गुरु पूर्णिमा 3 जुलाई को: महर्षि वेद व्यास की जयंती पर मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा, शिव जी और सूर्य

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। सोमवार, 3 जुलाई को आषाढ़ मास की पूर्णिमा है। इसे गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस तिथि पर महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। ये पर्व गुरु को समर्पित है। इस दिन लोग अपने-अपने गुरु की पूजा करते हैं, उन्हें उपहार देते हैं। शास्त्रों में गुरु को भगवान से भी बढ़कर बताया गया है। गुरु ही हमें धर्म और अधर्म का भेद बताते हैं। जीवन में आगे बढ़ने के रास्ते बताते हैं। जानिए गुरु पूजा के महापर्व पर कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, आषाढ़ पूर्णिमा की सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए। स्नान के बाद शिव जी और सूर्य पूजा के साथ दिन की शुरुआत करें। सूर्याेदय के समय सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। तांबे के लोटे में जल भरें, चावल और लाल फूल डालें। इसके बाद ऊँ सूर्याय नम: मंत्र जप करते हुए अर्घ्य अर्पित करें। अपने माता-पिता का आशीर्वाद लें, क्योंकि माता-पिता ही हमारे पहले गुरु होते हैं। इसके बाद अपने गुरु के घर जाएं, उनका आशीर्वाद लें। हार-फूल पहनाएं। अपने सामर्थ्य के गुरु को शॉल-श्रीफल या कोई अन्य भेंट दें।

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ऐसे कर सकते हैं शिव पूजा
सोमवार और गुरु पूर्णिमा के योग में शिव पूजा जरूर करें। शिवलिंग पर जल, दूध और जल चढ़ाएं। शिवलिंग का बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूलों से श्रृंगार करें। चंदन का तिलक लगाएं। मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाएं और आरती करें। ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जप करें।

इन मंत्रों का भी कर सकते हैं जप
काफी लोग शिव जी, विष्णु जी, श्रीराम, श्रीकृष्ण, गणेश जी या किसी अन्य देवता को गुरु मानते हैं। गुरु पूर्णिमा पर देवताओं की, जिन्हें हम गुरु मानते हैं, उनकी भी विशेष पूजा करनी चाहिए। पूजा में ऊँ नमरू शिवाय, ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय, ऊँ रामदूताय नमः, कृं कृष्णाय नमः, ऊँ रां रामाय नमः आदि मंत्रों का जप कर सकते हैं। मंत्र जप के साथ ध्यान भी करें।

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गुरु पूर्णिमा पर दान-पुण्य जरूर करें
अभी वर्षा ऋतु शुरू हो गई है। बारिश के दिनों में जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज के साथ ही कपड़े और छाते का दान जरूर करें। गुरु पूर्णिमा पर दान-पुण्य करेंगे तो इसका अक्षय पुण्य मिल सकता है। अक्षय पुण्य यानी ऐसा पुण्य, जिसका असर जीवन भर बना रहता है। किसी मंदिर में पूजन सामग्री भी भेंट कर सकते हैं।

गुरु पूर्णिमा पर तीर्थ दर्शन और नदी में स्नान करने की है परंपरा
गुरु पूर्णिमा पर किसी पौराणिक मंदिर में दर्शन पूजन करना चाहिए। इसके साथ ही किसी पवित्र नदी में स्नान भी करना चाहिए। आषाढ़ पूर्णिमा पर तीर्थ दर्शन करने की परंपरा है। अगर नदी स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।

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