माघ पूर्णिमा पर 9 घंटे तक भद्रा का प्रभाव, जानें पूजा-स्नान का शुभ समय

खबर शेयर करें

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। इस वर्ष माघ पूर्णिमा का व्रत रविवार, 1 फरवरी को श्रद्धा व विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार इस दिन श्रद्धालु स्नान, दान और व्रत कर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे। इस बार माघ पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि पुष्य योग का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

पंचांग के अनुसार, 1 फरवरी को सुबह 05.52 बजे से पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होगी, जो 2 फरवरी को प्रातः 03.38 बजे तक रहेगी। माघ पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से पवित्र नदियों में स्नान का महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

यह भी पढ़ें -   31 जनवरी 2026 शनिवार का पंचांग, जानिए राशिफल में आज का दिन आपका कैसा रहेगा

इस वर्ष माघ पूर्णिमा पर भद्रा का प्रभाव भी रहेगा, जिसके कारण कुछ समय तक शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए पूजा और दान के शुभ मुहूर्त जानना आवश्यक है।

माघ पूर्णिमा पर भद्रा का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, 1 फरवरी को सुबह 07रू09 बजे से शाम 04.42 बजे तक भद्रा रहेगी। इस दिन चंद्रमा कर्क राशि में स्थित रहेंगे, जिससे पृथ्वी लोक पर भद्रा का प्रभाव माना जाता है।

माघ पूर्णिमा पर शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05.24 से 06.17 बजे तक
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12.13 से 12.57 बजे तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 02.23 से 03.07 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 05.58 से 06.24 बजे तक
अमृत काल- शाम 05.59 से 07.29 बजे तक
निशिता मुहूर्त – रात 12.08 से 01.01 बजे (2 फरवरी)
रवि पुष्य योग- सुबह 07.09 से रात 11.58 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग – सुबह 07.09 से रात 11.58 बजे तक

यह भी पढ़ें -   उत्तराखंडः आज फिर बदलेगा मौसम, पहाड़ों से मैदान तक बारिश-बर्फबारी का अलर्ट, रहे सर्तक

माघ पूर्णिमा की पूजा विधि
माघ पूर्णिमा के दिन श्रद्धालुओं को विधि-विधान से लक्ष्मी-नारायण की पूजा करनी चाहिए। भगवान विष्णु को पीले रंग के फल, फूल और वस्त्र अर्पित करें तथा माता लक्ष्मी को लाल या गुलाबी पुष्प व श्रृंगार सामग्री चढ़ाएं। इस दिन सत्यनारायण कथा का पाठ करना भी अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है।

  • ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी में स्नान करना सर्वाेत्तम माना गया है। यदि नदी स्नान संभव न हो, तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर घर पर ही स्नान करें।
  • माघ पूर्णिमा का व्रत रखने और विधिवत पूजा करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।
Ad Ad Ad Ad AdAd Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440