समाचार सच, देहरादून। आज दून मे शरद पूर्णिमा के अवसर पर चंद्रमा की पूजा अर्चना की गई। इस अवसर पर डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने बताया की शरद पूर्णिमा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। शरद पूर्णिमा को कौमुदी यानी मूनलाइट में खीर को रखा जाता है। इस दिन शाम को मां लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन किया जाता है। सच्चे मन ने पूजा- अराधना करने वाले भक्तों पर मां लक्ष्मी कृपा बरसाती हैं। शरद पूर्णिमा की रात वैज्ञानिक दृष्टि से भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। चन्द्रमा से निकलने वाली किरणों में विशेष प्रकार के लवण व विटामिन होते हैं। जब यह किरणें खाने-पीने की चीजों पर पड़ती हैं तो उनकी गुणवत्ता और बढ़ जाती है। मान्यता यह भी है कि शरद पूर्णिमा की रात 10 से 12 बजे तक 30 मिनट के लिए चंद्रमा की रोशनी में रहना स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद रहता है।
डॉक्टर आचार्य सुशांत राज का कहना हैं की शरद पूर्णिमा का दिन बेहद अहम होता है। शरद पूर्णिमा पर अमृतमयी चांद अपनी किरणों से स्वास्थ्य का वरदान देता है। यह सभी पूर्णिमा की रातों में से सबसे अहम रातों में से एक है। इसी से ही शरद ऋतु का आगमन होता है। इस दिन खीर का विशेष महत्व होता है। खीर को चांद की रोशनी में रखा जाता है। माना जाता है कि चंद्रमा की रोशनी में रखी हुई खीर खाने से उसका प्रभाव सकारात्मक होता है। यह खीर रोगियों को दी जाती है। कहा जाता है कि इस खीर से शरीर में पित्त का प्रकोप और मलेरिया का खतरा कम हो जाता है। अगर यह खीर किसी ऐसे व्यक्ति को खिलाई जाए जिसकी आंखों की रोशनी कम हो गई है तो उसकी आंखों की रोशनी में काफी सुधार आता है। हृदय संबंधी बीमारी और अस्थमा रोगियों के लिए भी यह खीर काफी लाभदायक है। इससे चर्म रोग जैसी समस्याओं में भी सुधार आता है।
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