समाचार सच, देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में भी जल्द ही कोरोना पीड़ित मरीजों का इलाज प्लाज्मा थैरेपी से किया जाएगा। आइसीएमआर ने इसकी सैद्धांतिक सहमति दे दी हैं। कॉलेज प्रबंधन ने कोरोना से जंग जीत चुके लोगों से प्लाज्मा डोनेट करने की अपील की है। दुनियाभर के शोधकर्ताओं ने प्लाज्मा थैरेपी को कोरोना के इलाज के लिए उपयोगी बताया है। भारत में भी कई राज्य इस पर काम कर रहे हैं। जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। उत्तराखंड में भी एम्स ऋषिकेश व हल्द्वानी मेडकिल कॉलेज में प्लाज्मा थैरेपी शुरू की जा चुकी है। एम्स ऋषिकेश में अब तक तीन मरीजों को प्लाज्मा थैरेपी दी गई है। वहीं हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थेरेपी से दो लोग स्वस्थ हुए हैं। अब दून मेडिकल कॉलेज में इसकी शुरुआत की जा रही है।
प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि एफेरेसिस मशीन (रक्त से प्लाज्मा अलग करने वाली मशीन) इंस्टाल कर दी गई है। एक टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया है। सैद्धांतिक सहमति मिल गई है। लिखित अनुमति भी एकाध दिन में आ जाएगी। कोरोना से जंग जीत चुके लोगों से अपील की गई है कि वह गंभीर मरीजों के लिए प्लाज्मा डोनेट करें। उन मरीजों को डोनेशन के लिए बुलाया जाएगा जिन्हें 20 दिन से ज्यादा का वक्त हो चुका है। उनकी तमाम जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि कोरोना से रिकवर होने के बाद व्यक्ति के शरीर में एंडीबॉडी बन जाती हैं। प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडी के असर से मरीज के शरीर में मौजूद वायरस कमजोर होने लगता है। जिससे मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।
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