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साइकिल चलाने का सही समय और इससे जुड़ी कुछ बातें, आइए जानने के लिए करें क्लिक

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। बिगड़ती लाइफस्टाइल मोटापे के साथ-साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रही है। ऐसे में इन समस्याओं से बचाव करने के लिए शरीर में कुछ तरह की एक्टीविटी जरूरी है, ताकि शरीर को स्वस्थ्य रखने में कुछ मदद मिल सके। ऐसे में साइकिलिंग एक बेहतरीन एक्टिविटी साबित हो सकती है। साइकिलिंग करके खुद के शरीर को एक्टिव और फिट बनाना आसान हो सकता है। वजह यह है कि इसे भी एक तरह की एक्सरसाइज ही माना जाता है, लेकिन साइकिल चलाने के फायदे क्या-क्या हो सकते हैं, इसकी जानकारी शायद ही हर किसी को होगी। यही वजह है कि हम स्टाइलक्रेज के इस लेख में साइकिल चलाने का सही समय और इससे जुड़ी कुछ अहम बातें बता रहे हैं।

यहां हम साइकिल चलाने के निम्नलिखित फायदे बता रहे हैं –

हृदय स्वास्थ को बेहतर बनाए
साइकिलिंग के दौरान दिल की धड़कन तेज हो जाती है, जो एक तरह से दिल के स्वास्थ्य के लिए एक्सरसाइज हो सकती है। अध्ययनों के अनुसार, साइकिल चलाने जैसी गतिविधि से हृदय व रक्त वाहिकाओं से संबंधी (कार्डियोवैस्कुलर) जोखिम कम किया जा सकता है। इस संबंध में शोध में मध्यम आयु वर्ग के पुरुषों को शामिल किया गया। शोध में पाया गया कि जो लोग कोई काम नहीं करते हैं, उनकी तुलना में साइकिल चलाने जैसी एक्टिविटी में भाग लेने वाले लोगों का हृदय बेहतर तरीके से काम करता है। जो यह दर्शाता है कि साइकिल चलाने के फायदे हमारे दिल की सेहत का ख्याल रख सकते हैं।

वजन प्रबंधन में मदद करे
अगर कोई वजन प्रबंधन या वजन कम करने के उपाय की तलाश में हैं, तो उनकी भी यह तलाश साइकिलिंग से पूरी हो सकती है। जैसा मौजूदा अध्ययन बताते हैं कि कैलोरी बर्न करने में साइकिल चलाने के फायदे देखे जा सकते हैं, जो वजन घटाने में मदद कर सकते हैं। एक शोध के मुताबिक, लगभग 6 महीन तक साइकिल चलाने से 12 फीसदी वजन कम किया जा सकता है। इस शोध में शामिल महिलाओं को प्रतिदिन 60 मिनट के लिए पैदल चलने, साइकिल चलाने और तैराकी करने के लिए कहा गया। इसमें पैदल चलने और साइकिल चलाने की प्रक्रिया को वजन कम करने में मददगार पाया गया। बस ध्यान रहे कि वजन कम करने के लिए साइकिलिंग के साथ-साथ संतुलित खान-पान का भी ध्यान रखना जरूरी है।

टाइप 2 मधुमेह के जोखिम कम करे
साइकिल चलाने के फायदे टाइप 2 मधुमेह के जोखिम को भी कम करने में मदद कर सकते हैं। एनसीबीआई की साइट पर प्रकाशित शोध के मुताबिक, नियमित तौर से साइकिलिंग जैसी गतिविधि करने वाले वयस्क लोगों में अन्य वयस्कों की तुलना में टाइप 2 मुधमेह होने का जोखिम काफी कम देखा गया है। साथ ही मोटापे से पीड़ित कुछ महिलाओं में पाया गया कि 6 सप्ताह तक नियमित तौर पर हर दिन 45 मिनट तक साइकिल चलाने से उनके शरीर में तेजी से इंसुलिन के स्तर को कम करने का रिकॉर्ड देखा गया। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि टाइप 2 डायबिटीज को ठीक करने में साइकिलिंग काफी हद तक सहायक हो सकती है।

