इन भूरे रंग के बारीक दानों में छिपे हैं सेहत के कई राज

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। आपने सांभर, ढोकला, अचार, दाल और नारियल चटनी जैसे व्यंजनों में बारीक भूरे रंग के दाने तो जरूर देखे होंगे। इन बारीक दानों को राई या सरसों के दाने कहा जाता है। राई का तड़का किसी व्यंजन में लगते ही उसका स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। लेकिन आपको बता दें कि राई में स्वाद के अतिरिक्त कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं जो माइग्रेन, अपच से लेकर दाद की समस्या आदि में बहुत फायदेमंद होते हैं। तो आइए जानते हैं राई के स्वास्थ्य लाभों के बारे में…

इन भूरे रंग के बारीक दानों में छिपे हैं सेहत के कई राज, माइग्रेन से लेकर दाद की समस्या में दिलाए राहत

माइग्रेन से आराम दिलाए
माइग्रेन या सिर दर्द से आराम दिलाने में राई के दानों के फायदे देखे जा सकते हैं। क्योंकि राई के दानों में मैग्नीशियम मौजूद होता है, जो आपके नर्वस सिस्टम को आराम पहुंचाता है। इसलिए अगर आपको भी सिर दर्द की समस्या है तो डाइट में राई के दाने शामिल करने के अलावा आप इन दानों को पीसकर इसका लेप भी अपने माथे पर लगा सकते हैं। इससे आपको आराम महसूस होगा।

जोड़ों के दर्द और सूजन में
आजकल बुजुर्गों के अलावा कम उम्र के लोगों को भी जोड़ों के दर्द, सूजन या गठिया रोग की शिकायत होने लगी है। ऐसे में इस समस्या से राहत पाने के लिए आप राई के दानों और कपूर को एक साथ पीस लें। अब इसका लेप तैयार करके उसे प्रभावित भाग पर लगा लें। और फिर ऊपर से पट्टी बांध लें। नियमित इस उपाय को करने से आपको काफी फायदा मिलेगा।

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दाद की समस्या में
वायरस के फैलाव से होने वाली दाद की समस्या बहुत परेशान करती है। ऐसे में अगर किसी को दाद हो गया है तो इसके लिए आप थोड़ी सी राई के दानों को महीन पीसकर इसके पाउडर को सिरके में मिलाकर एक लेप बना लें और इस लेप को दाद से प्रभावित त्वचा पर लगा लें। इससे आपको दाद की समस्या में बहुत आराम मिल सकता है।

पाचन को अच्छा करे
पाचन की समस्या आजकल लोगों के लिए आम बात बन गयी है। पेट दर्द, गैस आदि से राहत के लिए आप 1-2 ग्राम राई के चूरन में चीनी मिलाकर इसका सेवन करें। इससे आपका हाजमा बेहतर होने के साथ ही आपकी पाचन क्रिया भी दुरुस्त होती है।

  • राई का प्रमुख गुण पाचक है।
  • खटाई पैदा करने का गुण होने से वह स्वादिष्ट भी है।
  • पेट में नन्हें कीड़े पड़ जाने पर इसके पानी से कीड़े मर जाते हैं।
  • हैजे में राई पीसकर पेट पर लेप करने से उदरशूल व मरोड़ में आराम मिलता है।
  • सभी अचारों में राई डाली जाती है द्य उससे वे सड़ते भी नहीं और खटाई लिए हुए अपना स्वाद भी बनाए रहते हैं।
  • इसी प्रकार दाल-शाक में अन्य मसालों के साथ इसका भी उपयोग होता है।
  • दर्द या सूजन मिटाने का उसमें गुण है।
  • इसकी पुल्टिस बनाकर यदि दर्द वाली जगह में सेक किया जाए, तो तुरंत राहत मिलती है।
  • बाह्योपचार में राई का लेप सूजन कम करने वाला माना जाता है। गरम पानी में राई डालकर सहने योग्य तापमान तक बना लिया जाए, इतने में राई फूल जाती है और पानी में उसका असर हो जाता है। इस पानी को किसी टब में कमर की ऊँचाई तक भरा जाए और उसमें टब बाथ की तरह बैठा जाए तो प्रदर, प्रमेह आदि यौन रोगों के सुधार में इसका बहुत अच्छा प्रतिफल निकलता है।
  • राई या सरसों के तेल, में बारीक नमक मिलाकर, उससे मंजन का काम लिया जाए, तो दांतों तथा मसूड़ों की मजबूती व सफाई होती रहती है।
  • विष विकार में चूर्ण एक से दो चम्मच की मात्रा में दिया जाता है, ताकि वमन के द्वारा विष बाहर निकल जाए।
  • राई अग्निदीपक, पाचक, उत्तेजक एवं पसीना लाने वाली बड़ी गुणकारी औषधि है।
  • राई का औषध प्रयोजन हेतु कम मात्रा में उपयोग ही लाभकारी है।
  • इसे पीसकर शहद में मिलाकर सूंघने से जुकाम मिटता है।
  • मात्र राई पीस कर सूंघने या तेल सूंघने से मिर्गी-मूर्छा दूर होती है।
  • कान के फोड़े फुंसी व बहरेपन में राई का तेल कान में डालते हैं।
  • राई पीस कर अरण्डी के पत्तों में चुपड़ कर जोड़ों पर लगाने से संधियों की सूजन मिटती है।
  • शरीर के भीतर अगर कहीं खून का जमाव हो जाये तो वहां काली राई के तेल की मालिश करके सेंक दें। खून का जमाव खुल जाता है।
  • काली राई को पीसकर मस्तक में लेप करने से आधा सीसी या अधकपारी रोग में लाभ होता है।
  • राई के फायदे से गंजेपन की समस्या में लाभ मिलता है। आधी कच्ची और आधी सेंकी हुई काली राई के दाने को पीसकर कड़वे तेल (सरसों) में मिला लें। इसे लगाने से सिर के गंजेपन में लाभ होता है।

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