मी एक दिन ज़रूर लौट बे औला…

खबर शेयर करें

ओ मेरा दाज्यू ओ मेरा भुला, छुट गौ मेरा जो छुट गो मेरा दुन सोला।
अरे छुट गो मेरा बचपन, छुट गो माल गोट,छुट गो मेरा छान।
छुट गो मेरा मिर्चा बाड़,छुट गईं किलमोरा जाड़।
छुट गो मेरा पहाड़ी आलू,छुट गो मेरा हिसालू।
छुट गो ऊ धुपरी घाम,छुट गो हमरा डावाक आम।
घुस घुटी खेल बेर फाट जाछी सी सुराव,दुद खा जाची छी आमक बिराव।
काकड़ चुरान में कतू बार खाई गई,जब नजर लाग जाच्छी तो,आम मंतरेन राई।
अलमारी बटी चवनप्राश चूरान में आम देनी हमें गाई,एक आसुं निकलड़न में,।
बुड़ बाडिक लग जनी है हाई।खाची हम भटक चुड़कनी,खाची हम गौहतक दुबुक, ना हमुल आमाक कोइं मान,ना कोईं मान बुबुक।
सूख गई अब धारा, सूख गई अब नौला, तू मेरा इंतज़ार कर ए पहाड़ा, मी एक दिन ज़रूर लौट बे औला।

-भूपेन्द्र सिंह

Ad AdAd Ad Ad Ad AdAd Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440