रोज हिप्स की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग से पहाड़ में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर, किसानों को मिलेगा अतिरिक्त आय का रास्ता

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समाचार सच, चंपावत।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले जंगली गुलाब यानी रोज हिप्स को अब ग्रामीण आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में पहल शुरू की गई है। रोज हिप्स के वैज्ञानिक संग्रहण, कटाई-पश्चात प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को लेकर चंपावत में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें चंपावत और पिथौरागढ़ के प्रगतिशील किसानों, समुदाय प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य पर्वतीय एवं स्वदेशी समुदायों को स्थानीय जैव-संसाधनों के सतत उपयोग और वैज्ञानिक प्रसंस्करण से जोड़कर आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करना रहा। यह कार्यक्रम उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी के अनुमोदन एवं मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग, स्कूल ऑफ साइंस की ओर से आयोजित किया गया। परियोजना को उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट), देहरादून से वित्तीय सहयोग मिला।

रोज हिप्स से लेकर मूल्य संवर्धन तक समझाई तकनीक
परियोजना अन्वेषक डॉ. एस.एन. ओझा ने रोज हिप्स के वैज्ञानिक संग्रहण, उचित कटाई, कटाई-पश्चात प्रबंधन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में उपलब्ध स्थानीय जैव-संसाधनों का वैज्ञानिक और सतत उपयोग कर समुदायों के लिए अतिरिक्त आजीविका के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, हिमाचल क्षेत्रीय केंद्र, मोहाल-कुल्लू की वैज्ञानिक-ई डॉ. सरला शाशनी ने ऑनलाइन माध्यम से विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। उन्होंने रोज हिप्स के सतत संग्रहण, सही समय पर कटाई, प्राथमिक प्रसंस्करण, गुणवत्ता बनाए रखने, भंडारण और मूल्य संवर्धन से जुड़ी तकनीकी जानकारी साझा की।
उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।

स्थानीय संसाधनों को आजीविका से जोड़ने पर जोर
परियोजना के सह-परियोजना अन्वेषक एवं अभिलाषा समिति, पिथौरागढ़ के निदेशक किशोर कुमार पंत ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग को ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में डॉ. विशाल कुमार शर्मा, सह-परियोजना अन्वेषक एवं अन्य विशेषज्ञों ने भी ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान रोज हिप्स के सतत संग्रहण से लेकर कटाई-पश्चात प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और संभावित औद्योगिक उपयोग तक विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

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कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेश मठपाल, रिसर्च एसोसिएट, यूकॉस्ट कैंप कार्यालय, खर्ककार्की, चंपावत ने किया। आयोजकों के अनुसार, पहल का उद्देश्य किसानों और स्थानीय समुदायों को वैज्ञानिक प्रसंस्करण की तकनीकों से जोड़कर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ आय के वैकल्पिक स्रोत और आजीविका के नए अवसर विकसित करना है।

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