समाचार सच, देहरादून।
उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से तैयार एवं प्रकाशित तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का मंगलवार को लोक भवन, देहरादून में भव्य विमोचन किया गया। उत्तराखण्ड के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए इन्हें ज्ञान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
विमोचित पुस्तकों में ‘21वीं सदीः चुनौतियां और अवसर’, ‘विकसित भारत@2047—आत्मनिर्भर, समावेशी और सतत राष्ट्र निर्माण के बढ़ते कदम’ तथा ‘विकसित उत्तराखण्डः राज्यपाल के पंच स्वप्न और संदृष्टि’ शामिल हैं। इन पुस्तकों में 21वीं सदी की चुनौतियों, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण, सतत विकास, नवाचार, शिक्षा और उत्तराखण्ड के भविष्य के विकास मॉडल पर व्यापक विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा और शोध समाज तथा राष्ट्र के विकास की आधारशिला हैं। ऐसे अकादमिक प्रकाशन विद्यार्थियों, शोधार्थियों और नीति-निर्माताओं को नई दिशा देने का कार्य करते हैं।
कार्यक्रम में उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी, राज्यपाल के सचिव रविनाथ रामन, विभिन्न सरकारी एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति, लोक भवन के अधिकारी-कर्मचारी तथा विश्वविद्यालय के शिक्षक और अधिकारी उपस्थित रहे।
पुस्तकों के संपादन मंडल में शामिल प्रो. मंजरी अग्रवाल, प्रो. डिगर सिंह फर्सवाण, प्रो. जितेंद्र पाण्डेय और प्रो. कमल देवलाल सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों की भूमिका को भी सराहा गया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन पुस्तकों के प्रकाशन को अकादमिक, बौद्धिक और शोध गतिविधियों को नई ऊर्जा देने वाली महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह प्रयास विकसित भारत और विकसित उत्तराखण्ड के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में उपयोगी साबित होगा।

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