मां को खोया, लेकिन हौसला नहीं टूटा… नैनीताल-ओखलकांडा के अजय महरा बने परमाणु वैज्ञानिक, अब देश की न्यूक्लियर ताकत को देंगे नई उड़ान

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बिना कोचिंग और बिना ट्यूशन सिर्फ सेल्फ स्टडी से हासिल की बड़ी सफलता, बीएआरसी में वैज्ञानिक पद पर चयन से उत्तराखंड का बढ़ाया मान

समाचार सच, हल्द्वानी। सपने वही सच होते हैं, जिन्हें पूरा करने का जुनून मुश्किल हालात भी नहीं रोक पाते। उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी अजय महरा ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर ऐसा ही कर दिखाया है। बिना किसी कोचिंग और ट्यूशन के केवल सेल्फ स्टडी के भरोसे उन्होंने देश के प्रतिष्ठित परमाणु ऊर्जा विभाग में वैज्ञानिक बनने का गौरव हासिल किया है। अब वह भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई में प्रशिक्षण के बाद भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मूल रूप से नैनीताल जिले के ओखलकांडा क्षेत्र के भद्रकोट गांव के रहने वाले अजय महरा बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने हल्द्वानी के सेंट लॉरेंस पब्लिक स्कूल से हाईस्कूल में 96 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और इंटरमीडिएट भी शानदार प्रदर्शन के साथ उत्तीर्ण किया। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई पूरी की, जहां उन्हें मेधावी छात्र होने के कारण छात्रवृत्ति भी मिली।

उच्च शिक्षा के लिए अजय ने एमबीपीजी कॉलेज, हल्द्वानी से एमएससी (भौतिक विज्ञान) की। इसी दौरान उन्होंने जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF-NET) परीक्षा भी उत्तीर्ण की। इसके बाद आईआईटी की ऑल इंडिया GATE परीक्षा में पूरे देश में 22वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसी उपलब्धि के आधार पर परमाणु ऊर्जा विभाग में भौतिक विज्ञान विषय के वैज्ञानिक पदों के लिए हुई अखिल भारतीय चयन प्रक्रिया में उनका चयन हुआ।

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अजय की सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि उन्होंने अपने पूरे शैक्षणिक सफर में कभी किसी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। उनका मानना रहा कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और सेल्फ स्टडी ही सफलता की सबसे मजबूत कुंजी है। आज उनकी यह उपलब्धि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

अजय का जीवन संघर्षों से भी भरा रहा। उनके पिता धरम सिंह महरा असम राइफल्स में कार्यरत हैं, जबकि तीन वर्ष पहले उनकी मां दीपा महरा का कैंसर के कारण निधन हो गया था। बीएससी की पढ़ाई के दौरान अजय ने अपनी मां की सेवा और इलाज के साथ पढ़ाई का संतुलन बनाए रखा। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। अजय अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं।

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परिवार में शिक्षा का माहौल भी प्रेरणादायक है। उनकी छोटी बहन काजल महरा ने भी आईआईटी-जैम परीक्षा में ऑल इंडिया 325वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।

अजय महरा की इस उपलब्धि पर शिक्षा, समाज और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। लोगों का कहना है कि अजय ने यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। उनकी यह उपलब्धि केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय बन गई है।

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