नौवें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस आज

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। नौवें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर का आज 28 नवंबर को शहीदी दिवस है। गुरु तेग बहादुर नौवें सिख गुरु थे और सिख धर्म के संस्थापकों में से एक थे। हर साल इस तारीख को उनकी शहादत दिवस मनाई जाती है। इस मौके पर भारत समेत दुनियाभर में लोग उनकी कुर्बानियों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

गुरु तेग बहादुर जी की शहादत दुनिया में मानव अधिकारियों के लिए पहली शहादत थी, इसलिए उन्हें सम्मान के साथ ‘हिंद की चादर’ कहा जाता है। गुरु तेग बहादुर की याद में उनके शहीदी स्थल पर एक गुरुद्वारा साहिब बना है। जिसे गुरुद्वारा शीश गंज के नाम से जाना जाता है।

मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर 24 नवंबर 1675 को गुरु तेग बहादुर की हत्या की गई थी। औरंगजेब ने उनको सिख धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म स्वीकार करने का दबाव डाला था। लेकिन गुरु तेग बहादुर जी उसके दबाव के आगे नहीं झुके। उन्होंने धर्म परिवर्तन की बजाय शहादत को चुना। गुरु तेग बहादुर धर्म की रक्षा के लिए स्वयं को बलिदान करने देने वाले उच्च व्यक्तित्व थे। उन्होंने अपने सर्वाेच्च बलिदान से सभी के लिए धार्मिक स्वतंत्रता का बड़ा संदेश दिया।

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गुरु तेग बहादुर जी का जन्म 1621 में अमृतसर में हुआ था। उनके पिता छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद थे। वह एक कवि और गहरे आध्यात्मिक थे। उनकी बहादुरी, गरिमा, मानवता, गरिमा और मृत्यु आदि के बारे में विस्तार से लिखा है जिन्हें गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल किया गया है।

गुरु तेग बहादुर जी के अनमोल विचार

-गलतियां हमेशा क्षमा की जा सकती हैं, यदि आपके पास उन्हें स्वीकारने का साहस हो।
-अपने सिर को छोड़ दोए लेकिन उन लोगों को त्यागें जिन्हें आपने संरक्षित करने के लिए किया है। अपना जीवन दोए लेकिन अपना विश्वास छोड़ दो।
-आध्यात्मिक मार्ग पर दो सबसे कठिन परीक्षण हैंए सही समय की प्रतीक्षा करने का धैर्य और जो सामने आए उससे निराश ना होने का साहस।
-सफलता कभी अंतिम नहीं होतीए विफलता कभी घातक नहीं होतीए इनमें जो मायने रखता है वो है साहस।
-एक सज्जन व्यक्ति वह है जो अनजाने में किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचाए।
-एक सज्जन व्यक्ति वह है जो अनजाने में किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचाए।
-दिलेरी डर की गैरमौजूदगी नहींण् बल्कि यह फैसला है कि डर से भी जरूरी कुछ है।
-हार और जीत यह आपकी सोच पर निर्भर हैए माव लो तो हार है छान लो तो जीत है।
-डर कहीं और नहींए बस आपके दिमाग में होता है।
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