स्वामी विवेकानंद युवाओं के मार्गदर्शक : राज्यपाल

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राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने किया राजभवन से उत्तराखण्ड के युवाओं से वर्चुअल माध्यम से सीधा संवाद

समाचार सच, देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने बुधवार को राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर राजभवन से उत्तराखण्ड के युवाओं से वर्चुअल माध्यम से सीधा संवाद किया। यह संवाद कार्यक्रम दून विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित किया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने युवाओं से उनके कैरियर, आकांक्षाओं, भविष्य की योजनाओं, उत्तराखण्ड के विकास के सम्बन्ध में युवाओं का विजन तथा राष्ट्र निर्माण के बारे युवाओं के विचारों के बारे में चर्चा की। छात्र-छात्राओं ने राज्यपाल से विभिन्न मुद्दों पर बेबाक प्रश्न किए। राज्यपाल ले ज गुरमीत सिंह (से नि) राज्य के प्रतिभावान युवाओं के विचारों से बेहद प्रभावित हुए।

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दून विश्वविद्यालय में कैमस्ट्री की छात्रा हंसिका पराशर ने राज्यपाल से पूछा कि विद्यार्थियों के रूप में युवा राष्ट्र निर्माण में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं। इसके जवाब में राज्यपाल ले ज गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि यदि छात्र स्कूली जीवन से ही राष्ट्र निर्माण व समाज की भलाई के बारे में सोचना शुरू कर देते है तो यह स्वयं में एक बड़ी उपलब्धि है। प्रत्येक युवा का कर्तव्य है कि राष्ट्र विकास एवं कल्याण के बारे में विचार करें। हमारे युवा बिल्कुल सही दिशा में जा रहे है। युवाओं को हमेशा राष्ट्र सर्वापरि के मंत्र पर चलना चाहिए। मैं स्वयं जीवनभर इसी रास्ते पर चला। स्वामी विवेकानन्द जी भी राष्ट्र सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म मानते थे। युवाओं को धर्म, जाति, भाषा, प्रान्त जैसी संकीर्ण मानसिकताओं को समाप्त करके राष्ट्र सर्वोपरि के जुनून और जज्बे को कायम रखना है। यह कार्य सिर्फ और सिर्फ युवा ही कर सकते हैं।
मनोविज्ञान की छात्रा विज्ञानी ने राज्यपाल से प्रश्न किया कि आज के अधिकांश भारतीय युवा विदेशों में क्यों बसना और नौकरी करना चाहते है। राज्यपाल ले ज गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि हमें अपने देश और राज्य में ऐसा माहौल बनाना होगा कि अधिकांश युवा देश और अपने राज्य में ही रहे। विदेशों जैसी नौकरियां और सुविधाएं यहां विकसित करनी होगी। उत्तराखण्ड में रिवर्स माइग्रेशन हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। विडम्बना है आज जब भारत के प्रतिभावान नौजवान विदेशों में नाम कमाते हैं तो तब हमें अहसास होता है कि हमारे युवा कितने प्रतिभावान हैं। जबकि आज पूरी दुनिया का भारतीयों के प्रति नजरिया बदल चुका है। दुनिया मानती है कि भारत और भारतीयों में विशेषकर युवाओं में असीमित संभावनाएं और क्षमताएं है।

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छात्रा विपासा ने राज्यपाल से सवाल किया कि राज्य के उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और चमोली जैसे सीमान्त जिलों से पलायन किस प्रकार रोका जा सकता है। प्रश्न के उत्तर में राज्यपाल ने कहा कि सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण राज्य के सीमान्त जिलों में सड़क कनेक्टिविटी, पर्यटन विकास, होम स्टे, घराट, सोलर एनर्जी, हॉर्टीकल्चर आदि गेम चेंजर साबित होंगे। लेकिन रिवर्स माइग्रेशन के प्रयासों में स्थानीय भागीदारी विशेषकर युवाओं की भागीदारी अत्यन्त महत्वपूर्ण होगी। कोरोना ने हमें घर-गांवों में रहना सीखाया है।
स्कूल ऑफ डिजाइन के छात्र सकंल्प ने प्रश्न किया कि युवाओं को प्रगति करने के लिए राज्य में मूल सुविधाओं की कमी का कैसे समाधान किया जाए। राज्यपाल ले ज गुरमीत सिंह (से नि ) ने कहा कि भौतिक सुविधाओं एवं विषम भौगोलिक परिस्थितियों की कमी के बावजूद उत्तराखण्डवासियों ने अपने परिश्रम, लगन और प्रतिभा में देश और दुनिया में प्रत्येक क्षेत्र में वर्चस्व कायम किया है। यहां का मानव संसाधन, सोच विचार और क्षमता उच्च श्रेणी के हैं। भारत एक युवा देश है। युवा इस महान राष्ट्र की शक्ति, वर्तमान और भविष्य है। भारत को विश्व गुरू बनाने के मिशन में युवाओं की सबसे बड़ी भूमिका होगी। हमें ध्यान रखना है कि हमें विश्व का सबसे विकसित, प्रगतिशील और समृद्ध राष्ट्र बनना है, लेकिन इस दौड़ में हमें अपनी भारतीयता को नही खोना है। भारत की प्राचीन संस्कृति, परम्पराओं, सोच-विचार को संजो कर रखना है तथा पूरी दुनिया के सामने लाना है। हमारी भारतीयता ही हमारा डीएनए है। मानवता, दया, प्रकृति की पूजा, आध्यात्मिकता जैसे गुण हम भारतीयों को विरासत में मिले हैं। भारतीय होना ही हमें पूरी दुनिया में सबसे अलग और श्रेष्ठ बनाता है। भारतीयों को समरसता के मार्ग पर चलकर देश की प्रगति में योगदान देना है।

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राज्यपाल ले ज गुरमीत सिंह (से नि) ने स्वामी विवेकानंद को श्रद्धाजंलि देते हुऐ कहा कि आज हम भारत ही नहीं दुनिया के इतिहास के एक ऐसे महानायक, एक महान सन्यासी, हर युग में युवाओं के आदर्श और प्रेरणास्रोतए ज्ञान के योद्धा, धर्म के महान ज्ञाता की जयंती, मना रहे है, जिनके व्यक्तित्व के आकर्षण से कोई नहीं बच पाया। उनकी शख्सियत हमें आज तक सम्मोहित कर रही है। वह आज भी करोड़ों युवाओं के नायक हैं। मुझे स्वामी विवेकानंद जी का जरुरतमंदो की सेवा और परोपकार का सिद्धांत बेहद आकर्षित करता है। क्योंकि सिक्ख परम्परा में भी सेवा, दया, मानवता और परोपकार को सबसे उच्च स्थान दिया गया है। स्वामी विवेकानंद जी भारत के जरूरतमंद लोगों की मदद करना चाहते थे। उन्होंने मानव सेवा को ही सच्चा धर्म माना। आज के नौजवानों को भी अपने हर कार्य में सेवा और मानवता को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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इस कार्यक्रम में दून विश्वविद्यालय की कुलपति डा0 सुरेखा डंगवाल सहित विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, पदाधिकारियों एवं छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।

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