पुत्रदा एकादशी 2026: इस दिन सफाई, बाल कंिटंग जेसे काम एक दिन पहले कर ले? क्यों जानिए इससे लगने वाले दोष के बारे में

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। कल 23 अगस्त को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। एकादशी के दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। इस दिन शरीर और मन को शुद्ध रखने के साथ-साथ घर के कामों में भी कुछ खास सावधानियां बताई गई हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण नियम है, इस दिन झाड़ू-पोछा नहीं करना। कई लोग इसके पीछे की वजह नहीं जानते और अनजाने में नियम तोड़ देते हैं। शास्त्रों में इसका अपना धार्मिक आधार है।

एकादशी के दिन की पवित्रता
एकादशी तिथि को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दिन मन, वचन और कर्म तीनों को शुद्ध रखने पर जोर दिया जाता है। व्रत के साथ अहिंसा का भाव भी बहुत महत्वपूर्ण है। छोटे-छोटे जीवों की रक्षा करना भी धर्म का हिस्सा माना जाता है। घर की सफाई रोज की जरूरत है, लेकिन एकादशी जैसे पावन दिन पर कुछ कामों को टालने की सलाह दी जाती है। इससे दिन की पवित्रता बनी रहती है और व्रत का फल बढ़ता है।

झाड़ू-पोछा क्यों ना करें?
एकादशी के दिन घर में झाड़ू लगाने या पोछा लगाने से परहेज करने की बात कही गई है। मुख्य वजह यह है कि झाड़ू करते समय चींटी, कीड़े-मकोड़े जैसे सूक्ष्म जीव दबकर मर सकते हैं। इस दिन अहिंसा का विशेष महत्व होता है। अनजाने में हुई जीव हिंसा भी दोष लगाने वाली मानी जाती है। इसलिए सफाई का काम एक दिन पहले कर लेना या अगले दिन के लिए छोड़ देना बेहतर माना गया है। यह छोटी-सी सावधानी व्रत की शुद्धता बनाए रखने में मदद करती है।

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जीव हिंसा से लगने वाला दोष
शास्त्रों में अहिंसा को परम धर्म कहा गया है। एकादशी जैसे दिन पर छोटी जीव हिंसा भी मन की शुद्धता को प्रभावित कर सकती है। चींटी या अन्य सूक्ष्म जीवों की मृत्यु से हिंसा का दोष लगता है। यह दोष व्रत के पुण्य को कम कर सकता है। कई मान्यताओं में कहा गया है कि ऐसे कर्म से मन में अशांति रहती है। इसलिए झाड़ू-पोछा टालकर अहिंसा का पालन करना ज्यादा उचित माना जाता है। भाव शुद्ध रखने से ही व्रत सफल होता है।

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अन्य जरूरी सावधानियां
एकादशी के दिन बाल कटवाने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है। अधिक बोलने से भी बचना चाहिए, क्योंकि ज्यादा बात करने में अनचाहे और अनुचित वचन निकल सकते हैं। मधुर और सीमित वचन बोलना शुभ माना जाता है। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से दिन का वातावरण सात्विक बना रहता है। शरीर और वाणी दोनों पर संयम रखना एकादशी के व्रत का हिस्सा है।

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