जानें, कल गलत भी साबित हो सकते हैं लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल्स…

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समाचार सच, नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव नतीजे आने में अभी एक दिन का वक्त बाकी है, लेकिन अभी एग्जिट पोल्स के मुताबिक एनडीए की सरकार एक बार फिर से बनने वाली है। भले ही एग्जिट पोल्स में बीजेपी और एनडीए को बढ़त दिखाई गई है, लेकिन इनके इतिहास पर नजर डालें तो रोमांच अभी बाकी है। ऐसा कई बार हुआ है, जब एग्जिट पोल्स के मुकाबले नतीजे खासे विपरीत रहे या फिर काफी अंतर रहा।
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की 2004 में वापसी की उम्मीद लगभग सभी एग्जिट पोल्स ने जताई थी। एग्जिट पोल्स में एनडीए के सबसे बड़े गठबंधन के तौर पर उभरने की संभावना जताई गई थी, लेकिन जीत की बाजी यूपीए के हाथ लगी। इसी तरह 2009 में ज्यादा सर्वे में यूपीए की जीत के अंतर को बहुत कम आंका गया था।

एग्जिट पोल सर्वे में क्या है समस्या: एग्जिट पोल सर्वे में काफी कम वोटरों की राय ली जाती है, जो पूरी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व नहीं कहा जा सकता। छोटा सैंपल साइड होने की वजह से यदि कोई एक चूक भी होती है तो फिर इसका नतीजा पर बड़ा असर होता है। इसके अलावा बड़ी बात यह है कि इन पोल्स को पार्टियों के वोट प्रतिशत को जानने के लिहाज से डिजाइन किया जाता है। इसमें सीट शेयरिंग की बात नहीं होती। वोट शेयर कितना सीट शेयर में कन्वर्ट होता है, इसका अनुमान लगाना मुश्किल होता है। खासतौर पर जब बहुकोणीय मुकाबला हो जाए तो फिर वोट शेयर के आधार पर सीट शेयर का अंदाजा खासा मुश्किल हो जाता है।

गलत होने में क्या कहता है एग्जिट पोल्स: यदि एग्जिट पोल्स की ओर से लगाए गए अनुमान गलत साबित होते हैं तो फिर छोटे-छोटे बहाने सुनने को तैयार रहिए। जैसे भ्रमित वोटर को प्रिफरेंस मिलना, प्रतिभागियों की ओर से गलत जवाब, सैम्पलिंग एरर या फिर आम लोगों की अपेक्षाओं के मुताबिक राय दिखाने के लिए किया गया रैशनलाइजेशन। ऐसी कई खामियां या चूक होती हैं, जिनके चलते एग्जिट पोल्स और वास्तविक नतीजों में खासा फर्क होता है।

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