मांसपेशियों को मजबूत करे
साइकिलिंग के दौरान पैरों की मदद से पैडलिंग की जाती है। इस दौरान पैर ऊपर से नीचे की तरफ एक सर्कल में गतिविधि करते हैं। इससे पैरों की मांसपेशियों से लेकर शरीर के निचले हिस्से और ऊपर के हिस्से की मांसपेशियां मजबूत हो सकती हैं। साथ ही यह शरीर में एरोबिक्स कंडीशन यानी शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को भी बढ़ा सकता है। इस तरह साइकिल चलाने के फायदे शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए भी देखे जा सकते हैं।

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कैंसर के जोखिम कम करे
यह जानकारी थोड़ी हैरान कर सकती है कि साइकिलिंग कैंसर का जोखिम कम कर सकती है। कुछ चीनी महिलाओं और पुरुषों पर किए गए शोध के अनुसार, जिन लोगों ने प्रतिदिन 2 घंटे साइकिल चलाई थी, उनमें प्रतिदिन 30 मिनट तक साइकिल चलाने वाले लोगों के मुकाबले पेट के कैंसर का जोखिम लगभग 50 फीसदी तक कम देखा गया। वहीं, एक अन्य अध्ययन के मुताबिक, साइकलिंग जैसी गतिविधियां स्तन कैंसर के जोखिम से भर सकती हैं। इस शोध के मुताबिक, वॉकिंग और साइकलिंग करने वाली महिलाओं में व्यायाम करने वाली महिलाओं के मुकाबले स्तन कैंसर का जोखिम 10 फीसदी कम पाया गया। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि साइकिलिंग करके कुछ हद तक कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही ध्यान रहे कि कैंसर जानलेवा बीमारी है। अगर कोई इससे ग्रस्त है, तो उसे डॉक्टर से इलाज जरूर करवाना चाहिए।

गठिया की रोकथाम में मदद करे
ऑस्टियोअर्थराइटिस (जोड़ों में सूजन) के लक्षण कम करने और इसकी रोकथाम करने में साइकिल चलाने के फायदे हासिल किए जा सकते हैं। एनसीबीआई की साइट पर प्रकाशित शोध के मुताबिक, 8 सप्ताह तक 25 मिनट तक साइकिलिंग जैसी गतिविधि करने वाले लोगों में ऑस्टियोअर्थराइटिस के लक्षणों में कमी देखी गई। साइकिल चलाने से मांसपेशियों के संकुचन, शक्ति और कार्य करने की क्षमता में सुधार देखा गया। बता दें कि साइकिलिंग एक एरोबिक एक्सरसाइज के तहत आती है। वहीं, एरोबिक जैसी गतिविधियां करने से जोड़ों पर कम से कम जोर पड़ता है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, हल्के-फुल्के जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए 30 से 75 मिनट के लिए एरोबिक गतिविधियां की जा सकती हैं। इसमें साइकिलिंग से लेकर, तेज चलना या तैराकी भी शामिल कर सकते हैं।

तनाव कम करे
जैसा कि आप जान चुके हैं कि साइकिल चलाना अपने-आप में एक तरह का एरोबिक व्यायाम होता है। साथ ही, मौजूद अध्ययन भी यह बताते हैं कि व्यायाम करना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है। इसमें एरोबिक व्यायाम की गतिविधियां खास हो सकती है। ये गतिविधियां मन की स्थिति में बदलाव लाकर मस्तिष्क में खून का प्रवाह बेहतर बना सकती हैं। जो हाइपोथैलेमिक पिट्यूटरी एड्रेना (केंद्रीय तनाव प्रतिक्रिया प्रणाली) पर पड़ने वाले तनाव की प्रतिक्रिया को कम कर सकते हैं। इससे तनाव, अवसाद या चिंता के लक्षण कम करने में मदद मिल सकती है।

साइकिल चलाने का सही समय –
वैसे तो जब भी उचित समय मिले साइकिल चलाई जा सकती है। वहीं, एक अध्ययन के मुताबिक, सुबह के समय साइकिल चलाने के फायदे अधिक हो सकते हैं, क्योंकि शाम के मुकाबले सुबह के वक्त साइकिल चलाने से अधिक ऊर्जा की खपत होती है। इस आधार पर साइकलि चलाने के अधिक फायदे पाने के लिए सुबह का समय उपयुक्त माना जा सकता है।

