Chale-1

मुंह के छाले, निगलने न दें निवाले

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। मुंह में छाले होना एक आम समस्या है। यह रोग नहीं अपितु लक्षण है जो अन्य किसी बीमारी या समस्या की ओर संकेत करते हैं। मुंह में छाले किसी को कभी भी हो सकते हैं। किसी को वर्ष में एक बार तो किसी अन्य को हर कुछ दिन बाद हो जाते हैं। मुंह में छाले होने पर व्यक्ति कुछ भी खा व निगल नहीं सकता। उसे गर्म चीजें पीने खाने से पानी पीने या बोलने में भी तकलीफ होती है। ये मुंह के भीतर की त्वचा या जीभ में कहीं भी हल्का खड्डा जैसे दिखते हैं। ये छाले सफेद, भूरे, लाल घेरे में घिरे होते हैं कभी-कभी इन झिल्ली जैसी संरचना भी ढंकी हेाती है। ये छाले मुंह के भीतर, होंठ, गालों के भीतरी भागों में, जीभ के किसी भी तरफ हो जाते हैं।
कारण
यह विटामिन बी व सी की कमी से होते हैं। पेट साफ न रहने, कब्ज एवं आमाशय की अक्षमता के कारण, ज्यादा गर्म चीजों के खाने व पीने, दवाओं की अधिकता, संक्रमण, ज्यादा चूना वाला पान व ज्यादा शक्कर खाने, मुंह व दांत, जीभ की अच्दी तरह सफाई नहीं करने, धूम्रपान की अधिकता, पायरिया, बुखार, स्कर्वी, संग्रहणी, रक्तहीनता आदि रोग एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी होने, दूषित जल व भोजन, पोषक शून्य भोजन या बिना भूख लगे जल्द से जल्द ज्यादा खाने, कैल्शियम व खनिज तत्वों के अभाव, एलर्जी, खसरा, रक्त विकार, गर्म चीजों के अलावा बर्फ, चॉकलेट, च्यूंगम, कफवर्धक चीजों, खराब दूध की बोतल, तली चीजों, तंबाकू व मांसाहार आदि से भी होते हैं।
बचाव के उपाय –
उपचार की सभी विधियों में इनकी अनेक दवाइयां हैं। घरेलू उपाय हैं। अनुभूत नुस्खे हैं फिर भी कुछ सावधानियां व उपाय सभी पीड़ित व्यक्ति को करने चाहिए ताकि भविष्य में यह आगे न हो।
-हर हाल में पेट को साफ रखें। कब्ज न होने दें। आमाशय की सक्रियता बनाए रखें।
-भूख लगे, तभी भोजन करें। भोजन ताजा हो। ठंडा या तेज गर्म न हों। भोजन आराम से चबा-चबा कर करें। मात्र संतुलित हो। भोजन पौष्टिक हो।
-भोजन में सलाद, सूप, मौसमी, फल, सब्जी-भाजी पर्याप्त हो।
-दिन भर में दस-बारह गिलास पानी पिएं। दूध में मलाई का लें। अवसर मिले, तब दही, मट्ठा, रायते का सेवन करें। नींबू पानी पिंए।
-पान, तंबाकू, गुटखा, पाउच, धूम्रपान, नशापान त्याग दें।
-नमक, शक्कर, मिर्च-मसाला, तली चीजें कम खाएं।
-मुंह, दांत, जीभ की नियमित देा बार सफाई करें।
-बाजार की चीजों, दूषित जल, मिलावटी चीजों व नकली रंग से बचें। जंग फूड, कोल्ड ड्रिंक्स एवं बाजार के जूस का उपयोग न करें।

  • संक्रमित व प्रदूषित स्थानों पर न जाएं।
    -छालों पर मधुरस या घी लगाकर लार को बहाएं। इससे वह जल्दी ठीक होंगे।
    -परेशानी बढ़ने पर चिकित्सक के पास जाएं। शुगर व बी.पी. पेशेंट डॉक्टर को अपनी बीमारी भी बताएं।
    अधिक दवाओं का उपयोग न करें।
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