पुत्रदा एकादशी 2026: क्यों नहीं तोड़ना चाहिए एकादशी वाले दिन बेलपत्र

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। सावन मास की पुत्रदा एकादशी को लेकर इस बार तारीख को लेकर थोड़ा उलझाव बना हुआ है। कुछ पंचांग 23 अगस्त को व्रत बता रहे हैं, तो कुछ जगह 24 अगस्त की बात कही जा रही है। एकादशी तिथि 23 अगस्त की रात से शुरू होकर 24 अगस्त सुबह तक रहेगी, इसलिए अलग-अलग परंपराओं में फर्क दिख रहा है। इस बीच कई भक्तों के मन में सवाल है कि एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ा जा सकता है या नहीं।

एकादशी पर बेलपत्र तोड़ने का नियम
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ना मना नहीं है। मुख्य रूप से तुलसी के पत्ते तोड़ने पर पाबंदी बताई गई है। बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और उनकी पूजा में इसका विशेष स्थान है। बिना बेलपत्र के शिव पूजा अधूरी मानी जाती है। एकादशी को बेलपत्र तोड़कर शिवलिंग पर चढ़ाने में कोई दोष नहीं माना गया है। भक्त श्रद्धा से इस दिन बेलपत्र तोड़कर शिवलिंग पर अर्पित कर सकते हैं।

किन दिनों बेलपत्र ना तोड़ें?
कुछ खास दिनों में बेलपत्र तोड़ना वर्जित माना गया है। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, द्वादशी, अमावस्या और पूर्णिमा को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। संक्रांति के दिन और रात के समय भी बेलपत्र तोड़ने से परहेज रखने की सलाह दी जाती है। सोमवार को भी बेलपत्र तोड़ना उचित नहीं माना गया है। ये नियम शिवपुराण और अन्य शास्त्रों में बताए गए हैं। निषिद्ध दिनों में खुद से गिरी पत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है या पहले से तोड़कर रखी पत्तियां चढ़ाई जा सकती हैं।

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सोमवार को बेलपत्र क्यों ना तोड़ें?
सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते हैं। लेकिन शास्त्रों में सोमवार को बेलपत्र तोड़ने से मना किया गया है। जो लोग सोमवार का व्रत रखते हैं, उन्हें रविवार के दिन ही बेलपत्र तोड़कर रख लेने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि बेलपत्र बासी नहीं होता, इसलिए एक दिन पहले तोड़कर रखना पूरी तरह उचित है।

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बेलपत्र का धार्मिक महत्व
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का बहुत महत्व है। भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए पूरी श्रद्धा से बेलपत्र अर्पित करते हैं। मान्यता है कि बेलपत्र शिवजी को अत्यंत प्रिय है। तीन पत्तों वाला बेलपत्र त्रिदेव का प्रतीक भी माना जाता है। नियमित रूप से सही तरीके से बेलपत्र चढ़ाने से मन की शांति मिलती है और भक्ति भाव बढ़ता है। पूजा के समय शुद्ध और ताजा बेलपत्र का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

सही तरीका अपनाएं
बेलपत्र तोड़ते समय शुद्ध मन से तोड़ें और पौधे का सम्मान रखें। निषिद्ध दिनों से एक दिन पहले तोड़कर साफ कपड़े में रख सकते हैं। एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सोमवार और अन्य वर्जित तिथियों का ध्यान जरूर रखें।

शास्त्रों के इन छोटे नियमों का पालन करने से पूजा का फल बढ़ता है। श्रद्धा और सही विधि दोनों ही जरूरी हैं। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए इन बातों का ध्यान रखना लाभकारी माना जाता है।

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