लांस नायक गोपाल सिंह ने अपनी जान की परवाह ना करते हुए अपने कमांडर को अपने कंधों पर उठाया

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समाचार सच, हल्द्वानी। गोपाल सिंह का जन्म 21 जनवरी 1963 को जनपद अल्मोड़ा के ग्राम में मछोड़ तल्ला सल्ट में हुआ था। 18 वर्ष की उम्र होते ही वे कुमाऊँ रेजीमेंट में भर्ती हो गए और उन्हें 20 कुमाऊं में तैनाती मिली।

मेजर बी एस रौतेला ने बताया कि दिनांक 20 सितंबर 1990 को हमारे देश की सीमा में कुछ घुसपैठिए आतंकवादी घुस आए थे। जब घुसपैठियों की भनक हवलदार बच्ची सिंह को लगी तो उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए घुसपैठियों की फायरिंग का करारा जवाब दिया। नतीजतन वे भागने लगे तभी उनका पीछा करते हुए लांस नायक गोपाल सिंह ने एक घुसपैठिए को धराशायी कर दिया। तभी उन्होंने देखा कि एक घुसपैठिया उनके सेक्शन पर फायर करने को तैयार है। नायक गोपाल सिंह ने अपने अचूक निशाने से उसको भी मार गिराया। पूरी सेक्शन ने घुसपैठियों का पीछा किया और दो और घुसपैठियों को मार गिराया।

लेकिन बाकी घुसपैठियों का पीछा करते हुए वह काफी दूर निकल गए। इस इलाके में दुश्मन ने बारूदी सुरंग बिछाई थी। घुसपैठियों को खदेड़ने के बाद वापस आते वक्त सेक्शन कमांडर हवलदार बच्ची सिंह का पैर बारूदी सुरंग पर पड़ा तो पलक झपकते ही वे हवा में ऊपर उठे और जमीन पर गिर पड़े। लांस नायक गोपाल सिंह ने अपनी जान की परवाह ना करते हुए अपने कमांडर को अपने कंधों पर उठाया और कैंप की ओर जाने लगे। लेकिन उनका पैर भी बारूदी सुरंग में पड़ गया जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। लेकिन इसकी परवाह ना करते हुए वे कैंप की तरफ आगे बढ़े और सकुशल वहां पहुंच भी गए। पर अत्यधिक खून बहने के कारण लांस नायक गोपाल सिंह 22 सितंबर 1990 को शहीद हो गए।

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उनकी वीरता, अदम्य साहस और देशभक्ति के जज्बे को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया। उनकी वीरनारी श्रीमती आनंदी देवी वर्तमान में रामनगर में रहती हैं। उन्हें अपनी पति की शहादत पर गर्व है। वे कहती हैं कि भारतीय सेना में उनके बहादुर पति का नाम सदैव सम्मान से लिया जाता रहेगा। मृत्यु तो निश्चित है लेकिन मातृभूमि के लिए बलिदान करने का मौका सभी को नहीं मिलता।

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समाचार सच परिवार शहीद लांस नायक गोपाल सिंह की शहादत को सलाम करता है और उनको नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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