उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद की चेतावानी-8 नवंबर को करेंगे सचिवालय का घेराव

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समाचार सच, देहरादून। उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद संरक्षक नवनीत गुसाई ने कहा की उत्तराखंड राज्य निर्माण को 23 साल हो गये हैं, मगर राज्य निर्माण आंदोलनकारी के सपने आज भी पूरे नहीं हुये हैं, उनकी समस्याओं की तरफ सरकार ध्यान तक नहीं दे रहीं। आज उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। उनके सपनों का जो राज्य था वह नहीं बना है, इसलिए मजबूर होकर उन्हे सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। आंदोलनकारियों ने तय किया है कि वह 8 नवंबर को सचिवालय का घेराव करेंगे।

उन्होंने मांग की कि आंदोलनकारी जो चिन्हिकरण में छूट गए हैं उनका चिन्हिकरण किया जाए, आज यह देखने को मिल रहा हैं कि ऐसे लोग जिनका आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं था, उनको भी आंदोलनकारी बना दिया गया है। आन्दोलनकारियों ने वह समय देखा है जब शुरू में अखबारों में नाम होने की ही एक शर्त थी, और उसके आधार पर आंदोलनकारी बनाए गए थे। इस आंदोलन के अंदर कोई झोपड़ी, कोई घर ऐसा नहीं था जहां से बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर नहीं उतरे और विशेषकर महिलाएं लेकिन उस समय जो आंदोलन किया था, किसी पेंशन के लिए या आंदोलनकारी को चिन्हित करने के लिए नहीं किया था। आंदोलन इसलिए किया था कि हमारा अलग राज्य बने।

वार्ता में मुख्य रूप से जिला अध्यक्ष सुरेश कुमार, प्रभात, बीडी बोठियाल, जबर सिंह पावेल, इंदू नौटियाल, शोभा थपलियाल, मुन्नी खंडूरी, अनंत आकाश, राजेंद्र पुरोहित, रामपाल देवेश्वरी रावत आदि उपस्थित थे।

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