छठ के लिए शुरू हुईं तैयारियां: डाक्टर आचार्य

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। (देहरादून)। डा0 आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुए बताया कि बिहार, झारखंड और पर्ू्वी उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में दिवाली के बाद छठ पूजा का त्योहार मनाया जाता है। संतान प्राप्ति और उसके खुशहाल जीवन की कामना के लिए कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा की जाती है। यह व्रत तीन दिनों तक चलता है। छठ पूजा में सूर्य देव की भी पूजा की जाती है, इसलिए इसे सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है। छठ पूजा दिवाली के बाद छठे दिन की जाती है। इस साल छठ पूजा 10 नवंबर, बुधवार को है।
8 नवंबर- नहाय-खाए से छठ पूजा प्रारंभ
9 नवंबर- खरना
10 नवंबर छठ पूजा, डूबते सूर्य को अर्घ्य
11 नवंबर- उगते सूर्य को अर्घ्य, छठ पूजा समापन
नहाए खाय- छठ पूजा का आरंभ नहाए-खाय से होता है।
खरना- खरना छठ पूजा का दूसरा दिन होता है। खरना वाले दिन व्रत रखा जाता है और रात में खीर खाकर 36 घंटे का कठिन व्रत रखा जाता है। खरना के दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है।
छठ पूजा- खरना के अगले दिन छठ मैया और सूर्य देव की पूजा की जाती है। इस साल छठ पूजा 10 नवंबर को है। छठ पूजा के दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है । छठ पूजा समापन- छठ पूजा के अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसी के साथ 36 घंटे का कठिन व्रत संपन्न होता है।छठ पूजा के लिए इन चीजों की पड़ती है जरूरतरू
प्रसाद रखने के लिए बांस की दो तीन बड़ी टोकरी, बांस या पीतल के बने तीन सूप, लोटा, थाली, दूध और जल के लिए ग्लास, नए वस्त्र साड़ी-कुर्ता पजामा, चावल, लाल सिंदूर, धूप और बड़ा दीपक, पानी वाला नारियल, गन्ना जिसमें पत्ता लगा हो, सुथनी और शकरकंदी, हल्दी और अदरक का पौधा हरा हो तो अच्छा, नाशपाती और बड़ा वाला मीठा नींबू, जिसे टाब भी कहते हैं, शहद की डिब्बी, पान और साबुत सुपारी, कैराव, कपूर, कुमकुम, चन्दन, मिठाई।

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