सहित सभी दिव्य अवतारों ने अपने जीवन से माता-पिता की सेवा और आज्ञापालन का आदर्श प्रस्तुत किया है।

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महाराज महामंडलेश्वर स्वामी परेश यति महाराज ने कहा कि भागवत कथा ज्ञान यज्ञ से तन, मन और धन तीनों की शुद्धि होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से समाज सेवा, गौ सेवा और परोपकार के कार्यों में योगदान देने का आह्वान किया।

समिति के संरक्षक प्रो. डॉ. एस.डी. तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में भागवत कथा जैसे आयोजनों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और जीव संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जनजागरण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि धर्म और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं।

कथा समापन अवसर पर प्रकृति पूजन का विशेष आयोजन किया गया, जिसमें महाराज श्री ने विल्वपत्र का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

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