हरिद्वार में संतों की हुंकार—‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का समर्थन, शिवराज-धामी ने मांगे सुझाव

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समाचार सच, हरिद्वार। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर हरिद्वार में बड़ा संत समागम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक समेत कई भाजपा विधायक और देशभर से आए संत-महात्मा शामिल हुए।

समागम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री धामी ने साधु-संतों के साथ ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर विस्तार से चर्चा की और इस विषय पर संत समाज के सुझाव मांगे। कार्यक्रम में मौजूद संतों ने एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव का समर्थन किया।

स्वामी रामदेव बोले- चुनावी ड्यूटी से शिक्षकों का समय बचेगा
योग गुरु स्वामी रामदेव ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का समर्थन करते हुए कहा कि देश में लगातार अलग-अलग चुनाव होने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव ड्यूटी में शिक्षकों का काफी समय खर्च हो जाता है। यदि पूरे देश में एक साथ चुनाव होते हैं तो शिक्षकों का समय बचेगा और वे विद्यार्थियों की शिक्षा पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

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रामदेव ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए देशहित से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के मतदाता समझदार हैं और उन्हें यह तय करने का अधिकार है कि वे किस दल को चुनना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि सभी संतों ने तय किया है कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचना चाहिए। उनके मुताबिक इससे देश विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है।

‘राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर होना चाहिए देशहित’
स्वामी रामदेव ने शिक्षा, अर्थव्यवस्था, कृषि और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज के किसी भी वर्ग के साथ अन्याय हो तो उसके खिलाफ आवाज उठनी चाहिए।

उन्होंने सामाजिक विभाजन को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि किसी भी समुदाय या वर्ग को अपमानित करना लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।

‘वंदे मातरम्’ को लेकर भी उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि इसके अर्थ और भाव को समझने के लिए भारतीय परंपरा और संस्कृत की जानकारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।

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अखाड़ा परिषद ने भी किया समर्थन
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रवींद्रपुरी महाराज ने भी ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद शुरुआती वर्षों में देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव काफी हद तक एक साथ होते थे, लेकिन समय के साथ अलग-अलग चुनावों की व्यवस्था बढ़ती गई। उनके अनुसार मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है और संत समाज इसका समर्थन करता है।

कई प्रमुख संत हुए शामिल
कार्यक्रम में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी, महामंत्री हरि गिरी महाराज, निर्मल अखाड़े के अध्यक्ष ज्ञानदेव महाराज, कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता करौली शंकर महाराज, दाती महाराज, साध्वी प्राची और महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश महाराज समेत कई संत-महात्मा मौजूद रहे।

समागम में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के संभावित प्रभावों, चुनावी व्यवस्था और देश के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर संत समाज के विचार और सुझाव सामने आए।

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