समाचार सच, खटीमा। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखने के लिए खटीमा के एक निजी स्कूल में कराई गई गतिविधि अब चर्चा का विषय बन गई है। स्कूल में बच्चों को मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल के नुकसान समझाने के लिए अपनाए गए तरीके का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक बच्चे की आंखों पर पट्टी बंधी दिखाई दे रही है, जबकि उसके माध्यम से मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर डर पैदा करने वाला संदेश दिया जा रहा है।
वीडियो में गतिविधि के दौरान कुछ बच्चे भावुक होकर रोते और घबराते नजर आ रहे हैं। वीडियो सार्वजनिक होने के बाद लोगों ने बच्चों के सामने इस तरह की गतिविधि कराने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। मामला शिक्षा विभाग तक पहुंचने के बाद अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि स्कूल में बच्चों को स्मार्टफोन, गेमिंग और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बचाने के उद्देश्य से यह गतिविधि आयोजित की गई थी। इसके तहत एक बच्चे की आंखों पर रंग लगाकर पट्टी बांधी गई। इसके बाद बच्चे के जरिए यह संदेश दिया गया कि ज्यादा मोबाइल चलाने की वजह से उसकी आंखों की रोशनी चली गई।
इस दौरान मौजूद अन्य बच्चों की प्रतिक्रिया वीडियो में साफ दिखाई दे रही है। कई बच्चे रोते हुए और घबराए हुए नजर आ रहे हैं। कुछ बच्चे मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने की बात कहते भी सुनाई देते हैं।
गतिविधि का उद्देश्य बच्चों को स्क्रीन टाइम कम करने के लिए जागरूक करना बताया जा रहा है, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद बच्चों पर पड़े भावनात्मक प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
उधम सिंह नगर के मुख्य शिक्षा अधिकारी हरेंद्र मिश्रा ने मामले का संज्ञान लेते हुए खटीमा के खंड शिक्षा अधिकारी को जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अब शिक्षा विभाग की जांच में यह देखा जाएगा कि स्कूल में गतिविधि किस उद्देश्य से और किन परिस्थितियों में आयोजित की गई थी। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि बच्चों के साथ ऐसी गतिविधि कराते समय उनकी उम्र और भावनात्मक संवेदनशीलता से जुड़े मानकों का ध्यान रखा गया था या नहीं।
मोबाइल, ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना अभिभावकों और स्कूलों के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि, खटीमा के इस मामले में जागरूकता के लिए अपनाए गए तरीके ने ही अब सवाल खड़े कर दिए हैं और शिक्षा विभाग की जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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