किन-किन लोगों को साइकिलिंग नहीं करनी चाहिए –

  • वैसे तो साइकिलिंग बच्चों से लेकर वयस्क लोगों के लिए सुरक्षित मानी जाती है। फिर भी स्वास्थ्य की सुरक्षा को देखते हुए निम्न लोगों को साइकिल नहीं चलानी चाहिए।
  • छोटी उम्र के बच्चों को साइकिलिंग नहीं करनी चाहिए। अगर बच्चा 5 साल से बड़ा है और उसे साइकिल चलानी आती है, तब भी माता-पिता की निगरानी में ही उसे साइकिल चलाने के लिए दें।
  • घुटनों से जुड़ी समस्या वाले बुजुर्गों को भी साइकिल नहीं चलानी चाहिए, क्योंकि साइकिलिंग से घुटनों की समस्या बढ़ा सकती है। इसलिए, बुजुर्ग साइकलिंग को अपनाने से पूर्व एक बार डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
  • जैसा कि साइकिल चलाने के लिए अधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करना पड़ता है और इस दौरान सांस लेने की दर भी बढ़ने लगती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को देर तक साइकिलिंग नहीं करनी चाहिए। इसके कारण उनकी सांस फूलने की समस्या अधिक बढ़ सकती है। बेहतर यही होगा कि अस्थमा के मरीज डॉक्टर की सलाह पर ही साइकिल चलाएं।
  • वैसे तो साइकिल चलाने से दिल के दौरे और स्ट्रोक से जुड़े जोखिम कम किए जा सकते हैं, लेकिन जिन्हें मिर्गी के दौरे आते हैं, उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के साइकिलिंग नहीं करनी चाहिए। साइकलिंग के दौरान मिर्गी का दौरा आने से उन्हें और उनके आसपास के लोगों को गंभीर चोट लग सकती है।
  • मानसिक थकान होने पर किसी भी शारीरिक प्रतिक्रया को न करने की सलाह दी जाती है। वहीं, साइकिल चलाने के दौरान अधिक ऊर्जा के साथ-साथ मांसपेशियों पर भी जोर पड़ सकता है, जो काफी थकान भरा हो सकता है। इसीलिए, ऐसी हालात में भी साइकिलिंग से दूर रहना बेहतर हो सकता है।
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साइकिल चलाने के नुकसान –
हां साइकिल चलाने के फायदे हैं, तो वहीं कुछ साइकिल चलाने के नुकसान भी हो सकते हैं, जिनके बारे में जान लेना भी जरूरी है। साइकिल चलाने के नुकसान कुछ इस प्रकार हो सकते हैं रू
वजन अधिक घट सकता है – जैसा कि बता चुके हैं कि वजन घटाने के लिए साइकिल चलाने के फायदे हो सकते हैं, क्योंकि यह कैलोरी बर्न करने में मदद कर सकता है। इस आधार पर जिन्हें वजन बढ़ाने की जरूरत है, उन्हें अधिक साइकिल चलाने से बचना चाहिए।
सांस लेने की दर बढ़ सकती है – एनसीबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कार चलाने वाले लोगों की तुलना में साइकिल चलाने वाले लोगों में सांस लेने की दर बढ़ सकती है। ऐसे में सांस की समस्या से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यह नुकसानदायक हो सकती है।
दुर्घटना की संभवना बढ़ सकती है – जैसा कि बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण सुबह के समय कुछ स्थानों पर अधिक धुंध देखी जा सकती है। इस कारण से ऐसे स्थानों में साइकिल चलाने वालों के साथ सड़क दुर्घटनाएं होने की आशंका भी बढ़ सकती है।

साइकिल चलाने के फायदे कई हैं। अगर साइकिल चलाने से जुड़ी जरूरी सावधानियों का ध्यान रखा जाए, तो साइकिल चलाने के नुकसान से बचा जा सकता है। वहीं, अगर आप साइकिल चलाने के फायदे देखते हुए, साइकिलिंग का विचार कर रहे हैं, तो हम यही सुझाव देंगे कि भीड़-भाड़ वाली जगहों पर साइकिल न चलाएं। साथ ही अपनी सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखें। इसके अलावा, आप साइकिलिंग मशीन के जरिए भी साइकिल चलाने के फायदे पा सकते हैं।

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