ज्योलिकोट के दूषित पानी पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव को निगरानी के निर्देश

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समाचार सच, नैनीताल। नैनीताल जिले के ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल से बीमारी फैलने की शिकायत के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जल संस्थान के अधिकारियों ने अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर क्षेत्र की स्थिति की जानकारी दी। प्रशासन की ओर से स्थिति सामान्य होने और प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की बात कही गई, लेकिन विभिन्न विभागों की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अदालत ने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वीरभट्टी, बेलुआखान, प्रेमा जगाती स्कूल और सरिताताल समेत 10 स्थानों से लिए गए पानी के नमूनों की जांच में सभी सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतर पाए। जांच में पानी में हानिकारक बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आने की जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में भी पांच में से चार नमूनों के असंतोषजनक पाए जाने की बात सामने आई।

सुनवाई के दौरान खुर्पाताल क्षेत्र के निवासियों की ओर से भी एक प्रार्थना पत्र अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसमें सरिताताल के आसपास सीवर लाइन चोक होने के कारण गंदगी के पेयजल स्रोतों और जलापूर्ति लाइनों तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। अदालत ने इस प्रार्थना पत्र को भी रिकॉर्ड में ले लिया।

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मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने विभिन्न जांच रिपोर्ट में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर सामने आए तथ्यों पर अधिकारियों से जवाब मांगा। अदालत ने कहा कि ग्रामीणों की ओर से दूषित एवं दुर्गंधयुक्त पानी की शिकायत किए जाने के बावजूद समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। कोर्ट ने अधिकारियों को लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े मामले में अधिक संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ काम करने की नसीहत दी।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पूरे प्रकरण की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्हें अगले सप्ताह तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है। सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने अदालत को जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रशासन की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।

अदालत के निर्देशों के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के लिए गठित कमेटी में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी शामिल करने की बात कही। वहीं, सीएमओ को प्रभावित परिवारों की स्थिति और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर अलग से शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रभावित क्षेत्रों में नए सिरे से पानी के नमूने एकत्र कर जांच कराने तथा प्रशासन को पूरे नैनीताल क्षेत्र में पेयजल स्रोतों की व्यापक जांच कराने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

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